आंइर दादा तौं कथुक डर...तैयार रैयांण नाचण ली

देहरादून: आंइर दादा तौं कथुक डर...। महाबीर रवांल्टा कु नऊं त सबुनी सुंणिलु। त्यूंकि एक कतिवा ती। त्यां कविता फांडु लोक क गितेर अनिल बेसारी नि एक गीत बंणाई। आंइर दादा तौं कथुक डर..।। गीत तैयार होई गैंणू। आगिल मैन 23 तारीक कु गीत सबु बिड़ पौंछी जालु। खूब सुण्यांण अर ओरु बिड़ बि सुंण्यांण। 



यु जु गीत सु, गैंणी जंण आमार सुईन कविता संग्रह माथी लेखियूं। तेखिनी पढ़ी अनिल बेसारी नि सु गीत। तेइक बाद तेइनी महाबीर रवांल्टा किनी गीत बणाण क बार मा छुंई लाई। त्युनी भी झट बोली कि बणांदु काना माता गीत बणा ज। तेइक बाद तेइनी काम शुरू कर। पाछिल साल रवांई लोक महोत्सव क दिना तेइनी मंच माथ नि पैलीबार लाई सु गीत। कवि सम्मेलन की शुरूआत तेई गित किनी हईती। अब सु गीत क रूप मां रिकार्ड होई किनी आण लगियुं। 

साज-बाज विकास बडेड़ी ने करी तैयार। गित की परिकल्ना रवांई लोक महोत्सव क संयोजक शशि मोहन रवांल्टा की। प्रबंधन नरेश नौटियाल देखण लगियुं। हेर-देख प्रेम पंचोली करने लगियुं। जु पिक्चर का बाजली त्यां पिक्चरी की निर्देशन वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल करलु। येई सार कामकु सर्वेसर्वा टीम रवांई लोक महोत्सव करनी लगीं।
आंइर दादा तौं कथुक डर...तैयार रैयांण नाचण ली आंइर दादा तौं कथुक डर...तैयार रैयांण नाचण ली Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, May 22, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.