मरीना के बहाने...मुंगेरीलाल मत बनो सरकार

टिहरी झील में आज फिर जनता को दिखाया एक और मुंगेरीलाल का हसीन सपना डूब गया। आज फिर से पूरी विरासत को लील चुकी टिहरी झील में लोगों की उम्मीदें और अरमान डूब गये। सरकार ने जनता को पर्यटन के बड़े-बड़े सपने इसी मरीना बोट की ऐशहाग में बैठकर दिखाए थे। उस 4 करोड़ी ऐशगाह के डूबने के साथ ही वो सपने भी दफन गए। ऐसी डबल इंजन सरकार का क्या करना जो, सिंगल इंजन की मरीना बोट को नहीं संभाल सकी। सरकार एक और मुंगेरीलाल का हसीन सपना पहले ही बुनकर बैठी है। उसका नाम सी-प्लेन है। सवाल यह है कि जो सरकार मरीना बोट को नहीं संभाल सकी। वो सरकार सी-प्लेन को कैसे संभालेगी। कहीं एक बार फिर से जनता को दिखाया सपना मरीना बोट की तरह ही दैंत्याकार टिहरी झील का शिकार ना हो जाए। 

सरकार को टिहरी विस्थापितों की चिंता नहीं है। उनके बारे में कोई नहीं पूछता, जिनको टिहरी डैम आज भी जख्म दे रहा है। आज तक डोबरा-चांठी का सपना पूरा नहीं हो पाया। ऐसे ही कई सपने हैं, जो सरकार ने दिखाए, लेकिन वो मुंगेरीलाल के सपने साबित हुए। सरकार सपनों के सौदागर मत बनो। सपने दिखाओ, लेकिन मुंगेरीलाल वाले नहीं। बंद आंखों से देखे गए सपने कभी पूरे नहीं होते। जनता को अपने शब्दों के जादू से सपनों में खोने के लिए मजबूर मत करो। उनके आंखों पर पट्टी मत बांधो। खुली आंखों से सपने बुनने और देखने दो। अपना देखा सपना शायद वो खुद पूरा कर लें। वैसे उत्तराखंड की जनता उस बात को करके दिखाती है, जिसके बारे में आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, लेकिन कर दिखाया। 56 विधायक दिए और आपको सरकार का सिरमौर भी बनाया। चिंतन कीजिए। कहीं ये सपना अगले तीन साल में उल्टा पड़ गया तो....?

शब्दों और सपनों के वो सौदागर आप ही थे, जिन्होंने युवाओं को नौकरी के सपने दिखाए। हासिल क्या हुआ ? आपकी सरकार ने उन लोगों को भी बेरोगार कर दिया, जिनके पास नौकरी थी। अतिथि शिक्षक से लेकर कई विभागों में काम कर रहे युवा सड़क पर हैं। 108 के पूर्व कर्मचारी सीएम को अपने खून से पत्र लिख रहे हैं। इसमें भी सरकार ने खेल किया। भाजपा के मध्यप्रदेश के नेता कैलाश विजय वर्गीय को शायद ही कोई नहीं जानता होगा। उन्हीं की कृपा से जीरो टाॅलरेंस की सरकार ने यह कारनामा कर दिखाया। ये बात पहले ही सामने आ चुकी है कि कैंप कंपनी मध्यप्रदेश की है और कैलाश विजय वर्गीय के करीबियों की है। इतना तो समझ ही गए होंगे।  


जीरो टाॅलरेंस की सरकार में जीरो टाॅलेरेंस का बस शोर सुनाई दे रहा है। एनएच-74 घोटाले में जीरो टाॅलरेंस वाली डबल इंजन सरकार ने खूब वाहवाही लूटी थी। दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था, लेकिन अब दोनों ही आईएएस बहाल हो चुके हैं। इससे सरकार की जीरो टाॅलरेंस नीति खुद ही सवालों से घिरी नजर आ रही है। मरीना बोट भी बगैर जीरो वाले टाॅलरेंस का शिकार लगती है। चार करोड़ का 4 संख्या में भले ही छोटा लगता हो, लेकिन इतनी बड़ी रकम जनता सरकार को अपनी मेहनत की कमाई से देती है। 

वैसे लगता नहीं है कि डबल इंजन सरकार टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने की वास्तव में कोई प्लान बना रही होगी। केंद्र सरकार ने निरीक्षण तो किया, लेकिन उसका क्या हुआ ? आज तक किसी को पता नहीं। रिपोर्ट में क्या लिखा ? उसकी जानकारी आज तक बाहर निकलकर नहीं आई। पीएम नरेंद्र मोदी की देखा-देखी में सीएम त्रिवेंद्र ने भी सी-प्लेन की घोषणा कर दी होगी...! उनको साफ करना चाहिए कि वास्तविकता क्या है ? क्या मरीना बोट की तरह सी-प्लेन एक बार झील में उतरने के बाद चल पाएगा या वो भी सरकार की एक दिन की ऐशगाह बनने के बाद मरीना की तरह हमेशा के लिए टिहरी झील में समा जाएगा। यह कहना थोड़ा जल्दबाजी जरूर हो सकती है, लेकिन ऐसा हो सकता है। डबल इंजन अब पुराना हो चुका है। डबल इंजन सरकार के मुखिया भले ही दो सालों में साधारण इनोवा से उत्तराखंड जैसी शांत वादियों में बुलेटप्रूफ कार में शिफ्ट हो गए हों, लेकिन जनता आज भी वहीं है। 
... प्रदीप रावत (रवांल्टा)  

मरीना के बहाने...मुंगेरीलाल मत बनो सरकार मरीना के बहाने...मुंगेरीलाल मत बनो सरकार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, May 07, 2019 Rating: 5

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