चिंतत करती है महिलाओं और पुरुषों की खतरनाक मानसिकता

  • चन्द्रशेखर पैन्यूली
आज हमारे देश में दुर्गाष्टमी, श्री राम नवमी की धूम है। हर सनातनी के लिए ये एक शुभ अवसर और उत्सव का क्षण होता है। इस वर्ष आज के ही दिन दुर्गाष्टमी और श्री रामजन्म की शुभ तिथि का एक साथ संयोग बना है। पूरे देश में हर मन्दिर मेंए लोगों के घरों में कन्यापूजन, ब्राह्मण भोजन, भंडारे आदि का आयोजन हो रहा है। आज हम कन्या पूजन भी कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जिस देश में कन्या या औरत को देवी स्वरूपा माना जाता है। उसी देश में महिलाओं पर अत्याचार, शोषण, हिंसा जारी है। देश के विभिन्न हिस्सों से हर दिन एक न एक खबर महिला के साथ शोषण, रेप, छेड़खानी, दहेज हत्या की सामने आती हैं। इसको लेकर सवाल तो उठते हैं, लेकिन उनका समाधान नहीं होता, आखिर क्यों ? और कब तक ऐसा ही चलता रहेगा?
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मां जानकी, मां पार्वती, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी के इस देश में महिलाओं के साथ हिंसा का होना बेहद शर्मिंदगी महसूस करवाता है। महिला के साथ बलात्कार, छेड़खानी की घटनाओं  में महानगरों के साथ-साथ छोटे-छोटे कस्बों और गॉव तक में भी बढोत्तरी होना बेहद चिंताजनक है। स्कूल, कॉलेज जाती लड़कियों के साथ भी इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ने से ये चिंता और अधिक व्यथित करती है। आखिर ये कैसा दोहरा चरित्र है हमारा कि एक तरफ कन्यापूजन और दूसरी तरफ स्त्री शोषण। आज के समाज में स्त्रियों को देखने की परखने की पुरुष समाज की नजरें बदल चुकी हैं। आज महिलाओं को टंच माल, जुगाड़ जैसे शब्दों से पुकारा जाना बेहद दुःखद है। सोशल मीडिया के प्रसार ने महिलाओं के प्रति नजरिये को और निम्न स्तर का बना दिया है, जिसके लिए सोशल मीडिया पर कई अश्लील साइटों का होना और स्त्री को एक उपभोग की वस्तु समझना जैसी मानसिकता में बढ़ावा प्रमुख है।

आज कई व्यक्ति रिस्तों की मर्यादा को भूलकर कई तरह की उटपटांग हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। कन्यापूजन के इस देश में ही छोटी-छोटी बच्चियों के साथ छेड़खानी, रेप की घटनाएं मन को झकझोरती हैं। वहीं, दूसरी तरफ इस तरह की घटनाओं का एक पहलू ये भी है कि कुछ मामलों में महिलाओं की भूमिका भी ऐसे मामलों में सामने आती रही हैं। अपनी आपसी लड़ाई और कमाई के फेर में स्त्री ही स्त्री की सबसे बड़ी दुश्मन बनकर सामने आने लगी हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने भी आ चुकी हैं। आये दिन हम, आप कोई न कोई खबर ये भी सुनते हैं कि अवैध सम्बध के चलते पत्नी ने पति को प्रेमी के हाथों मरवाया या फलां महिला का अपने ही किसी नजदीकी रिश्तेदार या किसी दूर वाले से अवैध सम्बन्ध हत्या का कारण बना। अब जरा इस पहलू पर भी देखें। ये देश मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी के साथ-साथ इस  देश में  सावित्री, मां सती अनुसुइया, सीता जैसी पतिव्रता स्त्रियों ने भी इस देश के गौरव को ऊंचा किया। लेकिन, आज महिला जाति पर कलंक कुछ इस तरह की महिलाएं भी तेजी से बढ़ रही है, जो दूसरों के घर को बर्बाद करने में तुली हैं। महिलाओं को हमारा समाज पवित्रता की नजरों से देखता है। महिलाओं को लेकर हम गंभीर हो जाते हैं। हर छोटी-बड़ी गलती के लिए पुरुषों को गलत ठहरा दिया जाता है, लेकिन उसकी असल वजह महिला होती है। 

शोसल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया में अब कई घटनाएं खुलकर सामने आती हैं। दो-दो बच्चों को छोड़कर भागने या फिर किसी दूसरी तरह की घटना को लेकर महिलाओं पर सवाल उठने लगे हैं। हमारी परंपरा यह है कि हम शराब बेचने वाली महिलाओं तक को नारी शक्ति के रूप पेश करने से नहीं चूकते। दूसरी और पिछले कुछ समय में शराब तस्करी में भी कई महिलाएं पकड़ी जा चुकी हैं। बदलते परिदृष्य में यह काफी खतरनाक है। कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों को बदलते परिवेश के साथ खुद को कुंठाओं से बचना चाहिए। क्योंकि आज छोटे-बड़े शहरों में कई कॉलेजों, स्कूलों की छात्र छात्राओं की अश्लील हरकतें सामने आ रही हैं। दिखावे की आभासी जिंदगी और अत्यधिक महत्वकांक्षा के चक्कर में हम अपने परिवार और अपनों से दूर हो रहे हैं। भगवान श्रीराम के इस देश में पुरुषों को भी महिलाओं को सिर्फ भोग की वस्तु नहीं समझना चाहिए। भगवान राम ने जीवन जीने के लिए जो उच्च आदर्श स्थापित किये थे, उससे हम भटक रहे हैं। तभी समाज में इस तरह के सम्बन्ध, विचार और घटनाएं हावी होती जा रही हैं।

(हो सकता है मेरे इन विचारों से कई असहमत हो। कई लोगों को खासकर महिलाओं को ठेस पहुंचे उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। यदि किसीकी भावनाएं आहत हुई हों तो मैं माफी चाहूंगा)
चिंतत करती है महिलाओं और पुरुषों की खतरनाक मानसिकता चिंतत करती है महिलाओं और पुरुषों की खतरनाक मानसिकता Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, April 13, 2019 Rating: 5

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