सुनो, त्रिवेंद्र सरकार, मैं तुम्हे लानत भेजता हूं


- खुशियों की सवारी पर गमों के बादल के लिए दोषी तुम हो।
- जीरो टोलरेंस सरकार के मुंह पर जोर से तमाचा मारने का मन है।
- सुख-दुख के साथी 108 के 717 परिवार सड़क पर 
वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद ज़खमोला जी ने कुछ दिन पहले अपनी फेसबुक वॉल पर यह पोस्ट लिखी थी। इसको हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए, जिसे उत्तराखंड से सरोकार है। उत्तराखंड में डबल इंजन की त्रिवेंद्र सरकार आने के बाद से लगातार युवाओं के रोजगार पर वार हो रहे हैं। एक के बाद एक हजारों लोग, खासकर युवा जो पहले नौकरी पेशा थे। लेकि, डबल इंजन की सरकार में अब वह बेरोजगार हो चुके हैं। हर किसी को सोचना होगा कि आखिर डबल इंजन में ऐसा क्या है कि जहां हर सरकार रोजगार देती है। वहीं, त्रिवेंद्र रावत सरकार युवाओं का रोजगार छीन रही है। आप खुद ही सोचें कि क्या सही है और क्या गलत...।
  • गुणानंद जखमोला

जेठ की सी तपती दुपहरिया में परेड ग्राउंड में धरना दे रहे 108 सेवा से बर्खास्त 717 कर्मचारी जोर से चिल्लाते हैं रोजी-रोटी दे न सके जो, वो सरकार निकम्मी है। कुछ जवान हैं और कुछ नौजवान। कुछ महिलाएं हैं और कुछ युवतियां। गौर से देखता हूं, अधिकांश के माथे पर चिन्ता की सलवटें हैं। दोपहर की भूख से कहीं अधिक भविष्य की चिन्ता है। रोजी-रोटी का सवाल है। यू ंतो पिछले 11 वर्षों से सड़क पर हैं, लेकिन तब सेवा में थे और आज बेरोजगार के रूप में। खुशियों की सवारी से लेकर जिंदगी की सांसों को बचाने की जद्दोजेहद में तत्पर। आखिर परवाह किसे है कि एक लाख से भी अधिक लोगों की जान बचाने वाले पहिए अचानक ही थम गये हैं। आम लोगों के सुख-दुख के साथी और उनकी जिंदगी में खुशियां देने वाले 108 सेवा के ये सभी कर्मचारी आज गम के बादलों से घिरे हैं। इनकी लड़ाई में वो सब साथ नहीं हैं, जिनकी इन्होंने पिछले 11 वर्षों में मदद की है। आज ये अकेले रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। जिनको इन्होंने मसीहा माना था वो इनको बीच राह में छोड़ गये। कारण छोटा सा है। लेकिन, बहुत ही गहरा और दिल पर नश्तर सा चुभने वाला। 


जीरो टोलरेंस सरकार ने 108 का ठेका पुरानी कंपनी से खत्म कर एक नई कंपनी कैंप को दे  दिया है। कैंप इन कर्मचारियों को समहित करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि नई कंपनी या तो स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों व नेताओं को रिश्वत व कमीशन दे सकती है या फिर कर्मचारियों को वेतन। यही कारण है कि समझौता नहीं हो सका। क्योंकि नई कंपनी ने भ्रष्ट अधिकारियों को मोटा धन दिया होगा। इसकी आंच सीएम तक भी पहुंची होगी क्योंकि कमीशनखोरी का मक्खन तो अंतिम सीढ़ी तक पहुंचता है। कैंप को भी कर्मचारी चाहिए। 


लेकिन, जितना वेतन मनीष टिंकू देते थे, उतना तो कैंप नहीं देगा, क्योंकि उसे भी तो कमाना है। भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का अजगर धीरे-धीरे लोकतंत्र को निगल रहा है और रोजगार सिमटता जा रहा है, क्योंकि भ्रष्टाचार नसों में है तो सब मुमकिन है। मैं 108 के बर्खास्त कर्मचारियों के साथ हूं, मन, कर्म और वचन से। क्योंकि उनमें मुझे अपना अतीत नजर आता है और नवयुवकों का भविष्य। मैं त्रिवेंद्र सरकार पर लानत भेज रहा हूं और सरकार की घोर निंदा करता हूं।

साभार...फेसबुक वाल
सुनो, त्रिवेंद्र सरकार, मैं तुम्हे लानत भेजता हूं सुनो, त्रिवेंद्र सरकार, मैं तुम्हे लानत भेजता हूं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, May 05, 2019 Rating: 5

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