क्या तुम लोग यों ढाई महीनों का खातिर टीवी चैनलूं सणी देखणू बन्द नि करी सकदन बल ? करी दिवा- रवीश कुमार

24 वीं भाषा में टीवी न देखने की अपील का अनुवद। गढ़वाली में है।
भगवान सिंह चौधरी जी का बहुत आभार। उनका मानना है कि इस बहाने गढ़वाली भाषा को भी लोग पहचानेंगे जिसे हिन्दी आधा मार कर खा चुकी है। गढ़वाली ज़ुबान और गढ़वाल वीरान है। हम भगवान सिंह चौधरी की बात से इत्तफाक रखते हैं।
अगर तुम अपरी नागरिकता तें बचौणु चांदन त न्यूज़ चैनलूं देखणु बंद करी देवा। अगर तुम ये लोकतंत्र मा एक ज़िम्मेदार नागरिका चारूं भूमिका निभौणी चांदन त न्यूज़ चैनलूं सनी देखणु बंद करी दिवा। अगर तुम अपरा बच्चों सणीं सांप्रदायिकता सी बचौणु चांदन त न्यूज़ चैनलों तें देखणु बंद करी दिया। तुम अगर ये भारत मा पत्रकारिता तें बचौणु चांदन त न्यूज़ चैनलूं तें देखणु बंद करी दिवा। न्यूज़ चैनलूं सनी देखणू अपरू खुद कू पतन देखणू च। मैं आप लोगूं दगड़ी अपील करदूं कि आप कुयी भी न्यूज़ चैनल न दयखा। न टीवी का सेट पर दयखा अर न ही मोबाइल पर। अपरी रोजे की आदतों सी चैनलों सें देखणू हटे दिवा। बेशक मै तयीं भी न देख्या पर न्यूज़ चैनलूं तें देखणू बंद करी देवा।

मैं यनी बात पहली भी बोलदी रयूं। मैं जाणदू छौं कि तुम लोग इतगा आसानी सी ये मूर्खता का नशा मगन बेहर नी ऐ सकदन पर फिर भी एक बार दुबरा मैं अपील छौं कनु कि बस यौं ढाई महीनों क तें न्यूज़ चैनलों देखणू बंद करी दिवा। भाई लोगों ये वक्त जु आप चैनलों पर छन देखणा, यू एक सनक कू संसार छ। पागलपन कू संसार च। यौं‌ लोगों कि ये आदत बणगी। पहली बार नीन यू होणू । जब पाकिस्तान दड़ी तनाव नी होंदू तब ये चैनल मंदिर सणी लीकर तनाव पैदा करदन, जब मंदिर कू तनाव न होंदू ता ये चैनल पद्मावति फिल्म तें लेकर तनाव पैदा करी दियांदन, जब फिल्मौ कु तनाव नीं होंदू ता यी चैनल कैराना का झूठ तें लीकर हिन्दू-मुसलमान मा तनाव पैदा करी दियांदन। जब कुछ नी होंदू त यी फर्ज़ी सर्वे पर कयी घंटों कू स्वांग करदन जेकू कुई मतलब नी होंदु।

