आओ रवांई को जानें...सैनी त बोलौं सेंराईं, क्यारक छाड़ी कूल, कुन्यार मेरी तेबारी, बिला नगरास फूल

  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)
गज्जू अर मलारी। कति त लोकु नि गीत सुणी गालिल। कती छोड़, पर मलारी अर गजू की कथा एतना भी लोक तत्या मिठा लाइकिनी सुंणूत। अमार उत्तराखंड की एक एंणि लोकथा ज्यांक बार में सुणी किनी दुर-दुर नि आऊं लोक त्यांक बार मां पता करन ली। कुजाण कतियूं नि त्यांक प्रेम कथा क बारा लेखी गाली अर कतियूंनि गीत लाई गाली। अब पैली बार आमर रवांई अर देश क प्रसिद्ध साहित्यकार लोक क चितेर कहानीकार, कवि, नाटककार महाबीर रवांल्टा नि नाटक क रुप में लेई ‘‘एक प्रेम कथा का अंत’’। भौत ही सरल भाषा में जु सारी दुनिया जांणली। साहित्य की सबु विधा मां त्यूंनी आपड़ी अलग पच्छ्याण बंणाईं। त्यूं किनी एतरा रवांई की पच्छ्याण बि।


गजू-मलारी कथा खूब सुंणत आम लौड्याण। कंणीक टग बि रंई ति। छोड़ त मुंई आपु बि लाऊं अजेरी तांई। बंठ्या छैईना आंद पर लाई-लाई जांव। एक प्रेम कथा कु अंत नाटक पड़दु-पड़दु मुंई बि दूंण्या अर भितर्या तांई पौंछी। नाटक मां आपड़ी बोली-भाषा मां काफी कुछ लेखियूं। छोड़ सबा तंण्या, जंण सि छ त। 

पैली अध्याय मां गांव ड पैली जातरु-बातरु मां क्या लगति तांदी। ठंडियूं मां या र त दिई बान क लाखड़। जंण्या नाटक शुरू ह। मुंई येंणु तति कि मुंई तेखी हंदलु बेसियूं। मेरे जुकुड़े क्या बंठ्या किनी लेखियूं। एइमा गजू अर मलारी कु मिलन। मलारी क बाल्या कि छुंई-बाता भी भौत बंठ्या किनी मेसिईं। गजू बोल कि...सेलु त बोलौं लंडुक्या, तबै बटी जालु दाऊं, क्वेक्या की माते तुम ध्यानटुड्या, बोली देऊ आपणु नाऊं। सलारी नि बी गजू छोड़ लाइ किनी तेइक बारा मां पूछी। छोड़ू पड़ी किनी आम जु लौड्याण देखते करदुक्या। त्यूं दिन बिड़ी पड़ टग। 

नाटक मां मलारी अर गजू क प्यार क बार मां नाटकरकार ली एंणु तकिनी, जंणु सु तेखी हंदलु बेसियूं। कत्याना तकिंदू कि एतरा लेखिली तेई जमान की कथा। सौंदाण ज चींड आ त नाटक की लाइन पढ़दु बेरा आपु बी चींड आ। कालेकि नाटकरकार ने जतराक नाटक लेखिलु, कुजांण कति बार सु आपुई मां बड़-बड़ांणुलु आपुई मां। मलारी अर सलारी कि छुंई पढ़ी किनी तके कि कतरा सकदु त्यां किनी मिली। जीवंत छुईं-बाता। बचीं हंदली जंणी। सलारी अर मलारी। 

सौंदाण अर तेइक घरवाई बाता बि मेरी जुकुड़े। एक तिरा बा की चिंता, एक तिरा मां-बाबा कु प्यार। गजू अर मलार कु बारा मां सुंणदुई बोल सौंदाण कि मारी ढौं मुंई या। पर, ज तेइकि बेसमाट बुजा तेई तक सु बेटी का प्यार लि रो कि करनु। परिवार में वास्तव में एंण्या ह, जो कोइक सात बाज कतरईं येंणगु। मलारी अर गजू की कथा कोई ना सकण्या दोराई। नाटकार ने गां फंड की चुकलेर बेसमाटु क बार मा बि लेखियूं। नाव बिड़ बेसमाटु की गपी तुम बी सुंणिली। जु छुंई कोखिनी ना फैलती, सी पांणु बिड़ी न त सैयदा गां फुंडी। 

मलारी अर गजू कु मिलन। मलारी बिछाणौंदी पणीं। गजू आंण आऊ। यां बाता सुंणीकिनी मलारी मरदु-मरदु भी जी उठ। यंण तक मलार कि उडेई नणुं तु गजू बिड़। फुंडाऊ गजू, मलारी किनी मिलनि बाटा लगियूं। एक तिरा मलारी किनी मिलनी हौंस अर होईक तिरा, मलार्या क बा कु डर। एति बड़िया नाटक लेखियूं कि एक बार पढ़नु शुरू करल ज त जेख तांई खतम ना होई, तेखतांई पढ़ी बि करनु तू। 

आओ रवांई को जानें...सैनी त बोलौं सेंराईं, क्यारक छाड़ी कूल, कुन्यार मेरी तेबारी, बिला नगरास फूल आओ रवांई को जानें...सैनी त बोलौं सेंराईं, क्यारक छाड़ी कूल, कुन्यार मेरी तेबारी, बिला नगरास फूल Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, June 01, 2019 Rating: 5

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