गुरुजी के लिए आंदोलन: सरकार इस्तीफा क्यों नहीं दे देते, या तो हमें शिक्षक दो या फिर स्कूल बंद करो

  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)
‘‘या तो हमें स्कूल दो या फिर स्कूल बंद करो। आखिर हमारा क्या होगा ? हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों ? आखिर हमारा दोष क्या है ? सरकार शिक्षक विहीन स्कूल बंद क्यों नहीं कर देती ? विज्ञान नहीं, हिन्दी नहीं, संस्कृत नहीं, प्रधानाचार्य नहीं, तो फिर राजनीति नेता, विधायक और मंत्री क्यों ? शिक्षा मंत्री हाय-हाय...।’’ ये सारे नारे बैजरों की सड़कों और बसों पर नजर आ जाएंगे। इंटर काॅलेज के छात्र-छात्राएं गुरु जी के लिए सड़क पर हैं। सिस्टम और सरकार एसी कमरों में भी चादर ओढ़े कैद है।  


 
बैजरों इंटर काॅलेज में गुरुजी के लिए छात्रों का आंदोलन जोर पकड़ रहा है। इंट्रो मंे जो भी लिखा है। ये वो नारे हैं, जो शिक्षक नहीं होने से मायूस हो रहे छात्र-छात्राओं के हाथों नजर आ रही हर तख्मी में नजर आ रहे हैं। शिक्षा मंत्री हाय-हाय के नारे छात्रों की जुबां पर हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि वो कितने दुखी और परेशान हैं। उनको अपने भविष्य की चिंता खाई जा रही है। सरकार फिर भी सो रही है। देहरादून में बैठकर दावे कर रही है। शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री नाराज हैं और शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से नाराज हैं। आखिर कब तक नाराजगी के इस खेल में बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। 

बच्चों के मुंह से निकले हाय-हाय के नारों की हाय त्रिवेंद्र सरकार को लगनी तय है। तय मानिये, जिस तरह से आज बैजरों इंटर काॅलेज के बच्चे सड़क पर हैं। उसी तरह दूसरे स्कूलों के बच्चे भी सड़क पर होंगे और फिर धीरे-धीरे जिला मुख्यालय। अगर सरकार नहीं जागी तो, छात्रों के आंदोलन की आग देहरादून पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। उन बच्चों को भविष्य क्या होगा जिनके को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक ही नहीं है। उस स्कूल में इंटर-हाई स्कूल का परिणाम क्या होगा, जहां बच्चों को कक्षा में होना चाहिए था, लेकिन वो सड़क पर अपने लिए गुरुजी मांग रहे हैं। 


सीएम त्रिवेंद्र रावत की सरकार पलायन को रोकने के दावे करती है। सरकारी स्कूलों के बंद होने का रोना रोती है। कारण ढूंढने की जरूरत नहीं है। बैजरों में बच्चों के आंदोलन की मांग पलायन और सरकारी स्कूलों की बदहाली का कारण है। आप कब तक दावे करते रहेंगे ? हां अगर पांच साल बाद सन्यास का प्लान कर लिया हो तो ठीक है। शिक्षा मंत्री का काम भी नाटक से नहीं चलने वाला। उनको आज नही तो, 2022 में तो जवाब देना ही होगा। 

बैजरों इंटर काॅलेज में विज्ञान विषय के शिक्षत तो हैं ही नहीं। कला वर्ग के विषय भी नहीं है। सरकार कहती है कि हमने हर विद्यालय की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाया है। लगता तो ऐसा है कि सरकार ने शिक्षा को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। सरकार का एजेंडा विद्याभारती को मजबूत करने का ज्यादा नजर आता है। सरकारी स्कूलों की तरफ ध्यान ही नहीं है। सरकार स्कूल बंद कराये जा रहे हैं। सरकार पलायन रोकने के दावे करती है, लेकिन जब हम पहाड़ में बच्चों को शिक्षा के अवसर तक नहीं दे पा रहे हैं, तो रोजगार के अवसर कैसे दे पाएंगे। कब तक पलायन आयोग के नाम पर ठगी कर पहाड़ को छलते रहेंगे ?
गुरुजी के लिए आंदोलन: सरकार इस्तीफा क्यों नहीं दे देते, या तो हमें शिक्षक दो या फिर स्कूल बंद करो गुरुजी के लिए आंदोलन: सरकार इस्तीफा क्यों नहीं दे देते, या तो हमें शिक्षक दो या फिर स्कूल बंद करो Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 03, 2019 Rating: 5

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