सुना है CM साबह गुस्से में हैं...पर चैंपियन को देखते ही गुस्सा ठंडा हो जाता है

चैंपियन ने उत्तराखंड की मां-बहिन की। ये सरकारी गुंडा खुलेआम उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं का बलात्कार करता है। बार-बार करता है। सरकार चुप है। पार्टी चुप है। तर्क ये कि हम लोकतांत्रिक हैं। किस बात के लोकतांत्रिक ? क्या आपकी पुलिस भी लोकतांत्रिक हो गई ? कानून को तो अपना करना चाहिए। करना चाहिए या नहीं ? या आप करने नहीं दे रहे हैं ? और हां सीएम साहब आपकी बहादुरी को सलाम। चैंपियन की गालियों और हथियारों ने आपको आहत नहीं किया, लेकिन खुद पर अभद्र टिप्पणी हुई तो आप बौखला गए। उत्तराखंड आपसे नहीं, हम और आप उत्तराखंड से हैं...। 

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ये ठीक है कि राजपाल रावत ने अभद्रता की। उनको ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, ये भी उतना ही सच है कि आपकी सरकार ने भी उनके परिवार के साथ अभद्रता की है। क्या राजपाल कोई आतंकी था, जो पुलिस उसके घर में जबरन घुस गई ? क्योंकि वो चैंपियन नहीं था, उसने उत्तराखंड को भी गाली नहीं दी। उसने आपको गाली दी तो आप भड़क गए। जिस उत्तराखंड के बूते आप मुख्यमंत्री हैं, उसका अपमान आपके लिए अपमान नहीं। उसके लिए बस एक बयान दे दिया। क्यों नहीं पुलिस को आदेश देते हैं कि चैंपियन को सलाखों के पीछे डाल दो। डरते हो...कहीं आपकी कुर्सी खतरे में ना पड़ जाए...।

उत्तराखंड भी खुदको धिक्कारता होगा कि उसके नाम पर जो सत्ता की मलाई चाट रहे हैं। उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि उसे गोली देने वाले को सबक सिखा सके। उत्तराखंड रोता होगा कि खुद पर आई, तो तिलमिला गए और मेरी अस्मिता को गाली देने वाले, मेरी प्रजा को गाली देने वाले को खुली छूट। 108 के कर्मचारियों की मौत पर बन आई है। सरकार पता नहीं किस घमंड में है। सुनिए जनाब सत्ता आज है, कल होगी या नहीं। इतना तय मानिये कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो सत्ता 2022 में दूसरे छोर पर आपसे दूर खड़ी नजर आएगी। 

अभद्रता किसी को भी नहीं करनी चाहिए। आपकी सरकार तो हर रोज अभद्रता करती है। बेरोजगारों के साथ हर रोज खेल खेलती है। जब से आप सरकार में आए, बेरोजगारों को रोजगार मिलना तो दूर, जो नौकरी कर भी रहे थे, उनको आपकी सरकार ने सड़क पर ला खड़ा किया। कितने ही परिवारों की आपकी सरकार ने रोजी-रोटी छीन ली। कितने ही बच्चों से उनके अच्छे स्कूल छीन लिए। आपके कृषि मंत्री खुलेआम कहते हैं कि वो जनता के नौकर नहीं हैं। 
 
नौकरी के नाम पर आपने अखबारों को केवल खबरें और खबरों की हेडिंगें दी। रोजगार के नाम पर अब तक केवल घोषणाएं ही हुई हैं। आपके मंत्री हर दिन जनता के साथ के भरोसे को तोड़ते हैं। आप कुछ करते हैं क्या ? एक नहीं आपकी सरकार के मंत्रियों की अभद्रता के कई उदाहरण हैं। संभलिये...वैसे भी आप बहुत दूर निकल चुके हैं। पीछे मुड़कर फिर से मंजिल हासिल करना अब आपके लिए उतना आसान नहीं रहा। 
....प्रदीप रावत (रवांल्टा)


सुना है CM साबह गुस्से में हैं...पर चैंपियन को देखते ही गुस्सा ठंडा हो जाता है सुना है CM साबह गुस्से में हैं...पर चैंपियन को देखते ही गुस्सा ठंडा हो जाता है Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, July 15, 2019 Rating: 5

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