राजनीति के फलक से अस्त हो गया योगी आदित्यनाथ को हराने वाला "अरुण"

...हिमांशु बडोनी
वक्त कब बदल जाए, कहा नहीं सकता। कब कौन राजा रंक और कौन रंक से राजा बन जाए, अंदाजा लगा पाना नामुमकिंन है। ऊपर से अगर कोई नशे की आगोश में तो ना चाहते हुए भी बर्बादी तय है। ऐसा ही एक चेहरा है, जिसने अपना चमकदार राजनीतिक जीवन अपने हाथों से हासिए पर धकेल दिया। कोटद्वार निवासी समाजवादी नेता अरुण तिवारी भी उन्हींं युवाओं की जमात में शामिल हैंं, जिन्होंने नशे के आगोश में डूब कर अपना राजनीतिक जीवन अपने हाथों से तबाह कर दिया। छात्र संघ चुनावों से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले वह अरुण तिवारी ही थे, जिन्होंने कोटद्वार छात्र संघ चुनाव में महासचिव पद पर उस योगी आदित्यनाथ को करारी हार   का स्वाद चखाया था, जो आज उत्तरप्रदेश की राजनीति के सिरमौर बने हुए हैं।


लेकिन अफ़सोस छात्र संघ चुनाव की हार से अजय बिष्ट आज के योगी आदित्यनाथ ने सबक लेते हुए फिर कभी न हारने की कसम ली, लेकिन अरुण तिवारी जीती हुई बाजी को अपने राजनीतिक जीवन की मजबूत बुनियाद बनाने में नाकाम साबित हो गए। अभिभाजित उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों मुलायम सिंह के करीबी लोगों में गिने जाने वाले वह अरुण तिवारी ही थे जो एक वक्त में तीन-तीन गनर लेकर घूमते थे। 

समाजवादी नेता विनोद बड़थ्वाल को अपना राजनीतिक गुरु बताने वाले अरुण तिवारी सपा संगठन के वह मजबूत सिपाही थे, जिनकी एक जमाने में तूती बोला करती थी।समाजवादी पार्टी के सिंबल पर यमकेश्वर विधानसभा से चुनाव लड़ने वाले तिवारी का राजनीतिक भविष्य आज उस मुकाम पर होना था, जहांं सपा की राजनीति घूम रही है। लेकिन, नशे की गर्त में डूबकर अरुण तिवारी ने अपना जीवन खुद बर्बाद कर दिया। एक समय में कोटद्वार की सड़को पर शान से चलने वाले अरुण तिवारी आज नशे में डूब कर लड़खड़ा कर चल रहें है। कभी 20-30 लोगों को अपने बल पर हर दिन खाना-पीना खिलाने वाले तिवारी की हालत आज इस कदर नशे के कारण खराब हो चली है कि आज खुद वह 20-30 रुपए के लिए लोगों के आगे हाथ फैला रहा है।

शराब की लत ने अरुण तिवारी को इस कदर सड़क पर ला दिया है कि अब हर कोई उससे कन्नी काटने लगा है। एक ज़िंदा दिल और नेक इंसान जो हर पल दूसरों की मदद के लिए हमेशा आगे खड़ा रहता था। आज वही इंसान अपने पैरों पर खुद खड़ा नही हो पा रहा है। शराब की बुरी लत ने अरुण तिवारी को राजा से रंक बना दिया। कोटद्वार में पूरे दिन तलाशने के बाद जब अरुण तिवारी से मुलाकात हुई तो इस बार वह कुछ ठीक हालत में था। पूछने पर तिवारी ने बताया कि 10 दिन से शराब को हाथ नही लगाया है। तिवारी जी कि बात सुनकर दिल को काफी खुशी हुई औऱ अंदर ही अंदर मैंने सोचा कि काश यह 10 दिन 10 साल हो चुके होते तो आज अरुण तिवारी कोटद्वार की गलियों में लड़खड़ा कर नहींं चल रहा होता। बल्कि उत्तरप्रदेश की राजनीति में आज के युवाओंं को चलना सीखा रहे होते....।
राजनीति के फलक से अस्त हो गया योगी आदित्यनाथ को हराने वाला "अरुण" राजनीति के फलक से अस्त हो गया योगी आदित्यनाथ को हराने वाला "अरुण"  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, April 26, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.