पीएम मोदी की ड्रेस के बारे में क्यों जानना चाहता है हर कोई...आखिर कहां की है पीएम की ड्रेस

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा वैसे तो कई  कारणों से खास है, लेकिन बाबा केदारनाथ के धाम में पीएम मोदी के पहनावे को लेकर अलग ही चर्चा चल रही है। दरअसल, पीएम मोदी बाबा के दर्शन करने एक खास ड्रेस पहनकर पहुंचे। लेकिन, किसी को यह पता नहीं था कि ये कहां का पहनावा है। पीएम मोदी के पहनावे के बारे मेंं केदारनाथ से सीधा प्रसारण कर रहे कई चैनलों के पत्रकार भी बता रहे थे। पीएम मोदी जितनी देर केदारनाथ में रहे वो, वही ड्रेस पहने रहे। कुछ पत्रकारों ने पीएम मोदी की ड्रेस को जौनसारी ड्रेस भी बता दिया। 

अब हम आपको बताते हैं कि पीएम मोदी ने कहां की ड्रेस पहनी है। दरअसल, पीएम मोदी ने गढ़ावल का कोई भी परिधान नहीं पहना हुआ है। पीएम मोदी के सिर पर हिमाचली टोपी है। उन्होंने जो लंबा चोला पहना है, उसे लोग गढ़वाली पहनावा बता रहे हैं। जबकि वह गढ़वाल या उत्तराखंड के किसी भी पहनावे से नहीं मिलता है। जानकारों की मानें तो पीएम मोदी ने जो चोला पहना है। वह लद्दाख में ज्यादा पहना जाता है। हिमाचल में भी धर्मशाला के उस इलाके में लोग इसे पहनते हैं, जहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग ज्यादा हैं। 

वहीं, कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि पीएम मोदी ने जो चोला पहना है। वह बौद्धों का पहचनावा है। बौद्धों का इस तरह का पहनावा तो होता है, लेकिन उसकी लंबाई कम होती है। इसलिए भी ऐसा माना जा रहा है क्योंकि आज बुद्ध पूर्णिमा है। लेकिन, जानकारों के अनुसार पीएम मोदी का चोला लद्दाख में पहने जाने वाला परिधान ही है। पीएम मोदी पहले भी इस तरह का परिधान पहन चुके हैं, लेकिन वो ऊन के बजाया सामान्य कपड़े का था और उसमें टोपी भी दूसरी तरह की पहनी थी। लद्दाक में उसे खास मौकों पर पहना जाता है। पीम मोदी पहले भी लेह में हाइवे प्रोजेक्ट के उद्घाटन के मौके पर हपन चुके हैं, लेकिन तब उन्होंने सिल्की कपड़े में पहना था। इसे गौंछा भी कहा जाता है।

डा. एससी थलेड़ी के अनुसार उत्तराखंड के पौड़ी जिले में  राठ- ब्लॉक क्षेत्र हैं। थलीसैंण ब्लॉक के कई गांवों में 70 के दशक तक भांग के रेशे से ''त्युंखे" बनाये जाते थे। पुरुष इसे पहनते भी थे। त्युंखे साधारण चद्दर के तरह होते है। गढ़वाल के थलीसैंण ब्लॉक के पूर्वी नयार नदी के तट पर सांगुड़ी (ऐंठी गाँव के नीचे) नामक स्थान पर इस हैम्प के रेशे से ''त्युंखे' 'बनाने का कुटीर उद्योग चालू किया गया था। कई नाली जमीन पर भांग उगाई जाती थी। इसका एक ट्रस्ट भी था। ''त्युंखा'' एक मोटा चद्दर होता है और कम से कम 10 साल फटता नहीं है, लेकिनआधुनिकता के इस युग में अब इसका उत्पादन नहीं होता है। 50 वर्ष से नीचे की पीढ़ी इस नाम से परिचित नहीं है।

                                                       ....प्रदीप रावत (रवांल्टा)

पीएम मोदी की ड्रेस के बारे में क्यों जानना चाहता है हर कोई...आखिर कहां की है पीएम की ड्रेस पीएम मोदी की ड्रेस के बारे में क्यों जानना चाहता है हर कोई...आखिर कहां की है पीएम की ड्रेस Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, May 18, 2019 Rating: 5

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