गांव के चौकीदार विधायक मनोज रावत की प्रधान चौकीदार के नाम पाती

उत्तराखंड के एक "ग्राम प्रहरी" याने गांव के चौकीदार की पाती देश के प्रधान चौकीदार के नाम ।

सेवा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधान चौकीदार,
भारत सरकार । 

      सादर प्रणाम, मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक गांव का, "ग्राम प्रहरी " याने गांव का चौकीदार हूँ। आज आपके द्वारा  देश के 25 लाख चौकीदारों को एक साथ किये भावुक संबोधन को सुनने के बाद आपको पत्र लिखने का मन किया । मुझे और मेरे जिले के 350 ग्राम चौकीदारों को, नवंबर 210017 के बाद से हर महीने मिलने वाली केवल 1200 रुपये की तनख्वाह नही मिल पाई है । यही हाल उत्तराखंड के और 12 जिलों के हजारों ग्राम चौकीदारों का है। रुद्रप्रयाग जिले में भी फरवरी 2018 से और अल्मोड़ा जिले में भी 550 ग्राम प्रहरियों को भी एक साल से अधिक समय से बेतन नही मिला है। याने उत्तराखंड में आपकी पार्टी की "डबल इंजन " सरकार के मार्च 2017 में बनने के बाद हम उत्तराखंड के गाँवों के चौकीदारों को  बेतन भी नही मिल पाया है। 
                   

2014 में लोक सभा चुनाव से पहले जब आपने परेड ग्राउंड में हर साल 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने की बात करी थी तो मुझे भी सपना आने लगा था कि , अब मैं भी शायद 1200 रुपल्ली के मासिक "ग्राम प्रहरी " के सम्मान जनक पदनाम वाले और  हकीकत में चौकीदार के काम वाली बेगारी की नौकरी से शायद पटवारी का चपरासी तो बन ही जाऊंगा ।   राज्य में पटवारी के चपरासी के अधिकांश पद  खाली हैं ।  पर  जब   तीन साल में कुछ नही हुआ   तो  मैंने भी सोचा  कि शायद  उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार , आपके प्रयास के बाद भी हमें पटवारी का चपरासी नही बना रही है  । पर तब हम ये संतोष कर रहे थे कि कांग्रेस की निक्कमी सरकार कम से कम 1200 रुपये का तय बेतन तो दे रही है, उत्तराखंड में आपकी पार्टी की सरकार आएगी तो हम पक्के हो जाएंगे। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले जब श्रीनगर रैली में आपने गढ़वाली के कुछ शब्द और डबल इंजन की सरकार बनाने की बात की तो मुझे लगा कि अब हमारा पक्की नौकरी का सपना पूरा हुआ। हमने भी थोक में वोट देकर आपकी पार्टी को 57 विधायक दे दिए । बदले में जब आपकी पार्टी की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी तो हमें 1200 की तनख्वाह के ही लाले पड़े हैं।
                 
आप भी हंस रहे होंगे कि , मेरा किस मूरख से पाला पड़ा, अरे जब देश में चपरासी के पद ही समाप्त हो गए तो ये कैसी मांग कर रहे हैं। पर आप जानते नही उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मेरा और पटवारी के चपरासी का कितना बड़ा काम है।
                      
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पटवारी यानी लेखपाल को दरोगा याने थाना प्रभारी के बराबर शक्तियां मिली हैं । पटवारी का चपरासी भी हवलदार के पद के बराबर होता है । और मैं 1200 रुपल्ली का मजदूर भी अपने कामों से अपने को सिपाही से कम नही समझता । आखिर मुझे गाँव की चौकीदारी के अलावा हर होने वाली घटना की सूचना पटवारी और तहसील को देनी होती है। जब राज्य में पटवारी के चपरासी के 75 फीसदी पद खाली पड़े हैं तो तब मेरे जैसे ग्राम चौकीदारी उसका भी काम करते हैं । याने पहाड़ी जिलों के पटवारी थाने के हवलदार का चार्ज भी हमारे ही पास है । अब चुनाव में हम ही तो अपने मतदान केंद्र की जिम्मेदारी उठाएंगे । ये सारी जिम्मेदारी और मिलने वाली पगार 1200 रुपये वे भी मुझे नवंबर 2017 के बाद नही मिले । 
            
हम पिछले साल अपने को पक्का कराने और बची तनख्वाह के लिये आंदोलन करने देहरादून गए थे वंहा भी पुलिस ने लाठियां बरसा के हमारे पुठे सेके थे । हप्तों घरवाली तेल मालिस करती रही । जब जब दर्द होता तो पटवारी के चपरासी के हवलदार के बराबर वाली ताक़त का मेरा सपना टूटता जाता । हमने अपनी यूनियन के नेता को गरियाया जो मुख्यमंत्री से बात कराने के नाम से देहरादून ले गया था पर मिलवा उनके चपरासी से भी नही पाया। हमारे बगल पर धरने में बैठे अतिथि शिक्षक , शिक्षा मित्र , योग अध्यापक , फार्मासिस्ट और कही तरह के बेरोजगार बता रहे थे कि , आपके उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्रीमान त्रिवेंद्र सिंह जी बेरोजगारों से मिलना अपनी तौहीन मानते हैं , उनका मानना है कि , उनकी नजदीकी रिस्तेदार कुछ मास्टरनियों के अलावा सब हराम की तनख्वाह ले रहे हैं । वे किसी को नौकरी पर लगाना तो दूर सबको बाहर करने के रास्ते तलाश रहे हैं।
           
