इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा"

नरेंद्रनगर: जब शरीर साथ छोड़ने लगता है। आत्मा मरने लगती है। उम्र दगा देने लगती है। ऐसे में अगर अपने भी छोड़ दें, तो जीने की सारी उम्मीदें भी दम तोड़ने लगती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा आशियाना आशा किरण में नजर आता है। इस आश्रम में ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनको उनके अपनों त्याग दिया। जिनका कोई आश्रय नहीं है। कुछ दिव्यांग हैं। कहने को तो दिव्य अंगों को धारण करने वाले हैं, लेकिन उनको उनके अपनों ने ही दिव्य नहीं समझा। इन सभी निराश्रितों की आशा की किरण हैं सात समंदर पार बसी मैडम ‘‘आत्मा’’। इन सभी की आत्मा इन्हीं मैडम आत्मा में बसती है।

नरेंद्र नगर डिग्री काॅलेज की एनएसएस इकाई के स्वयंसेवकों ने इस आश्रम में जाकर आशियाना आशा किरण में निराश्रित और दिव्यागों के साथ समय बिताया। उनकी के दर्द को समझा। उनमें हौसलों से, मीठी बातों से उम्मीद जगाई। इस आश्रम का संचालन इंग्लैंड की मैडम आत्मा करती हैं। आश्रम में रहने वाले वृद्ध निराश्रित और दिव्यांगों की जुबां पर हर वक्त बस उनका ही नाम रहता है।
मैडम आत्मा उनके रोज-मर्रा की आवश्यकताओं को तो पूरा करती ही हैं। उनके खुद-दुख का भी पूरा ख्याल रखती हैं। उनको एहसास ही नहीं होने देती कि वो उनसे दूर हैं। अपने परिवार से दूर हैं। ये आश्रम अब इन निराश्रित और दिव्यांगों को अपना घर बना चुका है। धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर की एनएसएस यूनिट के स्वयंसेवक जब जनसंपर्क और स्वच्छता अभियान के अंतर्गत आश्रम भ्रमण पहुंचे, तो आश्रम वासियों ने उनको अपने दिल की बात बताई। उनसे अपना हर दर्द और हर खुशी बयां की।

भारत सरकार के युवा और खेल मामलों के मंत्रालय की ओर से 1 से पंद्रह 15 अगस्त तक स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत यह कार्यक्रम संचालित किया गया। इसके तहत छात्र-छात्राओं ने नरेंद्रनगर के आशा किरण आश्रम में निराश्रित लोगों से बात कर उनकी समस्याओं को जाना। आश्रम का कार्य देखने वाले पशुपति ने बताया कि आश्रम में बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों की देख भाल इंग्लैंड की महिला मैडम आत्मा ही देखती हैं। किडनी की बीमारी से ग्रसित बद्री प्रसाद मौर्या का कहना है कि हाल ही में ऋषिकेश के कोहली हाॅस्पिटल में उनकी किडनी का आॅपरेशन किया गया, जिसका पूरा खर्चा मैडम आत्मा ने ही किया। हाल ही में रीढ़ की हड्डी का आॅपरेशन करा चुके भारत सिंह भंडारी ने कहा कि हालांकि वे उत्तराखंड आंदोलन में सक्रिया भूमिका में रहे। लेकिन, आज शरीर ने उनको इस कदर घायल कर दिया कि व्हील चेयर ही अब जीवन साथी बन गई।
इस अभियान में एनएसएस प्रभारी सुधा रानी, डाॅ. संजय कुमार के अलावा प्राध्यापकों में डा. अनिल नैथानी, डा. विक्रम सिंह वर्तवाल, डा. मनोज सुंद्रियाल, विशाल त्यागी, रचना कठैत रावत, रंजना जोशी और छात्र छात्राओं में साक्षी, मीनाक्षी, सोनिया, अमित, जितेंद्र, गौरव, दीवान सिंह, सरिता, शीतल, आकाश आदि मौजूद रहे।
इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा" इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा" Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, August 13, 2019 Rating: 5

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