‘‘चल मेरे पिट्ठू...दुनिया देखें’’

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
चल मेरे पिट्ठू दुनिया देखें। अगर आपको वास्तव में दुनिया देखनी हो, जाननी हो, तो चल मेरे पिट्ठू सिर्फ आपके लिए है। फिलहाल ये किताब बंद है। मैंने भी इसे नहीं पढ़ा है। लेकिन, जिनकी ये किताब है। मैनें उनको पढ़ा है। इसलिए कह सकता हूं कि ये किताब आपको उत्तराखंड और देश के दूसरे कोनों से रू-ब-रू कराएगी। किताब कमल दा के लिखे यात्रा अनुभवों पर आधारित है। कमल दा को गए हुये दो साल हो गए हैं, लेकिन अब भी यही लगता है कि वो वापस लौट आएंगे। 3 जुलाई को देहरादून के टाउन हाॅल में कमल दा की दूसरी पुण्य तिथि कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आप भी आइयेगा।
लगता है जैसे कमल दा फिर ये कंदे पर हाथ रखकर कहेंगे और बालक क्या चल रहा है। उनकी कही बातें हर दिन किसी न किसी बहाने याद आती रहती हैं। जब भी कहीं फंसता हूं। कमल दा याद आते हैं। कमल दा जब भी जाते थे, तो पहाड़ ही जाते थे। पहाड़ उनमें समाया हुआ था। वो और उनका पिट्ठू तभी नजर आता था, जब वो कहीं से कोई खूबसूरत और पहाड़ को बयां करती फोटो अपनी फेसबुक आईडी पर अपलोड करते थे। कमल दा पहाड़ को जानते और जीते थे। जिस गांव में जाते। वहीं के होकर उस गांव, उस पहाड़, उस पगदंडी, उसकी हरेक चीज को अपना बना लेते थे। ना कोई बाइड, ना कोई साथी। बस कमल दा और उनका पिट्ठू और उस पिट्ठू से झांकते उनके कैमरे के लैंस।
उनका पिट्ठू हर वक्त तैयार रहता था। कमल दा अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। एक-दो साल से नहीं कई सालों से, लेकिन बीमारी भी उनके हौसले के आगे पस्त हो जाती थी। ऐसा लगता था कि बीमारी उनके पिट्ठू को देखकर डर जाती होगी कि ये तो मुझसे डरने वाला और हारने वाला नहीं। उन्होंने हर बार खुद को विजेता साबित किया। उनके फोटो जब भी आते, पहाड़ और पहाड़ी की मुश्किलों, उनकी पीड़ा, उनकी आशाओं और उनकी सोच, उनके जीवन को उकेर कर रख देते थे।
उन्होंने अपने जीवनकाल में जितनी भी यात्राएं की होंगी और जिनको लिखकर कहीं संभाल लिया होगा। ये ‘‘चल मेरे पिट्ठू दुनिया देखें’’ के जरिये पहली बार आम लोगों के सामने होगा। उनकी ये किताब हर घुम्मकड़ी करने वाले के लिए गीता ग्रंथ साबित होगी। फोटोग्राफी करने वालों के लिए भी शानदार पुस्तक साबित होगी। साथ ही पहाड़ और पहाड़ की समस्या को समझने में बहुत बड़ी मददगार साबित होगी। फिलहाल आपकी तरह मुझे भी उस पल का इंतजार है जब ये किताब हम सबके हाथों में होगी।

‘‘चल मेरे पिट्ठू...दुनिया देखें’’ ‘‘चल मेरे पिट्ठू...दुनिया देखें’’ Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, June 28, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.