गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित

उत्तरकाशी: आरक्षण जब से तय हुआ है। उसके बाद से ही लगातार कई तरह के मामले सामने आ रहे हैं। अभी नैनीताल का ही एक मामला सामने आया था, जिसमें गांव में ग्राम प्रधान के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं मिला। मजबूरी में दिल्ली में रह रही महिला को चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। गांव में वही एक मात्र ऐसी महिला हैं, जो प्रधान पद का चुनाव लड़ने के योग्य हैं। वहीं, उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लाक का मल्ला गांव ऐसा है, जहां एक भी अनुसूचित जाति का परिवार नहीं है। बावजूद सीट प्रधान और क्षेत्र पंचायत के लिए आरक्षित कर दी गई। 


भटवाड़ी प्रखंड के मल्ला गांव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान और क्षेत्र पंचायत पद के लिए जिला प्रशासन की ओर से ऐसा अरक्षण तय किया गया, जिसको देखकर लगता है कि कहीं न कहीं गोलमाल है। दरअसल, उत्तरकाशी विकासखंड भटवाड़ी के मल्ला गांव में 2011 की जनगणना में गलती से 114 अनुसूचित जनजाति के लोग दर्शाये गये हैं, जो पूरी गलत है। वास्तव में मल्ला ग्राम सभा में एक भी परिवार अनुसूचित जनजाति का नहीं है। गांव में दो महिलाएं ही अनुसूचित जनजाति की हैं और इनका भी किसी दस्तावेज में कोई रिकार्ड नहीं है।

उत्तरकाशी के पीयूष टाइम्स ने रिपोर्ट पेश की है। उसमें कहा गया है कि 2014 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 2011 की जनगणना में 114 अनुसूचित जनजाति के लोगों के अनुसार मल्ला गंाव में प्रधान पद अनुसूचित जनजाति और क्षेत्र पंचायत समान्य पुरूष था। प्रधान पद पर मल्ला गांव के ग्रामीणों ने तत्कालीन जिलाधिकारी के पास आपति दर्ज कराई थी। नियमानुसार इस सीट को आरक्षित नहीं किया जा सकता है। उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीधरबाबू अद्दांकी ने मजिस्ट्रेटी जांच की गई और पाया गया कि वास्तव में मल्ला गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जनजाति का नहीं है। तब सीट बदली गई थी, लेकिन अब फिर से पहले जैसी ही स्थिति सामने आ गई है। 

इस बार होने नवाले पंचायत चुनाव में फिर से 2011 की जनगणना के अनुसार ही मल्ला गांव में 114 अनुसूचित जनजाति के लोग दर्शाये गए हैं। प्रशासन को इन सब बातों की जानकारी थी, फिर भी सीटों के आरक्षण में इसका ध्यान नहीं रखा गया है। मल्ला गांव के ग्रामीणों ने आपत्ति भी दर्ज की। इसके बाद भी आरक्षण को नहीं बदला गया।
गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 04, 2019 Rating: 5

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