30 साल से लकड़ी के पुल को संवार रहे हैं ग्रामीण, नेताओं ने वादे किए, निभाए नहीं

बिगराड़ी (बड़कोट): 30 सालों में बहुत कुछ बदल गया। गांव खाली हो गए। शहर कंकरीट की इमारतों में दब्दील हो गये। लेकिन, उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लाक में बिगराड़ी ग्रामसभा और करनाली ग्रामसभा को दुनकेश्वर महादेव मंदिर के पास जोड़ने वाला पुल पिछले 30 सलों में आज तक नहीं बना। खास बात यह है कि ये पुल पिछले 30 सालों से सामुहिक प्रयास और जिम्मेदारियों पर टिका है। हैरानी इस बात की है कि चाहे लोकसभा से लेकर विधानसभा, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तक हर चुनाव में नेता आते हैं। वादे करते हैं लेकिन, फिर अगले पांच साल तक लौटकर नहीं आते। इस पुल के साथ भी ऐसा ही हुआ, जो भी नेता आया। सबने वादे किए, लेकिन उनको निभाया किसीने भी नहीं। 

दो ग्राम सभाओं को जोड़ने वाला पुल

दो ग्राम सभाओं और गांव को जोड़ने वाला पुल करीब 30 साल पहले बनाया गया था। पुल करनाली और बिगराड़ी गांवों के लोगों के लिए खासा महत्वपूर्ण है। दोनों गांवों की खेती साझा है। बगीचों तक पहुंचने का भी यह पुल एक मात्र जरिया है। लकड़ी से बना ये पुल अब जर्जर हो गया है। इसकी हातल बदहाल है। लोगों ने इस बार भी सामुहिक प्रयासों से एक बार फिर से इसकी मरम्मत की है।

सामुहिक प्रयायों से मरम्मत

इतना ही नहीं पिछले 30 सालों से लोग सामुहिक प्रयायों से इसकी मरम्मत कर रहे हैं। लोगों ने पुल को चलने लायक बनाए रखने के लिए वन विभाग से छपान में मिलने वाली लकड़ी को पुल के लिए दान कर दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुल लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

जर्जर है लकड़ी से बना पुल 

पुल की जर्जर हालत के कारण इस पर जाने से भी डर लगता है, लेकिन लोगों की मजबूरी है कि लकड़ी के इसी जर्जर पुल से उनको अपने रोजमर्रा के कामों के लिए जाना है। विकास के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन किसीने इस पुल की सुध नहीं ली। विधायक से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तक कोई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन कहीं से भी इसके लिए बजट नहीं मिला।
30 साल से लकड़ी के पुल को संवार रहे हैं ग्रामीण, नेताओं ने वादे किए, निभाए नहीं 30 साल से लकड़ी के पुल को संवार रहे हैं ग्रामीण, नेताओं ने वादे किए, निभाए नहीं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, July 11, 2019 Rating: 5

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