त्रिवेंद्र चचा, गले में मरे सांपों की माला न डालो, प्लीज

  • गुणानंद जखमोला 
त्रिवेंद्र चचा मैं जानता हूं कि आपकी परवरिश बहुत ही गरीब और साधारण परिवार में हुई है। आठ भाइयों में सबसे छोटे हैं आप। बहुत मुश्किलों से घर चलता था। चचा, आपने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। और जब आप जीवन के सबसे बड़े मुकाम पर हो, तब आप भूल रहे हो कि प्रदेश के 90 प्रतिशत लोग आप गरीब हैं। उनकी मेहनत और गाढ़े पसीने की कमाई को आप इन दर्जाधारियों पर मत लुटाओ प्लीज। 


मंत्रियों को दिल्ली में उत्तराखंड भवन होते हुए भी फाइव स्टार होटल में ठहरने की छूट भी कर्ज में डूबे उत्तराखंड के साथ नाइंसाफी है। अच्छा चचा, मैं आपसे पूछ रहा हूं, आपने जो 75 दायित्वधारी नियुक्त किये हैं, उनकी परफारमेंस रिपोर्ट तो मांगों जरा कि क्या किया है इतने महीनों में। गौरक्षा समिति बनाई, गायें आपको मंत्रियों के आवास यमुना कालोनी में खुले में घूमती मिल जाएंगी। ज्वाल्पा देवी परिसर में हर साल सैकड़ों लावारिश गाय मर जाती हैं और वहां अण्थवाल जी का पोस्टर हंसता रहता है। 

सिंचाई के दर्जाधारी की करतूत देखो, रिस्पना में पिछले साल लगाये गये डेढ़ लाख पौधे गायब हैं। पूरी की पूरी बिंदाल नदी सिंचाई विभाग के रिकार्ड में ही नहीं है। कोई रिपोर्ट दी गई आपको? अल्पसंख्यक आयोग लोगों को धमकाने के लिए है, काम जीरो, महिला आयोग की उपलब्धि जीरो। आप इन दर्जाधारियों को जो प्रदेश पर बोझ बने हैं, उनको और सुविधाएं देना चाहते हैं, बिल्कुल दें, लेकिन काम का हिसाब तो मांगे। 

चचा यह वेतन जो उनको निकम्मेपन के लिए दिया जा रहा है वो आपके घर से नहीं, जनता की जेब से जाएगा, जरा सोचिए? एक ओर सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए आपके पास धन नहीं है। राजस्व बढ़ाने के तरीके आपको आते नहीं, हिलटाॅप शराब की फैक्टरी से क्या राज्य चल पाएगा? विचार कीजिए चचा।

(सीनिसर जर्नलिस्ट गुणानंद जखमोला की ये फेसबुक पोस्ट उत्तराखंड में तेजी से वायरल हो रही है। वो जो भी लिखते हैं। लोग हाथों-हाथ लेते हैं। तीखा लिखते हैं। उनके शब्दों में ऐसी मारक क्षमता है, जैसी किसी के पास नहीं। अखबारों में काम करते थे, तब भी और आज भी।)
त्रिवेंद्र चचा, गले में मरे सांपों की माला न डालो, प्लीज त्रिवेंद्र चचा, गले में मरे सांपों की माला न डालो, प्लीज Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, July 21, 2019 Rating: 5

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