त्रिवेंद्र सरकार के संकटमोचक थे प्रकाश पंत...अब कौन बनेगा त्रिवेंद्र का सहारा

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
प्रकाश पंत। ऐसा नेता, जिसे खोने का गम हर किसी को परेशान कर रहा है। भावुक कर रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक की आंखें प्रकाश पंत के निधन से नम हो गईं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रकाश पंत को अपना छोटा भाई कहते थे। निधन की खबर सुनने के बाद भी सबसे पहले उन्होंने यही कहा था कि उन्होंने अपना छोटा भाई खो दिया। सही मायनों में प्रकाश पंत सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए उनके अब तक के पूरे कार्यकाल में संकटमोचक साबित होत रहे थे। सदन में जब भी सरकार पर विपक्ष भारी पड़ता, प्रकाश पंत संकटमोचक की तरह खड़े होते और विपक्ष को चुप करा देते। प्रकाश पंत ने सीएम की सदन से गैरमौजूदगी का कभी सरकार पर असर नहीं पड़ने दिया।

सरकार के लिए थे संकटमोचक
 
प्रकाश पंत अकेले ऐसे नेता थे, जिनको हर मंत्रालय के बारे में गहरी जानकारी थी। हर विषय पर उनकी पकड़ ही उनको बेहतर साबित करती थी। त्रिवेंद्र सरकार खासकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए प्रकाश पंत हर बार अपनी गहरी पकड़ के चलते संकटमोचक बनकर सामने आते थे और सरकार को हर मुश्किल से निकालकर बचा ले जाते थे। उन्होंने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की कमी अपनी सरकार को सदन में कभी नहीं खलने दी। सीएम त्रिवेंद्र रावत सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के दावे तो जरूर करते थे, लेकिन सदन में कम ही मौके आए, जब उन्होंने विपक्ष के सवालों के जवाब दिए हों। जब भी सरकार घिरती नजर आई। प्रकाश पंत सरकार के लिए संकटमोचक की तरह खड़े नजर आए। जब भी प्रकाश पंत जवाब देने के लिए खड़े होते, विपक्ष के सवालों की धार कुंद हो जाती थी। 

विपक्ष को भी करते थे प्रेरित 
 
त्रिवेंद्र सरकार के अब तक के जिनते भी सत्र हुए, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की हिस्सेदारी सत्रों में कम ही रही। उनकी अनुपस्थिति में प्रकाश पंत ही जिम्मेदारी संभालते थे। वो अकेले ऐसे नेता थे, जो विपक्ष के नेताओं को भी विधानसभा में सवाल उठाने के लिए प्रेरित करते थे। कई बार तो वो खुद ही विपक्ष के नेताओं को सवाल बता दिया करते थे। उनके बताए सवालों से फिर विपक्ष सरकार के मंत्रियों का घेराव करते देते थे। जब सब हार जाते, तब प्रकाश पंत फिर से सरकार के लिए जीत बन कर खड़े हो जाते और खुद के बताए सवालों के जवाब देकर विपक्ष के नेताओं को संतुष्ट कर देते थे। प्रकाश पंत युवा नेताओं को भी प्रेरित करते रहते थे।



किताबें पढ़ने का शौक
 
आमतौर पर नेता या दूसरे लोग अपनी गांड़ी में अपनी जरूरत की चीजें लेकर चलते हैं। प्रकाश पंत की एक खास बात ये थी कि वो अपनी गाड़ी में किताबें रखना कभी नहीं भूलते थे। उनकी गाड़ी में दर्जनों किताबें रहती थी, जिनको वो सफर के दौरान पढ़ा करते थे। प्रकाश पंत की साहित्य में गहरी रुचि थी। उनको कविताएं लिखने का भी बड़ा शौक था।



त्रिवेंद्र सरकार के संकटमोचक थे प्रकाश पंत...अब कौन बनेगा त्रिवेंद्र का सहारा  त्रिवेंद्र सरकार के संकटमोचक थे प्रकाश पंत...अब कौन बनेगा त्रिवेंद्र का सहारा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, June 06, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.