महिलाओं को सलाम...पढ़ें धरातल को बयां करती रिपोर्ट

  • चन्द्रशेखर पैन्यूली
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। यानि महिलाओं की उपलब्धि पर फक्र करने, उनके  प्रति प्यार, स्नेह, सम्मान को बड़े स्तर पर मनाने का दिन। यूं तो महिला दिवस सदैव ही होता है, क्योंकि हम बिना महिलाओं के अधूरे हैं। किसी भी घर की दिनचर्या एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है। सुबह उठने से लेकर पूजा पाठ, मन्दिर, स्नान, भोजन, भजन, दवा आदि सभी महिलाओं के ही सहयोग से या उनकी कृपा से संभव हो पाते हैं। सुबह की चाय, गरम, ठंडा पानी, मीठी, बिना मीठी चाय, लेमन टी, बिना दूध की चाय, ये सबकुछ एक महिला ही हमें देती है। परिवार के किस सदस्य को खाने पीने में क्या पसन्द है। पहनने, ओढ़ने में क्या पसन्द है। इन सबका ध्यान भी एक महिला ही रखती है। अब वो महिला, आपकी मां, दादी, पत्नी, बहन या बेटी कोई भी हो सकती है। हर दिन की शुरुआत से लेकर रात तक हर चीजों के लिए हमें महिलाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

आज के समय की विडंबना तो देखिये कि जिस महिला पर व्यक्ति का जीवन चक्र ही आधारित है। उसी महिला को पुरुषों के शोषण का शिकार होना पड़ता है। आज के दौर में बढ़ती छेड़खानी, बलात्कार की घटनाएं, दहेज उत्पीड़न, महिला उत्पीड़न की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं, जोकि बेहद दुःखद है। कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि स्त्री के जिन अंगों से व्यक्ति को जीवन मिला है, उन्ही अंगों को पुरुषों की हवस भरी नजरें नुकसान पहुंचाती है। जिस योनि से व्यक्ति जन्मता है, जिन स्तनों का दूध पीकर जीवन में आगे बढ़ता है। बाद में पुरुषों की हवस उन्ही अंगों के प्रति बढ़ती जाती है। या बढ़ती जा रही है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली का दामिनी कांड हो या शिमला का कांड। हवसी पुरुष इन्ही अंगों को अपना निशाना बना रहे हैं। किसी भी छेड़खानी या रेप की घटनाओं में महिलाओं के संवेदनशील अंगों को ही निशाना बनाकर उसकी इज्जत लूटी जाती है।
आज हमारे देश में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव या फिल्मों की देखा-देखी में पर स्त्री या पर पुरुष से सम्बन्ध, सामाजिक गिरावट या नैतिक मूल्यों या विवेकहीन संवेदना के कारण बढ़ रही है। जिन सम्बन्धों को हमारा समाज कभी स्वीकार करेगा ही नहीं, ऐसे सम्बन्धों के लिए न जाने क्यों कुछ महिला, पुरुष अपने परिवार को तोड़ रहे हैं। अपने हंसते-खेलते परिवार की तिलांजलि दे रहे हैं? इसे बेहद दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि फिल्मों की देखा-देखी और आभासी दुनिया की चकाचैंध ने वास्तविक रिश्ते नातो में खटास डाल दी है। न जाने हम किस ओर जा रहे हैं? स्त्री को तो हमारे देश में देवी के रूप में माना जाता है, लेकिन ये भी कटु सत्य है कि जिस देश में स्त्री को देवी स्वरूपा कहकर पूजा जाता है। उसी देश में हजारों महिलाएं कोठे पर एक वेश्या का जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्हें वहां कौन ले गया? उनके प्रति क्या हमारे समाज का कोई उत्तरदायित्व नहीं? वहीं, दूसरी तरफ कई महिलाएं भी अपने को अत्यधिक आधुनिक दिखाने के चक्कर में गलत सम्बन्धों को बढ़ावा दे रही हैं। आज के सोशल मीडिया युग में कई स्त्री-पुरुष पूर्व में बिना जाने पहचाने बिना मिले, देखे आपसी प्रेम करने लग जा रहे हैं? देर रात तक न जाने फोन कॉल्स, संदेशों का ये कैसा आदान-प्रदान है, जो छूट्ता ही नहीं। या आप छोड़ना नही चाहते। अपने घर, परिवार, पति, पत्नी से छुपकर दूसरों से इस तरह की चैटिंग किस प्रेम के अंतर्गत आती है, मुझे नही पता। कहीं ये सिर्फ हवस को बढ़ावा देना तो नही? आखिर कैसे हम लोग अजनबियों को तो अपना समझ रहे हैं और अपनों से दूर हो रहे हैं?

