आपदा में रक्षक बना गढ़वाल राइफल का जवान, SDRF को लेकर सबसे पहले पहुंचे थे चिवां

आराकोट: सेना हमेशा से ही देश के काम आती रही है। चाहे बात सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेने की हो या फिर आपदा के समय लोगों की जान बचाने की। सेना के जवान खुद से पहले दूसरों को बचाने की सोचते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया 15 गढ़वाल राइफल के जवान दुर्गेश कुमार ने। दुर्गेश कुमार मूल रूप पौड़ी देवलगढ़ के रहने वाले हैं। इन दिनों रानीखेत में तैनात हैं। उनकी नत्नी शिक्षिका हैं और चींवां में पोस्टेड हैं।
 


प्रशासन को दी जानकारी

आराकोट क्षेत्र में आई भीषण आपदा में उनका परिवार भी वहां फंस गया था। चिवां गांव का किसी से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। और ना लोगों को कुछ समझ आ रहा था। 15 गढ़वाल राइफल के जवान दुर्गेश कुमार को जैसे आपदा का पता चला। उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों से उनके परिवार के वहां फंसे होने की बात कही। जिस पर उनके उच्चाधिकारियों ने तत्काल डीएम उत्तरकाशी को फोन पर पूरी जानकारी दी।

परिवार से पहले गांव वालों को बाचाया

दुर्गेश कुमार अलगे ही दिन किसी तरह आराकोट तक पहुंचे। वहां वो डीएम से मिले और एसडीआरएफ के तीन जवानों को लेकर चिवां गांव पहुंच गए। वहां से उन्होंने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। पहले गांव के बाकी लोगों को बाहर निकाला, जब गांव के सभी लोग सुरक्षित हो गए। उसके एक दिन दुर्गेश और उनका परिवार भी वहां आराकोट पहुंचा। वहां से वो परिवार को अपने साथ लेकर गांव देवलगढ़ ले गए।

सबसे पहले तस्वीरें लाये

चिवां गांव में हुई तबाही की पहली तस्वीरें और वीडियो भी दुर्गेश ही लेकर आये। उन्होंने ने ही प्रशासन को चींवां गांव में हुई तबाही की पूरी जानकारी दी। उसके बाद प्रशासन ने चींवां गांव में रेस्क्यू अभियान चलाया। दुर्गेश ने फिर साबित किया कि गढ़वाल राइफल क्यों दुनिया की सबसे बहादुर और समझदार फौज है।


आपदा में रक्षक बना गढ़वाल राइफल का जवान, SDRF को लेकर सबसे पहले पहुंचे थे चिवां आपदा में रक्षक बना गढ़वाल राइफल का जवान, SDRF को लेकर सबसे पहले पहुंचे थे चिवां Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 25, 2019 Rating: 5

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