"कुर्सी" की लड़ाई में भगवान बद्रीनाथ को दो घंटे रहना पड़ा भूखा

बद्रीनाथ: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ ने मंदिर के कपाट बंद करा दिए। इससे श्री बद्री नारायण के दर्शनों के लिए आए हजारों श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मामला महज कुर्सी का था। जोशीमठ एसडीएम बद्रीनाथ धाम आए थे। इस दौरान एसडीएम बीकेटीसी के कार्यालय में गए और बीकेटीसी के सीईओ की कुर्सी में बैठ गए थे। इतनी सी बात को लेकर सीईओ ने हंगामा शुरू कर दिया और मंदिर के कपाट बंद करा दिए। 

कुर्सी की लड़ाई को दूसरे ढंग से भी निपटाया जा सकता था, लेकिन सीईओ की जिद्द के कारण भगवान बद्रीनारायण को लगाए जाने वाले भोग की परंपरा को तोड़ा गया। भगवान बद्री विशाल को दो घंटे की देरी के बाद दिन का भोग लगाया गया। मामला गुरुवार का है। 


एसडीएम वैभव गुप्ता बदरीनाथ धाम में गुजरात धर्मशाले स्थित सीईओ के कक्ष में पहुंचे और उनकी कुर्सी पर बैठ गए। आरोप है कि एसडीएम ने सीईओ से मंदिर से जुड़ी पत्रावलियां भी तलब कीं, जिस पर सीईओ ने आपत्ति जताई। इस दौरान दोनों अधिकारियों में बहस हो गई और हंगामा हो गया। मामले की सूचना मिलते ही मंदिर समिति के कर्मचारी, आचार्य और ब्राह्मण मौके पर पहुंचे और गुजरात भवन के सभागार में ही धरने पर बैठ गए। हालांकि बाद में एसडीएम ने लिखित रूप से खेद जताया। उसके बाद मामला शांत हो गया। 

भगवान बदरीनाथ को भोग भी करीब दो घंटे देरी से लगाया गया। बीकेटीसी के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल ने इस संबंध में जिलाधिकारी से बात की। मामला बढ़ता देख एसडीएम ने लिखित खेद जताया तब जाकर मामला शांत हुआ। सीईओ बीडी सिंह ने एसडीएम के अपनी कुर्सी पर बैठने और पत्रावली तलब करने को गलत बताया। सवाल ये है कि क्या कुर्सी पर बैठने और पत्रावली तलब करने के लिए भगवान बद्रीनाथ के कपाट बंद कर दिए जाने चाहिए थे। 

"कुर्सी" की लड़ाई में भगवान बद्रीनाथ को दो घंटे रहना पड़ा भूखा "कुर्सी" की लड़ाई में भगवान बद्रीनाथ को दो घंटे रहना पड़ा भूखा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, May 24, 2019 Rating: 5

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