लखने को बहुत कुछ है लेकिन आज महिला दिवस है। उन महिलाओं को सलाम करने का दिन है जिन्होंने अपनी एक नई पहचान समाज में बनाई,और हम तो उस देश के वासी है जहाँ की ,सती अनुसुइया  की पवित्रता ,सावित्री की पतिव्रता और सीता माता के तप को सभी जानते हैं।अहिल्या,तारा,सबरी,राधा,मीराबाई आदि महिलाओं के प्रेम और तपस्या को सभी प्रणाम करते हैं। आज हमारे देश की महिलाओं ने आसमान को छुआ है, जो गौरवान्वित करता है ।
राजनीति की बात करें तो आज हमारे देश में कई शक्तिशाली राजनीत्तिक महिलाएं हैं। जिनमें हमारे देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, यूपीए अध्य्क्ष सोनिया गांधी, स्मृति ईरानी, बसपा प्रमुख मायावती, महबूबा मुफ्ती, शीला दीक्षित, हरसिमरत कौर, वसुंधरा राजे, उमा भारती, राबड़ी देवी आदि महिलाएं जिन्होंने अपने दम पर बुलंदियों को छुआ है। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृतकौर, विजयलक्ष्मी पंडित, जयललिता आदि कई नाम हैं। खेल की बात करें तो गोल्डन गर्ल एमसी मैरीकॉम, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, बबीता फोगाट, मनु भाकर, पीवी सिंधू झूलन गोस्वामी, एकता बिष्ट, पीटी उषा, कर्णम मल्लेश्वरी, कुंजरानी देवी आदि महिला खिलाड़ियों ने देश को गौरवान्वित किया है।

अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, पर्वतारोही बछेंद्री पाल, तैराक आरती साहा या विगत वर्ष समुंदर का चक्कर लगाने वाली नेवी की वर्तिका जोशी आदि महिलाएं। उन्होंने देश को गौरवानवित किया है। इसके अलावा फाइटर प्लेन उड़ाने का गौरव हासिल करने वाली मोना सिंह, भावना और अवनी चतुर्वेदी पर देश को गर्व है। गायन के क्षेत्र में भारत रत्न लता मंगेशकर, आशा भोसले, अलका याग्निक, सुनिधि चैहान आदि महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है। वॉलीवुड में तो ऐश्वर्य राय, माधुरी दीक्षित, मधुबाला, शर्मिला टैगोर, करिश्मा,करीना, प्रीति जिंटा, रवीना टन्डन, सुष्मिता सेन, प्रियंका चोपड़ा आदि महिलाओं ने एक बड़े मुकाम को छुआ है। मदर टेरेसा सहित पहली आईपीएस अधिकारी किरण बेदी, पहली सर्जन प्रेमा मुखर्जी, पहली पुलिस महानिदेशक कंचन चैधरी भट्टाचार्य आदि सभी ने देश को गौरवा के पल दिए हैं।


मैं जिस राज्य से हूं उत्तराखंड। प्रदेश की राज्यपाल भी एक महिला बेबी रानी मौर्य हैं, पूर्व में भी मार्गरेट अल्वा यहां गवर्नर रही हैं। नेता विपक्ष इंदिरा हृदयेश भी महिला ही हैं। प्रदेश में रेखा आर्य मंत्री हंै तो मेरी लोकसभा सासद माला राज्य लक्ष्मी शाह भी महिला ही हंै। ममता राकेश, ऋतू खंडूड़ी भूषण आदि महिला विधायक हंै। मैं टिहरी जिले से हूं। जिले की जिलाधिकारी भी महिला ही हंै, जिला पंचायत अध्यक्ष भी सोना सजवाण महिला हैं। टिहरी के प्रतापनगर ब्लाक की ब्लॉक प्रमुख भी महिला हैं। हाल ही में उधमसिंह नगर ट्रांसफर हुई मुक्ता मिश्रा जी हमारी एसडीएम, गंव की प्रधान भी महिला गोदम्बरी देवी हंै, पूर्व प्रधान उषा देवी जी भी महिला हैं। ऐसे जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत भी महिलाए ही हैं। 

मेरी तीन सगी बहने हैं। चाचा-ताऊ की बेटियों को मिलाकर कुल 12 बहने हैं। फुफेरी-ममेरी-मौसेरी बहनों को मिलाकर 30 से अधिक बहने हैं। मतलब स्प्ष्ट कि हमारे घर में लड़कियों की अच्छी संख्या है। मैं जिस कॉलेज से यूजी, पीजी में  पढ़ा वहां की वर्तमान कुलपति गढ़वाल विवि की वीसी प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल  और डीएसडब्ल्यू प्रो. सुरेखा डंगवाल भी महिला ही हैं। पत्रकारिता में हमारी गुरु डॉ.वन्दना नौटियाल के निर्देशन में मुझे लघु शोध का सौभाग्य मिला। मेरी प्रथम महिला गुरु प्राथमिक शिक्षा में बीमा चमोली है। आज उत्तराखंड में राधा रतूड़ी, मनीषा पंवार जैसे बड़े पदों पर विराजित महिला अधिकारी सबके लिए प्रेणादायी हैं। कुल मिलाकर हम महिलाओं के ही सहयोग, मार्गदर्शन के कारण ही कोई कार्य कर सकते हैं। उनके बिना हम अधूरे हैं। पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक महिलाओं ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है जो सुखद है।
सवाल इस बात पर है कि इसके बावजूद समाज में लिंगभेद खत्म नहीं हुआ। विधवा विवाह के प्रति देश में एक पहल होनी चाहिए। महिलाओं पर हो रहा शोषण, दहेज उत्पीड़न आदि क्यों नहीं रुक पा रहे। सभी मातृ शक्ति को महिला दिवस पर सादर प्रणाम। आपकी कृपा, आशीर्वाद, स्नेह सदैव मिलता रहे। इन्ही कामनाओं के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई।

महिलाओं को सलाम...पढ़ें धरातल को बयां करती रिपोर्ट महिलाओं को सलाम...पढ़ें धरातल को बयां करती रिपोर्ट Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, March 08, 2019 Rating: 5

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