मुस्कराइये कि आज सरकार पौड़ी में थी...

  • चंद्रशेखर पैन्यूली
उत्तराखंड राज्य के 7 जिलों का मंडल मुख्यालय पौड़ी आज गुलजार है। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सचिव, डीएम, अधिकारी, कर्मचारी सभी पौड़ी में हैं। मौका है गढ़वाल मंडल मुख्यालय की स्थापना की स्वर्ण जयंती के अवसर पर कैबिनेट बैठक का।ये वही पौड़ी है जो यूपी के जमाने में तो खूब गुलजार रहता था। तब यहां काफी चहल पहल होती थी, लेकिन राज्य बनने के बाद ये सुंदर शहर वीरान होता गया। हालात ये हुए कि मुख्यालय में न नियमित रूप से अधिकारी बैठते हैं, न ही कर्मचारियों का मोह इस सुंदर नगरी से रहा।


हर किसी की दौड़ अस्थाई राजधानी देहरादून ही है। आज के ही दिन 1969 में कुमाऊं कमिश्नरी से अलग होकर गढ़वाल मंडल बना, जिसका मुख्यालय पौड़ी बनाया गया। इसके अंर्तगत तब पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, उत्तरकाशी और देहरादून जनपद आते थे। बाद में रुद्रप्रयाग के अलग जिले बनने और हरिद्वार के भी अलग जिला बनने के बाद उसे उत्तराखंड में मिलाने से उसको भी गढ़वाल कमिश्ननरी में जोड़ा गया। कुल मिलाकर गढ़वाल मंडल में 7 जिले आते हैं। इसी मंडल के तहत बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे विश्व प्रसिद्ध तीर्थ आते हैं, तो औली, जोशीमठ, पौड़ी, श्रीनगर, लैंसडौन, कोटद्वार, गोपेश्वर, नई टिहरी, धनौल्टी, मसूरी, हर्षिल, बड़कोट जैसे पर्यटक स्थल भी आते हैं। गंगा, यमुना, अलकनन्दा का उदगम भी इसी मंडल से होता है, तो ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे पवित्र स्थल भी इसी के तहत आते हैं।

इतना सुंदर नगर होने के बावजूद भी ये मंडल मुख्यालय आज अपनी बदहाली पर रो रहा है। सुंदर प्राकृतिक नजारों से लकदक, हिमालय दर्शन करवाने वाला ये शहर आज उदासीन है। क्योंकि यहां पर कई मूलभूत सुविधाओं से लोगांे को वंचित रहना पड़ रहा है। इस शहर की मुख्य समस्या पेयजल की है। इसके अलावा यहां अधिकारियों के नियमित न बैठने से लोगांे को अपने कामांे के लिए देहरादून दौड़ लगानी पड़ती है। पहाड़ांे से पलायन रोकने के लिए जो आयोग बनाया था, उसने भी पलायन कर लिया। अब तो लोग भी बड़ी संख्या में पलायन कर देहरादून, ऋषिकेश, रुड़की में शिफ्ट हो रहे हैं। भगवान कंडोलिया की भूमि पौड़ी आज अपनी वीरानी पर रोती है। क्यूंकालेश्वर भगवान और लक्ष्मी नारायण जी भी शहर की बदहाली पर जरूर आक्रोशित होंगे। आज कमिश्ननरी के 50 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और संयोग देखिये कि सरकार के साथ ही यहां के कमिश्ननर वीवीआरसी पुरुषोत्तम भी यहां से कूच करेंगे और उनकी ये दौड़ दिल्ली जाकर रुकेगी। 

आज तक के 50सालों के सफर में कई कमिश्ननर आये गये, लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद इस शहर के प्रति अधिकारियों का मोह कम ही रहा। इसीलिए वो देहरादून से ही काम काज चलाते रहे।
गढ़वाल मंडल के प्रथम कमिश्ननर एस.सी सिंघा से लेकर एमबीएस टैंसी, बीएम बोहरा एस.एस पांगती, सुभाष कुमार, एम बाधवानी, एस वेंकटरमानी, सुवर्धन शाह एशैलेश बगोली, वीवीआरसी पुरुषोत्तम आदि अधिकारयों के हाथों समय-समय पर गढ़वाल आयुक्त की कमान रही, कोई पौड़ी की रौनक को बरकरार नहीं रख पाया। सांस्कृतिक, राजनीत्तिक और सामाजिक गतिविधयों की केंद्र स्थली रही पौड़ी नगरी आज सूनी है। उसका कारण हमारी राजनीत्तिक शून्यता और पहाड़ों के प्रति कोई विशेष विजन का न होना ही है। पौड़ी ने उत्तराखंड गठन के बाद राज्य को मुख्यमंत्री के रूप में अलग-अलग सरकारों में मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा और वर्तमान त्रिवेन्द्र रावत मुख्यमंत्री दिए। इसके अलावा ये वही पौड़ी है जिसने कई अन्य बड़े धुरंधरों को जन्म दिया। जिनमे ंवर्तमान में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं, तो केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, बीजेपी मीडिया प्रमुख राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, गढ़वाल सांसद तीरथ रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और थलसेना अध्य्क्ष जनरल विपिन रावत भी पौड़ी के ही हैं।

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता रहे एच.एन बहुगुणा भी पौड़ी के ही थे। बहुगुणा ने अपने समय पर पौड़ी को संवारने के लिए अच्छा कार्य किया था। उन्होंने पौड़ी के निकट खिर्सु को भी पर्यटन मानचित्र पर एक विशेष पहचान दिलाई पर आज के नेताओं में वो दूरदर्शिता नहीं दिखती है। इतने बड़े नाम यहां से होने पर भी ये मंडल मुख्यालय बदहाल है। कभी आज जैसी रौनक से गुलजार रहने वाला पौड़ी अब कभी कभार ही ऐसी भीड़-भाड़ और रौनक को देख पाता है।
मुस्कराइये कि आज सरकार पौड़ी में थी... मुस्कराइये कि आज सरकार पौड़ी में थी... Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, June 29, 2019 Rating: 5

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