सतर्क रहें...कहीं आप खुद ही तो अपने बच्चों को खतरे में नहीं डाल रहे...?

  • चंद्रशेखर पैन्यूली
बच्चे राष्ट्र की अमानत होते हैं। क्योंकि हर नई पीढ़ी सदैव देश का भविष्य होती है। कल ही क्षेत्र का नेतृत्व इन्हीं नन्हें-मुन्नों के बड़े चुके हाथों और मजबूत कंधों पर होगा। जब बच्चे राष्ट्र के भविष्य हैं तो हम क्यों इनके जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं ? जी हां खिलवाड़, असल में देखने में आया है कि छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक जिन स्कूल बसों, वैन, ऑटो-रिक्शा को हायर करते हैं, वो असुरक्षित हैं। आप लोग कई खबरें सुनते-पढ़ते होंगे फलां स्कूल बस हादसा। जाहिर है हादसों में मौत भी होती ही है। 


स्कूल वैन में क्षमता से अधिक बच्चे भरे हुए मिलेंगे। ऑटो और रिक्शा में भी आवश्यकता से अधिक बच्चों को बिठाया जाता है, जो हर वक्त बड़े हादसे को आमंत्रण देता है। कई स्कूल प्रशासन छोटे से फायदे के लिए बच्चों की जिंदगी दांव पर लगाते हैं। बच्चे राष्ट्र के सितारे हैं। न जाने कल कौन किस क्षेत्र में देश का नाम रोशन करे। आखिर क्यों इन मासूमो की जिंदगी से हम खेल रहे हैं ? जब हम महंगी फीस, महंगी किताब, ड्रेस आदि बहुत अच्छे से बच्चों को दिला रहे हैं। जब हम बच्चों की हर आवश्यकता की पूर्ति के लिए तत्तपर रहते हैं, तो फिर हम लोग चाहे अभिभावक हों या स्कूल प्रशासन आखिर क्यों परिवहन के मामले में इतना बड़ा रिश्क ले रहे हैं ?

यदि स्कूल प्रशासन मोटी फीस वसूल कर रहे हैं, तो उनको बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि स्कूल भी तभी है जब बच्चे हैं। बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। साथ ही अभिभावकों को भी दूसरों की देखा-देखी में घर के नजदीक स्कूल होने पर भी जरूरी नहीं कि कोई ओवरलोड बस, ऑटो, रिक्शा में अपने बच्चे को जबरदस्ती ठूसकर भेजा जाए। स्कूल घर के 1 या 2 किमी के दायरे में हो और सम्भव हो तो बच्चों के साथ स्वयं स्कूल तक छोड़ने-लेने जाइये। इससे बच्चों को भी मानसिक बल मिलेगा। 

स्कूल भेजने के लिए किसी भी ओवरलोड वाहनों और तकनीकी रूप से अनफिट वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजने के नाम पर खतरनाक गलती न करें। किसी भी बड़े हादसे को हम अपनी जागरूकता और आपसी सूझ-बूझ से रोक सकते हैं। क्योंकि धन सम्पति तो आज नहीं तो कल कमा ही लेंगे। लेकिन अपने जीवन के सबसे बड़े उपहार बच्चों को हम अपनी गलती से खो देंगे, तो वो धन हम आजीवन नहीं कमा पाएंगे। बच्चों की सुरक्षा का लेकर अभिभावक और स्कूल प्रशासन दोनों को ही चैंकन्ना रहने की जरूरत है। परिवहन व्यवस्था के नाम पर खतरनाक वाहनों में न ठूसें। कोई भी लापरवाही न करें। पुलिस प्रशासन को भी ऐसे वाहनों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। याद रखंे...हर बच्चा ईश्वर का अनमोल उपहार है। देश के भविष्य बच्चों की सुरक्षा से खिलावाड़ ना करें। लापरवाह ना बनें।
सतर्क रहें...कहीं आप खुद ही तो अपने बच्चों को खतरे में नहीं डाल रहे...? सतर्क रहें...कहीं आप खुद ही तो अपने बच्चों को खतरे में नहीं डाल रहे...? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, May 08, 2019 Rating: 5

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