अर्थव्यवस्था डूब गई बाकी सब ठीक-ठाक है...

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
भारत माता की जय...। भषण-दर-भाषण। मित्रों...पिछले चार सालों का अगर लेखा-जोखा लें तो आपको अचरज होगा कि देश की रफ्तार क्या है...? सवाल खुद ही पूछे थे...। जवाब भी दुख ही दिया...। अगला...पिछली सरकार में 6 साल में आठ बार ऐसे मौके आए, जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या फिर उससे नीचे गिरी...। अगला...फाइव ट्रीलियन डाॅलर...इसका सपना संजोया है...। अच्छे दिन आ गए...। जुबान पर आते रहे और आकर कहीं गुम भी हो गए...। शाहों के शाह...अमित शाह भी पीछे नहीं रहे। कहने लगे पिछले पांच सालों में हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया की ग्यारहवीं से 6 नंबर की हो गई...वो भी गिरते हुए...भई गजब है। 


विकास पगला गया है...। वो इस जिद्द पर उड़ा है कि मुझे होना ही नहीं है। मुझे ऊपर उठना ही नहीं है...। मुझे बस गिरे रहना है...। मुझे देश में आने से डर लगता है। कहीं...कोई मेरे साथ माॅब लिंचिंग ना कर दे...। डरता है कि कोई मुझे देशद्राही ना समझ बैठे...। विकास डर रहा है कि कहीं राष्ट्रवाद के शोर में मेरा शोर ना गुम हो जायेे...। कोई ऊंच-नीच हुई, तो कहीं फिर से आंकड़ों में कैद होकर ना रह जाऊं। 

नौकरियों की अब किसी को जरूरत ही नहीं रही...। सब चका-चक है। स्टार्टअप इंडिया...बगैर स्र्टाट हुए ठप हो गया है। स्टैंडअप इंडिया गिर कर उठ ही नहीं पाया...। न्यू इंडिया पुराना लगने लगा है...। पता नहीं क्या-कया...। क्या देश का क्या प्रदेश...? हर कहीं आंकड़ों की बाजीगरी...। अखबार से लेकर चैनल तक सब मोदी महिमा...। जीडीपी की खबर को एक स्टोरी में समेट दिया...बाकी सुबह से शाम तक बस भारत-पाकिस्तान। पाकिस्तान में भी इमरान खान को उतनी बार नहीं दिखाया जा रहा होगा, जितनी बार भारत में दिखाया जा रहा है। कुछ भक्तों ने न्यक्लियर युद्ध के समय कैसे बचेंगे...उसके तरीके तक बता दिये...। ताकि किसी को पता नहीं चले कि विकास का भर्गपात हो हो गया है...। लोगों को ये बता दिया जाए कि विकास होना ही नहीं चाहता...। 

विकासदर...एकदम से यूं ही नीचे नहीं गिरी...। वो तो लगातार अप्रैल-जून 2018 से ही बेचारी दर-दर की ठाकेरें खाकर गिरने को मजबूर है...। तब 8 प्रतिशत थी। जुलाई-सितंबर में एक ठोकर मारकर और नीचे गिरा दिया गया यानि 7 प्रतिशत। साल अब भी वही 2018, माह अक्टूबर-दिसंबर जीडीपी को एक धक्का लगाकर और रसातल की ओर धकेल दिया गया। यानि 6.6 प्रतिशत। अब साल बदल चुका है। यानि जनवरी-मार्च 2019 बेचारी जीडीपी विकास के ना होने के गम में और नीचे सरक गई। यानि 5.8 और अब घसटते-घसटते जीडीपी अप्रैल-जून में 05 के डबल फिगर में आ पहुंची है। 

सरकार की मानें तो ये 5 ट्रीलियन अर्थव्यवस्था तक एक झटके में पहुंचने से पहले गुलेल को पीछे खींचने जैसा है। यानि जितने पीछे तक गुलेल की रबड़ खींची जाएगी...जीडीपी उतनी ही तेजी से ऊपर जाएगी...। इसलिए सरकार जीडीपी को अभी जान-बूझ कर गिरा रही है। धन्य हैं भक्तगण...। जय हिन्द।
अर्थव्यवस्था डूब गई बाकी सब ठीक-ठाक है... अर्थव्यवस्था डूब गई बाकी सब ठीक-ठाक है... Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 31, 2019 Rating: 5

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