क्या तुमू समझी सकदन यू सब किले होंदू ? क्या आप पब्लिका तोर पर यूं चैनलों मा पब्लिक तें देखी सकदन? यों चैनलों न ता हम तुम पब्लिक सणी हटेयाली। पब्लिक कुचलियेगी। पब्लिक का सवाल ही नी बचियां। चैनलों का सवाल पब्लिक का सवाल छन बनणा। यह इतगा भी बरीक बात नी च कि आप समझी नीं सकदा। लोग परेशान छनं। लोग चैनल-चैनल घूमी क लौटी जांदे पर तौंकी जगह ना होंदी कखी। नौजावनों का कई सवालों की जगह नी होंदी पर चैनल अपरा सवाल पकड़े क तों सणी मूर्ख छन बनोणा। चैनलों तें यी सवाल कखन छन ओणां, आप तें पता होइयूं चेन्दू। इ अब जब भी करदन, जु कुछ भी करदन, बस ते तनाव की खातिर करदन जु एक नेता कु रास्ता बणोदू। जौंकु नाम च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
न्यूज़ चैनलों कु, सरकार कु, बीजेपी कु अर मोदी कु आपस मा विलय हुवे चुकी। यू विलय इतगा बढ़िया छ कि आप फर्क नी कर सकदन कि पत्रकारिता छा या प्रोपेगैंडा छा। आप एक नेता तें पसंद करदन। यू स्वाभाविक च अर बहुत हद तक ज़रूरी भी च। पर आपकी पसंद कू फायदा उठैक यौं चैनलों की मदद सी जु होणु च, सू ख़तरनाक च। बीजेपी का भी ज़िम्मेदार समर्थकों तें सही सूचना की ज़रूरत होंदी। सरकार और मोदी की भक्ति मा प्रोपेगैंडा तें परोसणू ते समर्थको भी अपमान च। ते सणी मूर्ख समझ़दन जबकि सू अपरा सामनी का विकल्पों की सूचना का आधार पर केकू समर्थन करदू। आज का न्यूज़ चैनल ना सिर्फ सामान्य नागरिक कु अपमान करदन बल्कि तेका दगड़ी मा भाजपा का समर्थकों कु भी अपमान छन कना।

मैं भाजपा समर्थकों दड़ी भी अपील छौं कनू कि आप लोग यों चैनलों तें न देखिया। आप भारत का लोकतंत्र की बर्बादी मा शामिल न होया। क्या आप यों बेकार चैनलों का बिना नरेंद्र मोदी कु समर्थन नी करी सकदा? क्या यू ज़रूरी च कि नरेंद्र मोदी कु समर्थन कने खातिर पत्रकारिता का पतन कु भी समर्थन किये जाऊ? फिर त आप लोग एक ईमानदार राजनीतिक समर्थक नीन। क्या श्रेष्ठ पत्रकारिता का मानकों सी नरेंद्र मोदी कु समर्थन कनू असंभव हवेगी? भाजपा समर्थकों, आप लोगून भाजपा चुनी थे, यी चैनल नी चुनी था। मीडिया कु पतन राजनीति कु भी पतन छा। एक अच्छा समर्थक कु भी पतन छा।

चैनल आपकी नागरिकता पर हमला छन कनां। लोकतंत्र मा नागरिक हवा मा नी बणदू। सिर्फ कै भौगोलिक प्रदेश मा पैदा हुवे जान सी आप नागरिक नी बणदन। सही सूचना और सही सवाल आपकी नागरिकता की खातिर ज़रूरी चा। यों न्यूज़ चैनलों का पास मा न सूचना च ना सवाल च। प्रधानमंत्री मोदी पत्रकारिता का ये पतन का अभिभावक छन। संरक्षक छन। तोंकी भक्ति मा चैनलों न ख़ुद तें भांड- नाटककार बणेली। वे पहली भी भांड था पर अब वे आप तें भी भांड छन बनोणा। अगर आप भांड बणी जाला त लोकतंत्र मिटी जालू।

भारत पाकिस्तान तनाव का बहाना यों राष्ट्रभक्त होण कु मौका मिलगी। जबकि यों मा राष्ट्र की खातिर कुई भक्ति नीन। भक्ति होंदी त लोकतंत्र का ज़रूरी स्तंभ पत्रकारिता का उच्च मानकों तें बणै क रखदा। चैनलों पर जै तरह कु हिन्दुस्तान गढ़ी जे चुकी, तौंका ज़रिया आपका भितर जै तरह कु हिन्दुस्तान गढ़ी याली वू हमारू हिन्दुस्तान नीन। सू एक नकली हिन्दुस्तान छ। देश दड़ी प्रेम कु मतलब होंदु कि हम सब अपरा अपरा काम उच्च आदर्शों और मानकों का हिसाब सी करवां। हिम्मत देखा कि झूठी सूचनाओं और अनाब-शनाब नारों और विश्लेषणों सी आपकी देशभक्ति च गढ़ीयेणी । आपका भीतर देशभक्ति कु प्राकृतिक रास्ता तें ख़त्म करी क ये न्यूज़ चैनल कृत्रिम अर नकली रास्ता बनोणू चांदन। ताकि आप एक मुर्दा रोबोट बणी क रह जाऊंन।
ये समय का अख़बार और चैनल आपकी नागरिकता और नागरिक अधिकारों कु ख़ात्मा कनकू एलान छन कनां। यू आप तें सामनी सी दिखीऊं चेंदू कि यू होन वालु छ बल्कि हुवे चुकी। अख़बारों का हाल भी सी छन। हिन्दी का अख़बारों न ता पाठकों की हत्या की सुपारी लीली। ग़लत और कमज़ोर सूचनओं का आधार पर पाठकों की हत्या ही च होण लगीं। अखबारों का पन्ना भी ध्यान से दय्खा। हिन्दी का अख़बारों तें त उठे क घर सी फेंकी दिवा। याक दिन अलार्म लगेक सेई जवा। सुबेरीयों उठला त हॉकर तें बोलया कि भाई चुनाव का बाद ही अब अख़बार देई ।

