प्रतिस्थानी कोई चीज नहीं जो लाकर रख दी जाए...पहले ट्रांसफर, अब रोक

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर स्थानांतरण किए गए हैं। सरकार ने या शिक्षा विभाग के अधिकारी अनपढ़ नजर आते हैं। पहले ट्रांसफर कर दिए। अब अलां-फलां, डिमका-फसका के आदेश निकाल रहे हैं। सरकार के नए आदेश के अनुसार दुर्गम में तैनात एकल शिक्षकों के स्थानांतरण इसलिए रोके जा रहे हैं, क्योंकि उनके स्थान पर कोई प्रतिस्थानी नहीं है। क्या ये जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की नहीं कि, जो शिक्षक कई सालों से दुर्गम में तैनात हैं। उनकी जगह पर सुगम के ठाठ-बाट वाले शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से भेजा जाए। सवाल ये है कि सुगम में जमे शिक्षकों को दुर्गम में भेजने की जिम्मेदारी सरकार की है। ये एकल शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं कि वो अपने स्थान पर प्रतिस्थानी लाए। सरकार को प्रतिस्थानी की व्यवस्था करनी चाहिए।


कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है, ताकी सेटिंग-गेटिंग का खेल आराम से खेला जा सके। दरअसल, शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें लिखा गया है कि दुर्गम में तैनात शिक्षक सुगम में नहीं आना चाहते हैं। उनके स्थानांतरण स्थगित कर दिए जाएं आखिर क्यों ? जब अनिवार्य ट्रांसफर का नियम है और बाकायदा एक्ट बनाया गया है, फिर क्यों स्थानांतण स्थतिगत किया जा रहा है। 

एक विद्यालयों में तैनात शिक्षक कब तक अंज्ञातवास या वनवास काटते रहेंगे। कई शिक्षक ऐसे हैं, जो उत्तरकाशी से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तस कर पिथौरागढ़ अपनी तैनाती स्थल पर तीन दिनों के सफर के बाद पहुंचता है। यही बात पिथौरागढ़ वाले शिक्षक के लिए भी है, जो कई किलोमीटर दूर उत्तरकाशी जिले में सालों से दुर्ग में तैनात है। क्या इन शिक्षकों को एकल शिक्षक हाने की सजा दी जानी चाहिए ? क्या इन शिक्षकों पर इस तरह के आदेश थोपे जाने चाहिए ? क्या इन शिक्षकों को उनके समर्पण की सजा दी जानी चाहिए ?

महत्वपूर्ण बात यह है कि दुर्गम से स्थानांतरित किए गये शिक्षकों के प्रतिस्थानी शिक्षक पहले भेजे जाने चाहिए थे। सवाल यह भी है कि जब तक कोई सीट खाली ही नहीं होगी, जब तक पहले तैनात शिक्षक को रिलीव नहीं किया जाएगा, तब तक संबंधित विध्यालय में पद रक्त ही नहीं माना जाएगा। जहां तक प्रतिस्थानी लाने का सवाल है, ये पूरी तयह गलत है। उसमें पहली बात यह है कि किसी शिक्षक को प्रतिस्थानी लाने का अधिकार ही नहीं है। दूसरा ये कि प्रतिस्थानी कोई वस्तु नहीं है, जिसे उठाकर स्कूल में रख दिया जाए। ये भेहद गंभीर सवाल हैं...?

ये तमाम सवाल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की या तो अदूरर्शिता है या फिर कुछ झोल है। इन सवालों को जवाब उन शिक्षक संगठनों को भी पूछना चाहिए, जो शिक्षकों के नाम पर मौज करते हैं। उनको इस वक्त अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। ये वक्त उस वोट का हिसाब बराबर करने का है, जिसे हासिल कर वो पदाधिकारी बने हैं। हालांकि उनको भी नेताओं की तरह वोट के वक्त ही वोट की चिंता रहती है। पद मिलने के बाद वो शिक्षकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परित्याग कर देते हैं और अपनी सुख-सुविधाओं के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाते हैं। केवल इतना ही नहीं, ये गंभीर जांच का विषय भी है। इसकी जांच भी की जानी चाहिए। 

प्रतिस्थानी कोई चीज नहीं जो लाकर रख दी जाए...पहले ट्रांसफर, अब रोक प्रतिस्थानी कोई चीज नहीं जो लाकर रख दी जाए...पहले ट्रांसफर, अब रोक Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, July 03, 2019 Rating: 5

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