बोडा-बोडी का फोन बाया था पूछ रहे थे....ये ‘‘हरकू’’ कौन है...बल ?

‘‘हरकू...’’। नमस्कार...। आप समझ ही गये होंगे। बोडी अर बोडा ने मुझे इतना ही बताया। उन्होंने भी मुझसे यही कहा था कि बाकी तो तू समझ ही गया होगा बल...। अब मेरी इतनी हिम्मत है नहीं कि मैं उनसे सवाल...जवाब करता। वो तो धन्य हो उनका जो मुझे इन नेताओं के बारे में कुछ ना कुछ बताते रहते हैं। मैं ठैरा लाटा...। मुझे कुछ पता ही नहीं चलता। अब कोटद्वार की ही बात ले लो...। हरकू ने बल लोगों को नदी में डुबाने का पूरा इंतजाम कर लिया और हमें आज तक पता ही नहीं चला...। तो हुए ना हम लाटे...। ये भी पता नहीं ला कि ये हरकू कौन है...? सुना तो से भी है कि उसे भी लोग लाटा ही बोलते हैं बल प्यार से...। 

कोटद्वार में खनन के लिए इमेज परिणाम 
अब आपको बोडा-बोडी की बात बताते हैं। वो बात कुछ ऐसी है कि बोडा का फोन आया था। उन्होंने बोला कि हरकू के कोटद्वार का घर भी नदी के पास है बल...। एक दिन उसने खुद ही बोला था टीवी वालों से कि उनको भी रात को खनन करने वाली मशीनों की कांक लगती है बल...। बल देना जरूरी है। बात का वनज बढ़ता है बल...। ये बात भी बोडी ने बोली कि नदी में डुबा देगा बल एक दिन...। ये पता नहीं क्यों बोली...। पर जब उन्होंने कुछ बात बोली है, तो आप तक तो पहुंचानी ही पड़ेगी बल...। 
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असल बात तो यह है कि वनों के रखवालों को हरकू की ज्यादा चिंता है। लोग मरें तो मरें उनकी बला से। वैसे हरकू भी खनन के मामले में बहुत गंभीर है। मशीनों के शोर से कान और नींद तो खराब होती है...पर करे भी क्या...? बेचारे की मजबूरी जो है। पैसा भी तो कोई चीज होती है। होती है कि नहीं...? नदी चैनलाइज करने में किसी परिवार का चैनल हमेशा के लिए बंद हो जाए तो क्या फर्क पड़ता है...? बोडी ने कहा है मान जावो बल...वरना ठीक नहीं होगा। 
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अब बार-बार मक्खन तो मिलने से रहा। जहां का चारा एक बार खाया, वहां को वो दोबारा खाते ही नहीं। फिर फर्क भी क्यों पड़ेगा बल...। चुनाव-उनाव जो लड़े वो लड़े, मेरा क्या जाता है। कोई नदी में डूब मरे या किसी का घर खनन की खोदी खाई में डूब जाये उन्हें क्या...? अब आजकल के राजा तो अलग ही राजा होता है...उसे प्रजा से क्या...? गुर्गे भी तो हैं, जिनको पालना है। वही तो चुनाव में दारु-मुर्गे का इंतजाम कराएंगे। उनकी बला से जनता जाये भाड़ में। अगर आपको पता चले इस हरकू के बारे में तो मुझे भी बता देना बल...।


                            ....प्रदीप रावत (रवांल्टा)
बोडा-बोडी का फोन बाया था पूछ रहे थे....ये ‘‘हरकू’’ कौन है...बल ? बोडा-बोडी का फोन बाया था पूछ रहे थे....ये ‘‘हरकू’’ कौन है...बल ? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 26, 2019 Rating: 5

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