यहां बेटों के लिए बेटियां पैदा की जाती हैं, मारी नहीं जाती

  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)
133 गांव में एक भी बेटी पैदा नहीं हुई। अखबरों ने खूब खबरें छापी। चैनलों ने भी बिग ब्रेकिंग चलाई। अखबारों  और कई न्यूज पोर्टलों ने तो यहां तक खबरें चला दी कि उत्तरकाशी के जिन गांवों में बेटियां पैदा नहीं हुई। उन गांवों के आस-पास अल्ट्रासांड कराने के लिए  मोबाइल वैन आती है। इन मोबाइल वैनों में अल्ट्रासांड  किया जाता है। उत्तरकाशी में बेटियों को मारा जा रहा है। अचानक से शांत और अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाने वाला उत्तरकाशी जिला बेटियों को हत्यारा घोषित किया जाने लगा। लेकिन, अब जो रिपोर्टें सामने आई हैं। वा ना तो टीवी में नजर आ रही हैं, ना न्यूज पोर्टल और ना किसी अखबार के पहले पेज पर।


उत्तरकाशी जिला ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में भू्रण हत्या का सवाल ही पैदा नहीं होगा। खासकर शांत पहाड़ी जिलों में। हमने ऐसे कई उदाहरण देखें हैं। ऐसे कई घर देखे हैं। जहां बेटों की चाहत में पांच से छह बेटियां पैदा हो जाती हैं। बेटियों को मारा जाना तो दूर की बात है। डीएम डाॅ.आशीष चैहान को लोग अच्छा अधिकारी बताते हैं। होंगे भी, लेकिन जिस तरह से उन्होंने उत्तरकाशी की छवि को बिगाड़ा है। बतौर महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्य गलत आंकड़ों ने उत्तराखंड की छवि को देश-दुनिया में धक्का लगा है।

क्या डीएम इस क्षति को पूरा कर पाएंगे ? सरकार को तय करना है कि इस तरह की गंभीर लापरवाही के लिए क्या सजा होनी चाहिए। दूसरी बात ये है कि अधिकारियों को खबरों में बने रहने या खबरें प्लांट कराने से बचना चाहिए। वरना उत्तरकाशी जैसी दूसरी बड़ी गलतियां भी हो सकती हैं, जिसका खामियाजा, जिले को ही नहीं राज्य को भुगतना पड़ता है। 

अब ताजा आंकड़ों की बात करते हैं। आंकड़ों की बात करें तो उत्तरकाशी जिले के के जिन 133 गांवों में केवल लड़कों के पैदा होने की बात सामने आ रही थी, वो पूरी तरह गलत साबित हुई। महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग ने आंकड़े सामने आने के बाद सर्वे कराया। उसमें प्रत्येक सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक का डाटा खंगाला गया। उसमें ये बात सामने आई है कि इन गांवों में 62 लड़कियां भी पैदा हुई हैं। 

आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो इन गांवों में 160 बालक और 62 बालिकाओं ने जन्म लिया। स्वास्थ्य विभाग के हवाई सर्वे के मुताबिक इन गांवों में 216 बच्चे पैदा हुए थे, जिनमें एक भी बालिका नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे पर वैसे तो पहले दिन से ही सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब सरकार को मामले की गंभीरता से जांच करानी चाहिए कि गड़बड़ी कहां हुई है। जिले के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उत्तरकाशी को भ्रण हत्या का गढ़ बना दिया गया। सभी को सोचाना होगा कि किस तरह से खबरों में बने रहने के लिए गलत आंकड़े जारी किए गए। कार्रवाई तो हानी ही चाहिए। 
यहां बेटों के लिए बेटियां पैदा की जाती हैं, मारी नहीं जाती यहां बेटों के लिए बेटियां पैदा की जाती हैं, मारी नहीं जाती Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, July 30, 2019 Rating: 5

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