बेटी का जन्मोत्सव: खबर नहीं है, फिर भी खबर बनी

पॉजिटिव...
आज एक कार्ड मिला। उसमें बेटी के जन्मोत्सव में आने का निमंत्रण है। कार्ड को देखते ही मन खुश हो गया और दून अस्पताल की एक घटना और समाज में बेटियों को लेकर लोगों की मानसिकता के कई चित्र मन में आकार लेने लगे। दून अस्पताल में सिर्फ इसलिए एक बेटी को उसकी मां ने कई घंटों तक इसलिए अपना दूध नहीं पिलाया क्योंकि वो बेटी थी। उनको बेटा नहीं हुआ था। ऐसी ही दो-तीन और घटनाएं मैं पहले भी दून अस्पताल में देख चुका हूं। 


दया शंकर पांडे हमारे साथी हैं। उनके घर नवरात्र में बेटी ने जन्म लिया। बिटिया का नाम ज्योत्सना रखा है। आज उनका कार्ड मिला। कार्ड कुछ इस तरह है...आपको हर्ष के साथ सूचित कर रहे हैं कि हमारे घर मां भगवती दुर्गा के आशीर्वाद से एम यशस्वी कन्या का जन्म लिया है। जिसके जन्मोत्सव कार्यक्रम में हम आपको सपरिवार सहित आतंत्रित करते हैं। निवेदन है कि अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कन्या का आशीर्वाद प्रदान करें। 

इस बात को लेकर लोग आलोचना कर सकते हैं कि इसमें खबर जैसा कुछ है। सच कहूं तो आज के दौर में हम आधुनिक जरूर हो गए हैं। बेटियों के प्रति रवैया और नजरिया जरूर बदल गया हो, लेकिन अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है। हामरे और आपके आसपास बेटियां आज भी गर्भ में ही मारी जा रही हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए यह एक बेहतर उदाहरण है।


बेटी का जन्मोत्सव: खबर नहीं है, फिर भी खबर बनी बेटी का जन्मोत्सव: खबर नहीं है, फिर भी खबर बनी Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, April 22, 2019 Rating: 5

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