स्कूल के बच्चे भूखे-प्यासे ना रहें, उत्तरा पंत दूर गांव से ढोह रही पानी

नमस्ते सरकार। ये वही उत्तरा पंत बहुगुणा हैं, जिनको आपने धमकाया था। जिन पर आपने सस्पेंड करने का रौब दिखाया था। क्या हुआ ? उत्तरा दीदी ने उस दिन भी उदाहरण पेश किया था और आज भी कर रही हैं। वो पहले से ज्यादा मजबूत हो गई। वो कहती हैं कि जनता दरबार उनकी मजबूरी था। दीदी कहती हैं कि गुरु अधर्मी शिष्य दुर्योधन के भय से शिक्षा देना तो बंद नहीं कर देगा। दीदी के लिए उनका कर्म ही उनकी पूजा है। वो कहती हैं कि...मैं मात्र एक गुरु ही नहीं हूं, मैं मदर इंडिया हूं...।


जिस स्कूल में उनकी तैनाती है। उसी स्कूल में आज भी मेहनत से जुटी हैं। नेताओं को देखना चाहिए कि रिटायरमेंट की उम्र को तेजी से पाटती उत्तरा पंत बहुगुणा किस तरह से स्कूल और स्कूल के बच्चों के लिए काम कर रही हैं। उनका समर्पण देखो और सोचो की नेताओं की पत्नियां भी उत्तरा पंत की तरह अपने सिर पर बच्चों के लिए पानी का ढायेंगी। कभी नहीं। उनके तो संस्कार ही कुर्सीतोड़ होते हैं। 

उत्तरा पंत बहुगुणा ने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड किया है। उस वीडियो में वो अपने स्कूल के लिए गांव में जाकर वहां से अपने सिर पर पानी ढो रही हैं। इसलिए कि उनके स्कूल के बच्चों को मध्याहन भोजन पक सके। उत्तरा पंत ये सब इसलिए कर रही हैं कि उनके स्कूल के पानी के कनेक्शन का पाइप चोर उखाड़ ले गए। भोजन माता का हाथ फ्रेक्चर है। वो पानी नहीं ला सकती और खाना भी नहीं बना पा रही हैं। उत्तरा दीदी ने बच्चों को पढ़ाया, खाना भी खिलाया और पानी भी पिलाया। क्या सत्ता के दम पर सालों से मैदान मारने वाले ऐसा कर पाएंगे...? तय आपको करना है।

नीचे उत्तरा दीदी की पोस्ट....
जनता दरबार में जाना मेरी मजबूरी थी, अन्यथा मेरा कर्म ही मेरी पूजा है। यदि गुरु अधर्मी शिष्य दुर्योधन के भय से शिक्षा देना बंद कर देगा, तो वो धर्म की रक्षा के लिए अर्जुन जैसे शिष्य को भी शिक्षित नहीं कर पाएगा। मैं मात्र एक गुरु ही नहीं हूं, मैं मदर इंडिया हूं।

देश के किसी भी कोने में जाऊंगी, सभी बच्चों को मां तुल्य स्नेह और संरक्षण ही दूंगी। आज झूठ के साम्राज्य में सच्चाई का बखान तो कोई करेगा नहीं, उल्टा नमक मिर्च लगा कर परोसा जाएगा। इसलिए अपने मुंह मियां मिट्ठु बनकर, अपनी काबलियत को स्वतः ही उजागर करके, झूठों के थोपे गए झूठे आरोपों का खंडन करना अति आवश्यक हो जाता है। केवल धनोपार्जन के लिए गुरु बनने और समाज के हर वर्ग और क्षेत्र को शिक्षित करने के लिए गुरु बनने में जमीन-आसमान का फर्क है। गुरु पदवी लेने मात्र से कोई गुरु नहीं हो जाता।


स्कूल के बच्चे भूखे-प्यासे ना रहें, उत्तरा पंत दूर गांव से ढोह रही पानी स्कूल के बच्चे भूखे-प्यासे ना रहें, उत्तरा पंत दूर गांव से ढोह रही पानी Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, July 25, 2019 Rating: 5

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