पंचायतों में मनमानी नहीं कर पाएंगे प्रशासक, नितिगत फैसलों पर हाईकोर्ट की रोक

नैनीताल: सरकार ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को उल्लंघन कर मनमाने ढंग से पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिये। सरकार के फैसले को ऊधमसिंह नगर के नईम अहमद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट सरकार को करारा झटका देते हुए प्रशासकों नितिगत फैसले लेने पर रोक लगा दी। सरकार को हर मामले में हाईकोर्ट से या तो फटकार मिल रही है या फिर फैसले वापस लेने पड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को फटकार लगाते हुए 31 जुलाई तक शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा है।

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याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में सरकार ने कहा कि चार महीनों के भीतर राज्य में पंचायत चुनाव करवा दिया जाएगा, लेकिन कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि जब 15 जुलाई को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो गया था तो संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों नहीं की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने टिप्पणी की कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है पर संवैधानिक दायित्व निभाने पर चुप रहा। 

प्रदेश में 15 जुलाई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्यकाल पूरा होने तक चुनाव कराने अनिवार्य हैं, लेकिन सरकार ने चुनाव कराने के बजाए ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी। गूलरभोज ऊधम सिंह नगर निवासी नईम अहमद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में मांग की गई है कि राज्य में संविधान का अनुछेद 356 के तहत सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।
पंचायतों में मनमानी नहीं कर पाएंगे प्रशासक, नितिगत फैसलों पर हाईकोर्ट की रोक पंचायतों में मनमानी नहीं कर पाएंगे प्रशासक, नितिगत फैसलों पर हाईकोर्ट की रोक  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, July 26, 2019 Rating: 5

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