राजस्थान का बगरू नहीं, उत्तराखंडी टोपी और सापा पहनाएं

कोटद्वार : देवभूमि उत्तराखंड देश दुनिया अपनी देव संस्कृति के लिए विख्यात है। हिमालय की गोद में बसे होने के कारण हमारी संस्कृति भी अनूठी हैं। हमारी परंपराएं हमारे रहन सहन भी हिमालय परिवेश के अनुसार हैं। अभी हमारे प्रदेश में चार धाम की यात्रा शुरू हो गई है। जिसके माध्यम से देश दुनिया को हमारी जीवनशैली जानने का मौका मिलेगा। 


ऐसे समय में बद्री केदार मंदिर समिति भगवान केदारनाथ और बाबा बद्री विशाल के दरबार में ड्रेस कोड लागू करने पर विचार करना स्वागत योग्य कदम है। भारत तिब्बत सहयोग मंच (युवा) मानता है कि देव स्थानों पर पवित्रता और शालीनता बनी रहनी चाहिए। भारत-तिब्बत सहयोग मंच की पौडी जिले की  बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए। भारत-तिब्बत सहयोग मंच(युवा) के प्रदेश महामंत्री धर्मवीर गुसाईं ने कहा कि राजस्थानी बगरू कुर्ते की जगह पुरुषों के लिए सिर पर उत्तराखंड और हिमालय की शान काली टोपी और महिलाओं के सिर पर पहाडी रंग बिरंगा साफा का ड्रेस कोड लागू किया जाए। ये परिधान मौसम अनुकूल और सस्ता है।

इस परिधान को श्रद्धालु  खुशी मन से खरीदेंगे। जब  श्रद्धालु दिल्ली चंडीगढ़ और दक्षिण भारत में  इन परिधानों को सिर पर पहन कर चलेंगे तो हिमालय के भाल  उत्तराखंड की संस्कृति का प्रचार-प्रसार होगा । इसलिए  श्री बद्री-केदार मंदिर समिति की और उत्तराखंड की संस्कृति की प्रतीक  रूप काली टोपी और महिलाओं का साफा ड्रेस कोड के रूप  में लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष एडवोकेट अमिताभ अग्रवाल ने की गौरव ठाकुर, देवेंद्र कुंडलिया, राकेश अग्रवाल, राजेंद्र नेगी आदि उपस्थित थे । संचालन जिला महामंत्री सौरव नौडियाल  ने किया।
राजस्थान का बगरू नहीं, उत्तराखंडी टोपी और सापा पहनाएं राजस्थान का बगरू नहीं, उत्तराखंडी टोपी और सापा पहनाएं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, May 18, 2019 Rating: 5

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