पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि

भविष्य की चिंता हर किसीको होती है। सीएम साबह भी तो बेचारे इंसान ही हैं। वैसे जब से वो कुर्सी पर बैठे हैं। उन पर कुछ दैवीय शक्तियां भी अवतरित होती रहती हैं। जब किसी पर देवता आता है, तो उसकी बाॅडी में पहले कंपन होता है। आप समझ ही गए होंगे कि त्रिवेंद्र जी पर देवता आया रहता है। इसीलिये तो वो कांपते रहते हैं। यही वो दिव्य शक्तियां हैं, जो उनसे भयंकर-भयंकर काम कराती रहती है। इसमें उनका जरा भी दोष नहीं है...। समझ तो गए ही होंगे आप...।

खैरासैंण के सूरज से लोगों को रोशनी की उम्मीद थी। लोगों को क्या पता कि किताब लिखने वाले ने अपना सूरज चमकाने के चक्कर में खैरासैंण का सूरज रच दिया। लोगों को खतरनाक सपने दिखाने के लिए वो भी कम दोषी नहीं हैं। वैसे एक बात तो ये भी सही है कि सीएम बनने के बाद शपथ वाले दिन कहा था कि किसी को परेशान नहीं होने देंगे। अब अगर वो भूत, वर्तमान और भविष्य को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, तो क्या बुरा है...? बेमतलब लोगों की खोपड़ी खराब है। 

 बेचारे पूर्व सीएम बेहद गरीबी में जिये। उनके पास अन्न का एक दाना नहीं। दाने-दाने को मोहताज हैं...। जब से नेता बने। चटाई पर सो रहे हैं। लोगों से मांग-मांग कर खा रहे हैं। किसी-किसी के पास तो दिल्ली, देहरादून, गोवा, मुंबई, नैनीताल, अल्मोड़ा...कहीं भी सिर छुपाने तक की जगह तक नहीं है। कार तो उनमें से किसी ने देखी ही नहीं। बस सरकारी कार का ही आनंद लिया है, जीवनभर। उनकी अपने खाने की तो आदत ही नहीं। सरकार का खाया है और सरकार का ही खाते रहेंगे। गाड़ी-घोड़ा भी सरकार का ही चलाते रहेंगे। भला वो सरकार के जमाई जो घोषित हैं। 

पर्सनल असिस्टेंट, जनसंपर्क अधिकारी, सारथी, गाड़ी-घोड़ा की टूट-फूट, मरम्मत, चैकीदार, माली, टेलीफोन उठाने के लिए क्रेन रूपी कर्मचारी, कोई मारपीट ना कर दे। उससे बचाने के लिए सुरक्षा गार्ड। कुल मिलाकर प्रथम से चतुर्थ श्रेणी तक सबकुछ फिटफोर। मकान टूटा-फूटा तो उसकी मरम्मत भी सरकार कराएगी। तुम्हारी जेब से थोड़े कुछ जा रहा है, जो तुम्हारे पेट में दर्द उठ रहा है। चुप रहो। कोई तुमसे छीनकर थोड़े ही दे रहा है। सब सरकार का है। 

सरकार भी बड़ी चालू चीज है। मतलब राजा और मंत्री ने जनता की जेब पर डाका डाल दिया और किसी को कानों-कान खबर भी नहीं लगी। जनता ने 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगे पर सलाम ठोकने लायक बनाया और उसी जनता को ठोकर मारने पर तुले हैं। भूल जातें हैं कि जिस दिन जनता अंगुली करेगी। ना सलाम ठोकने लायक बचेंगे और ना ठोकर मारने लायक। जब तक रहेंगे, ठोकरें ही खाते रहेंगे। काश सबका नसीब इन गरीब, असाह, निरीह पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह होता। पूर्व होने वालों की तो बात ही अलग है। जनता ने इनको अपना नसीब बनाने की ताकत दी। वो हैं कि अपना ही नसीब चमकाने पर तुले हैं। धन्य हैं...खैरासैंण का सूरज।

                                                                                ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 17, 2019 Rating: 5

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