अब देखो अपना इतना बड़ा दुख, और मुझे सबकी पड़ी, क्या करें पहाड़ी प्राण है किसी का दुख देखा नही जाता । इन पड़े लिखे लड़कों को महीने से बस अड्डे के गंदे नाले के पास पड़े देख मैं भी सालों से की जा रही बेगारी और पुलिस के लट्ठ भूल गया ।
              
पर आज जब होली के दिन आपने एक साथ देश के 25 लाख चौकीदारों को संबोधित कर रहे थे , तो डेढ साल से तनख्वाह न मिलने के दर्द को भूल कर मुझे लगा कि अब हम चौकीदारों को अपना राष्ट्रीय नेता मिल गया। सुना है कि त्रिवेंद्र रावत जी जो उत्तराखंड के सारे महत्वपूर्ण विभागों की तरह मेरे बिभाग याने राजस्व विभाग के भी मंत्री हैं वे और वित्त मंत्री प्रकाश पंत भी , चौकीदार हो गए हैं । जब सारी केंद्र और राज्य सरकार अब हमारी चौकीदार बिरादरी में सम्मलित हो गयी है , तो फिर हमें क्या कमी । 
                
आप से मोबाइल पर बात कर रहे अच्छी ड्रेस पहने और कंधे पर स्टार पहने चौकीदार और टी शर्ट पहने चौकीदार कितने अच्छे लग रहे थे । हमारे पहाड़ के तो छुट्टी पर आए फौजी भी इतनी अच्छी ड्रेस नही पहनते हैं । शायद 50 हजार - 1 लाख तनख्वाह तो पाते ही होंगे ये चौकीदार तभी तो इतना खुश होकर आपसे बात कर रहे थे । या ये भी दुनिया भर में आपके कार्यक्रमों में घूम कर प्रश्न पूछने वाले युवा तो नही थे ? 
                
आज आपने बड़ी मार्मिक बात कही, "मैं गाली को भी गहना बना लेता हूँ " अब जब मैं आपको पाती लिख रहा हूँ तो मेरे सामने एक चैनल की एंकर उछल - उछल कर आपके चौकीदार बनने और बनाने के मास्टर स्ट्रोक की तारीफ कर रहे हैं पर इस पर कोई चर्चा नही कर रहा है कि मेरे जैसे 1200 रुपये महीना  पाने वाले चौकीदारों   को तनख्वाह क्यों नही मिल पा रही है ?  सरदार पटेल की चीन द्वारा बनाई गई मूर्ति की चौकीदारी कर रहे चौकीदारों  भी 6 महीने से तनख्वाह नही मिली बता रहे हैं । यही हाल देश के और राज्यों के ग्राम प्रहरियों का भी बता रहे हैं, पर उनके पास कोई tv वाली एंकर नही गई न आपको उनका नंबर मिला होगा । 
अभी अभी उछल कर एंकर बोली कि देश में मुद्दों पर कोई दल बात नही कर रहा। पर कोई एंकर या पत्रकार हम चौकीदारों के हाल को क्यों नही देखना या दिखाना नही चाहता ?
                     
खैर आपका क्या एक रात आपने सारे नोट खत्म कर दिए । मेरी 98 साल की दादी ने मेंरी बेटी की शादी के लिए 35 हजार इकट्ठे किये थे । उसने जब सुना उसकी जमा पूंजी बेकार हो गयी है तो सदमे से वो मर गयी। GST मैं नही जानता पर ठेकेदार और दुकानदार उससे बड़े परेशान हैं।
          
भले ही बिना तनख्वाह के मेरी ओर मेरे जैसे हजारों चौकीदारों की होली बेरंगी हो गयी हो परंतु मैं आपको चाय वाले से चौकीदार बनने और आपके जैसे सैकड़ों मंत्रियों को चौकीदार वाली नई नौकरी की सुभकामनाएँ देता हूँ, और सामने वाली एंकर को एक सलाह देना चाहता हूँ कि, जब आपकी नोट खत्म करने वाली और gst वाली योजनाएं इतनी अच्छी थी तो।  आप  उन मुद्दों   पर चुनाव। क्यों नही लड़ते  ? 

खैर इतनी बड़ी सलाह मेरे जैसे सचमुच के चौकीदार कैसे दे सकते हैं , फिलहाल तो मैं एक सपना आज सोते हुए देखना चाहता हूँ कि, देश का प्रधानमंत्री मेरे जैसे बिना वर्दी के चौकीदार के रूप में तब कैसा लगेगा जब पटवारी उसको गाँव के पोलिंग बूथ को साफ न करने के लिए मोबाइल पर गंदी गंदी गाली देगा।

मैं भी सपना देख कर तसल्ली कर लूंगा कि, जब देश का प्रधानमंत्री , कह रहा है कि , " मैं गाली को गहना बना लेता हूँ " तो मैं भी बिना तनख्वाह के गाली खाकर 5 साल और चौकीदार के रूप में काटकर , अगले चुनाव में कुछ और वाला बन जाऊंगा । अच्छा नमस्कार अब नींद भी आ रही है और चाहे जेब में एक ढेला भी नही है पर कल होली भी खेलनी है ।

आपकी ही तरह एक ग्राम प्रहरी याने गांव का चौकीदार।
गांव के चौकीदार विधायक मनोज रावत की प्रधान चौकीदार के नाम पाती गांव के चौकीदार विधायक मनोज रावत की प्रधान चौकीदार के नाम पाती Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, March 21, 2019 Rating: 5

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