झा के जादू से बाहर झांको, लाटा चचा, जुल्म न करो

  • गुणानंद झखमोला
उत्तराखंड सूचना आयोग के मुख्य आयुक्त का ड्राईवर तदर्थ नौकरी पर है। उसकी बेटी प्राची ने अपने पिता के सपनों को रंग देने की कोशिश की है। उसने हाल में नीट क्वालीफाई किया है। नीट तो पास हो गयी पर अब चार लाख रुपये सालाना फीस कहां से लाएगी? चार साल, चार लाख फीस, ऊपर के खर्चे अलग। हास्टल की फीस, रहना-खाना आदि अलग।
त्रिवेंद्र चचा सोचो, आप भी तो दो बेटियों के पिता हो। चचा बुरा न मानना, आपके स्वास्थ्य सचिव नीतिश झा का दिमाग सातवें आसमान पर है। चचा आपने इस बिहारी दंपति को इतना सिर चढ़ा दिया है कि वह अपने को खुदा समझने लगे हैं और उत्तराखंडी उन्हें कीड़े-मकोड़े नजर आ रहे हैं। चचा कुछ सोचो, आप तो अच्छे इंसान गिने जाते थे। आप पर काले जादू का असर है। आपको पता है, बिहार के पटना के आईजीआईएमएस मेडिकल कालेज की सालाना फीस 36 हजार है।

 

दरभंगा मेडिकल कालेज की 9000, चम्पारन की 13000, दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कालेज की 2445 और लेडी हार्डिंग की मात्र 1355 रुपये सालाना फीस है। लखनऊ केजीएमआई की 80 हजार है। तो चचा आप बताओ, हल्द्वानी और दून मेडिकल की फीस चार लाख क्यों? क्या हम पहाड़ियों को अपने ही राज्य में डाक्टर बनने का अधिकार नहीं? बोलो चचा, क्या तुम्हारा दिल नहीं पसीजता? क्या बेटियों को डाक्टर बनते नहीं देख सकते? प्लीज, कुछ करो चचा, ऐसा जुल्म न करो। बेटियों के सपनों का सवाल है।

गुस्ताखी माफी...आपकी ये पोस्ट फेसबुक पर काफी वायरल हो रही है। हमने सोचा कि अपने पाठकों के लिए भी पेश कर दी जाए।

नोट: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनपक्षीय मसलों पर हमेशा से ही बेबाक लिखते आए हैं। और हां बेबाकी से बोलते भी हैं।


झा के जादू से बाहर झांको, लाटा चचा, जुल्म न करो झा के जादू से बाहर झांको, लाटा चचा, जुल्म न करो Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, July 10, 2019 Rating: 5

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