यह सरकार नी चाहंदी कि आप सही सूचनाओं सी लैस सक्षम नागरिक बणून। चैनलों न ता विपक्ष बनणे की हर कौशिश ख़त्म कैली। आपका भितर अगर सरकार कु विपक्ष न बणलु ता आप सरकार कु समर्थक भी ना बणी सकदन। होश मा साथ देणू अर नशा कु इंजेक्शन दिकर साथ दिलोणू दुई अलग अलग बात छन। पहला मा आपकू स्वाभिमान दिखेंदू। दूसरा मा आपकु अपमान दिखेंदू। क्या आप अपमानित हुवेक यूं न्यूज़ चैनलों तें देखणू चाहला, यूंका द्वारा सरकार तें समर्थन देणूं चाहला?

मैं जाणदूं छों कि मेरी यह छुईं यह बात ना त करोड़ों लोगों तक पहुंचली और ना त करोड़ों लोग न्यूज़ चैनल देखणा छोड़ला। फिर भी मैं आप सणी आगाह करदूं कि अगर यही चैनलों की पत्रकारिता च ता फिर भारत मा लोकतंत्र कु भविष्य सुंदर नीन। न्यूज़ चैनलों न एक यनी पब्लिक गढ़ी येली जु गलत सूचनाओं अर सीमित सूचनाओं पर आधारित होली। चैनल अपरी बणाई पब्लिक की मदद सी तें पब्लिक सणी हरे देली जु पब्लिक तें सूचनाओं की ज़रूरत होंदी, जोंका पास सवाल होंदा। सवाल और सूचना का बग़ैर लोकतंत्र नी होंदू, लोकतंत्र मा नागिरक नी होंदू।

सत्य और तथ्य की हर संभावना समाप्त हुवेगी। मैं हर रोज़ पब्लिक तें धकेलणू छौं देखणू। चैनल पब्लिक सणी मंझधार मा धकेली क रखणु चाहंदन। जख़ राजनीति अपरू बंवडर अर चकृव्हयू च रचणी। राजनीतिक दलों सी बेहर का मसलों की जगह ही नी बचीं। पता न कतगा मसला इंतज़ार छन कनां। चैनलों न अपरा संपर्क मा आया लोगों तें लोगों का ही खिलाफ तैयार करयाली। आपकी हार कु एलान छ यूं चैनलों की बादशाही। आपकी ग़ुलामी योंकी जीत च। योंका असर सी कुईइतगा आसानी सी नी निकली सकदु। आप एक दर्शक छन। आप एक नेता कु समर्थन कने खातिर पत्रकारिता का खात्मा कु समर्थन ना करा। सिर्फ ढाई महीने की बात च। न्यूज़ चैनलों तें देखणू बंद करी देवा।

क्या तुम लोग यों ढाई महीनों का खातिर टीवी चैनलूं सणी देखणू बन्द नि करी सकदन बल ? करी दिवा- रवीश कुमार क्या तुम लोग यों ढाई महीनों का खातिर टीवी चैनलूं सणी देखणू बन्द नि करी सकदन बल ? करी दिवा- रवीश कुमार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, March 06, 2019 Rating: 5

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