आपदा पीड़ितों के हमदर्द बने DM आशीष चैहान, खतरनाक राहों पर कुछ कर गुजरने का दमदार सफर

  • पहाड़ समाचार
जब कोई संकट में हों और कुछ समझ में ना आये, तब कोई ऐसा सख्श चाहिए होता है, जो आगे आकर लीड करे। उत्तरकाशी डीएम आशीष चैहान भी इस समय उसी तरह लीडर बनकर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों पर रौब नहीं झाड़ रहे, बिल्क खुद मजदूरों की तरह काम में जुटे हैं। उनसे मुझे कुछ शिकायतें व्यक्तिगततौर पर हैं, पर ये वक्त व्यक्तिगत का नहीं। सामूहिक सहयोग और मिलकर कर आगे बढ़ाने का है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब तक गया नहीं, लेकिन डीएम आशीष चैहान की जो तस्वीरें अब तक सामने आई हैं। लोगों से बात करके जो चीजें निकलकर आई हैं। वो बतें तो यही कहने को मजबूर करती हैं कि वैलडन आशीष चैहान। वैलडन आशीष चैहान मैं दूसरी बार लिख रहा हूं...।



ना कपड़े बदलने का वक्त ना हाने का 

डीएम आशीष चैहान से एक-दो बार की बात हुई। विजन अच्छा है। उसके बाद मैंने उनको फोन किये, लेकिन जवाब एकका भी नहीं मिला। शायद उनको अलोचना पसंद नहीं होगी...जो मैं अक्सर तथ्यों की मजबूत नींव पर करता हूं। बहरहाल इन दिनांे डीएम आशीष चैहान पिछले छह दिनों से लगातार आपदा प्रभावित क्षत्रों में डटे हैं। आमतौर पर वो दाढ़ी तो रखते हैं। लेकिन, बढ़िया सजाकर रखते हैं। इन दिनों उनकी दाढ़ी काफी बढ़ी हुई है। तीन दिनों तक तो एक ही जोड़ी कपड़े पहने रहे, नहाने तक भी भी उनको मौका नहीं मिला। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में वो जिले के सबसे बड़े अधिकारी की तरह रौब में रह सकते थे, लेकिन वो लोगों की दुख-दर्द में उन्हीं की तरह नजर आ रहे हैं।

लेगों का दुख-दर्द बांटते डीएम

डीएम आशीष चैहान लोगों के साथ उनके दर्द बांट रहे हैं। वो लोगों के साथ जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं, तो कभी पर लोगों को गले लगाते नजर आ रहे हैं। कुछ जगहों पर वो लोगों के आंसू पोंछते भी दिखाई दिये। मीडिया के सामने सहजता से आते हैं और पूरी स्थिति को सहजता से बता भी देते हैं। एक-एक चीजे तथ्यों के साथ, जो आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण होता है कि लोगों के पास एकदम सही जानकारी पहुंचे।

गजब का जज्बा

वो जितनी भाउकता से लोगों को सहारा दे रहे हैं। उतने ही बड़े जज्बे से लोगों की मदद कर रहे हैं। रेस्क्यू के हर अभियान पर उनकी कड़ी नजर है। जहां भी पहुंचना पड़े हर दम तैयार नजर आ रहे हैं। अब तक वो लगभग सभी प्रभावित गांवों में पहुंच चुके हैं। डीएम ने अपने जज्बे से लोगों के दिलों में भी जगह बनाई है। लोग उनको देखकर ही अपने दुख भूल जाते हैं।

लोगों को समझाने में सक्षम

अक्सर आपदा की स्थिति में लोग परेशान होकर आक्रोशित हो जाते हैं, लेकिन अब तक आराकोट क्षेत्र के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी एक भी घटना सामने नहीं आई है, जिसमें किसी ने प्रदर्शन किया हो या फिर आक्रोश दिखाया हो। लोगों ने प्रशासन की जमकर तारीफ की है। जबकि सरकार से कड़ी नाराजगी जताई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि डीएम आशीष चैहान लोगों की भावनाओं को समझने में कितने पारंगत हैं या कहें कि उनको इसमें महारथ हासिल है।

आशीष, मंगलेश, षणमुगम से सीखना चाहिए

ये मैसेज उन अधिकारियों के लिए है, जो डीएम सचिव बनकर दफ्तारों में कुर्सियां तोड़ रहे हैं। फिल्मी हीरों की तरह जहां भी जाते हैं कैमरामैन साथ होते हैं। कुछ अधिकारी फेमस जरूर हो गए, लेकिन उनके ट्रैक रिकार्ड बताते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं किया। कुछ अधिकारी ऐसे हैं, जिनको उत्तराखंड को इतिहास और भूगोल भी मालूम नहीं। जिम्मेदारियां बड़ी-बड़ी मिली हैं। राज्य के विकास की योजनाएं उनको बनानी हैं, लेकिन दफ्तर से बाहर निकलने में उनको गर्मियों लू और सर्दियों ठंड लगने का डर होता है। ऐसे अधिकारियों आशीष चैहान, मंगेश घिल्ड़ियाल और षणमुगम जैसे अधिकारियों से सीखना चाहिए...।

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
आपदा पीड़ितों के हमदर्द बने DM आशीष चैहान, खतरनाक राहों पर कुछ कर गुजरने का दमदार सफर आपदा पीड़ितों के हमदर्द बने DM आशीष चैहान, खतरनाक राहों पर कुछ कर गुजरने का दमदार सफर Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, August 23, 2019 Rating: 5

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