बेशर्मी की सेल्फी: बिटिया के रेप पर भी सेल्फी एडवेंचर

कोटद्वार: कोटद्वार में मासूम के साथ दो नेपाली मूल के दरिंदों ने ऐसी दरिंदगी की, कि सुनकर हर किसी की रूह कांप गई। दरिंदे पहले गुड़िया को खिलौने के बहाने घर से रेलवे स्टेशन ले गए। वहां उसका मुंह दबाया। उसके साथ रेप किया। मुंह और गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। फिर उस फूल सी बच्ची के शव को पन्नी में बंद कर झाड़ियों में फेंक दिया। जिसके बाद में टुकड़े-टुकड़े बरामद किये गये। दरिंदों को फांसी देने के लिए आंदोलन होना ठीक बात है। उनको फांसी से कम कुछ होना भी नहीं चाहिए, लेकिन कमसे कम राजनीत ना हो। राजनीति हो भी, तो बेशर्मी की हदों को पार ना करें। कोटद्वार की घटना के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन में भी कुछ ऐसा ही शर्मसार करने वाला नजारा नजर आया...। देखकर आपका भी माथ ठनक जाएगा और बेशर्मी पर गुस्सा भी आएगा। 


पहला-
कोटद्वार में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में बच्ची को इंसाफ दिलाने और प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता सेल्फी लेती नजर आ रही हैं। बेशर्मी की सेल्फी। किसी मां-बाप ने अपने बाग का एक सुंदर फूल खो दिया और कांग्रेसी बच्ची के रेप और हत्या के आंदोलन में भी सेल्फी एडवेंचर खोज रहे हैं। तस्वीर को गौर से देखिये, सेल्फी लेने वालों के चेहरे पर मुस्कान भी साफ नजर आएगी। बेशर्मी की सेल्फी...।

दूसरा-
बच्ची के हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए कोटद्वार का झंडाचैक जाम रहा। महिलाओं से लेकर आम लोगों तक ने पूरी सड़क को जाम कर दिया। बाजार बंद कर दिए गए। लेकिन, जब बच्ची के अंतिम संस्कार की बारी आई तो कोई नजर नहीं आया। अंतिम संस्कार करते हुए बच्ची का परिवार और कुछ पुलिस के संवेदनशील जवान शामिल थे। संवेदनशील इसलिए कि एक पुलिस कर्मी को वहां बेहद भावुक हो गए थे। बच्ची को दफन करने से पहले उन्होंने कई बार हाथ जोड़े।

तीसरा-
कानून व्यवस्था के चाकचैबंद होने के दावे करने वाली सरकार और 13 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने वालों को फांसी की सजा देने वाले सरकार को अब भी नहीं सूझ रही। बयान देकर अखबरों की सुर्खियां बने और वाहवाही लूटने के बाद अपना बयाल ही भूल गए। देश के दूसरे राज्यों में कानून बना है। अगर नहीं भी है, तब भी भारतीय कानून के हिसाब से अगर सरकार गंभीरता दिखाये तो इस तरह के मामलों के लिए फांसी का प्रावधान है। सरकार को सोचना चाहिए।

चौथा-
बच्ची के साथ हुये जघन्य अपराध को लेकर सरकार के मुखिया को बयान देने की याद आई हद है। और तो और सरकार ने इस पर अपना रुख साफ करने में तीन दिन लगा दिए। कोटद्वार में पूरा कोटद्वार जिस वक्त सड़कों पर था। कोटद्वार भाजप के जिला अध्यक्ष नदारद रहे। मुख्यमंत्री कह रहे है कि हम पीड़ित परिवार की मदद करेंगे। कब...? सजा दिलाएंगे। कब...? आरोपी उसी दिन पकड़े जा चुके थे। अपना गुनाह भी कबूल चुके हैं। सारे सुबूत पुलिस के पास हैं। फिर देर किस बात की है। क्यों नहीं फांसी की सजा दिलाने का रिकार्ड बना लेते...?

                          ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)

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