चैनलों पर परोसी जा रही नफरत, खतरे में संविधान

पहाड़ समाचार
प्रो. चमनलाल। जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर। वो अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। भगत सिंह पर उनके जितना बेहतर और विश्वसनीय रिसर्च शायद ही कोई कर पाए। अब तक उन्हीं के जरिए लोगों ने भगत सिंह के जीवन दर्शन को सबसे ज्यादा जाना है। प्रोफेसर चमनलाल से दिनेशपुर में कामरेड मास्टर प्रताप सिंह यानि मास्साब की बरसी और प्रेरणा-अंशु पत्रिका के शानदार 32 सालों के मौके पर मुलाकात हुई। उनको सुना, उनसे खूब बातें भी हुई। उन्हीं बहुत सारी बातों में से ये कुछ बातें हैं...।
 ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
प्रोफेसर चमनलाल से बहुत सारे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर बैठे पैनलों में चीखते-चिल्लाते कुछ तथाकथित विशेषज्ञों और एंकरों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे पूरी दुनिया के अराजक लोग उसी टीवी स्टूडियो में बैठे होंगे। उन्होंने कहा कि हिंदी चैनलों को पहले से ही हल्ला मचाने वाला करार दिया जा चुका था। लोग अंग्रेजी चैनलों को पहले थोड़ा गंभीर समझते थे, लेकिन अब वहां भी जमकर फूहड़ बहस के अलावा कुछ नजर नहीं आता। उन्होंने अर्नव गोस्वामी का नाम लेते हुए कहा कि उनके चैनल रिपब्लिक टीवी पर चिल्लाने के अलावा कुछ होता ही नहीं है। लोग एक-दूसरे को मारने-पीटने तक को तैयार रहते हैं। कुछ चैनलों पर आप इस तरह के वाकये देख भी चुके होंगे। प्रोफेसर चमनलाल ने एक खतरनाक प्रवृत्ति की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कुछ चैनल पैनल में आने वाले लोगों को केवल चिल्लाने के लिए पैसे भी देने लगे हैं। ये बहुत खतरनाक परंपरा है। सीनियर जर्नलिस्ट रविश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि वो संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हैं। सोई चेतना को जगाने का काम करते हैं। चैनलों ने लोकतंत्र को बर्बाद किया। अर्नव जैसे एंकर आपकी चेतना को कुंद करने का काम कर रहे हैं। आपकी चेतना को बेचने के लिए कई चैनल तैयार हैं और कई पहले से ही दुकान सजाकर बेच रहे हैं।

उन्होंने टीवी चैनलों पर धर्म के नाम पर हो रही बहसों को लेकर कहा कि ये बहुत भयंकर परिणाम लाने वाली बहसें हैं। इनसे बर्बादी के अलावा कुछ हासिल नहीं होने वाला। भगत सिंह के मैं नास्तिक क्यों हूं का अदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उसमें अपना जीवन दर्शन बताया है। भगत सिंह धर्म के नाम पर उस वक्त फैलाई जा रही धारणाओं को लेकर काफी सचेत थे। प्रोफेसर चमन लाल ने कहा कि धार्मिक लोग तथ्यों को विकृत करते हैं। धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान जनता की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अमीरों की रक्षा के लिए है। मोदी और आरएसएस संविधान को बर्बाद करना चाहते हैं। अगर इस तरह कहें कि संविधान खुद खतरे में हैं और संविधान को बचाने की जरूरत है। उन्होंने हिटलर और मोदी की तुलना भी की। कहा कि हिटलर की तरह मोदी  भी कर सकते हैं। जिस तरह से उस कालखंड में हुआ था। उसी तर्ज पर आज भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नैनीताल के इतिहासकार प्रोफेसर ताराचंद त्रिपाठी की बात का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी है तो मुमकिन है नारा, हिटलर के नारे से पूरी तरह मेल खाता है। जिस तरह कहा जाता था कि हिटलर के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। उसी तरह मोदी है तो मुमकिन है।

प्रोफेसर चमन लाल कहते हैं कि सिस्टम को जगाने की जरूरत है। जब तक सिस्टम सही ढंग से काम नहीं करेगा। लोकतंत्र के सिस्टम को हर अंग सही ढंग से काम नहीं करेगा। तब तक कुछ अच्छा होने की उम्मीद नहीं कर सकते। उन्होंने जेएनयू को लेकर भी कहा कि जेएनयू को यूं ही बदनाम किया गया। जेएनयू से देश की वास्तविक समस्याओं और सवालों के मुद्दे खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी रौबदार भाषण देते हैं। ऐसा लगता है कि किसी को संबोधित करने से ज्यादा वो लोगों को डरा रहे हैं। पूर्व पीएम डाॅ. मनमोहन सिंह को उन्होंने आजतक का सबसे बढ़िया पीएम करार दिया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के हितों की बात की जाती है। बराबरी का हक देने की बात कही जाती है, लेकिन आज तक जिस लोकतंत्र को हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहते हैं, उस लोकतंत्र में महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 50 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं दिया जाता। कई देशों के उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जो छोटे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए उन देशों में बराबरी का हक है। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश पर गर्व होना चाहिए। देश के पीएम और उनकी पार्टी के नेता भाषण देते हैं कि हमें हिन्दू होने पर गर्व है। इसमें बताने जैसा क्या है। इसके सीधे मायने हैं कि आप सांपर्दायिक माहौल बनाना चाहते हैं। अगर किसी बात पर गर्व होना चाहिए, तो मानवता पर होना चाहिए।
देश उद्योगपतियों के कब्जे में जा रहा है। प्रोफेसर चमनलाल ने कहा कि उद्योगपतियों पर 80 प्रतिशत टैक्स लगाया जाना चाहिए। सरकार प्राइवेट स्कूलों और युनिवर्सिटियों को प्रोत्साहन देने का काम कर रही है। किस बात के लिए। जितने भी निजी काॅलेज और युनिवर्सिटियां हैं, उनको बंद कर सरकारी स्कूलों, कालेजों और यूनिवर्सिटियों पर फोकस किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के पास युवाओं को रोजगार देने के लिए कोई नीति नहीं है। एमएलए और एमपी को पेंशन मिलती है। जबकि, हमारे देश के अर्धसैनिकबलों के लिए पेंशन का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। सरकार इस पर फैसला ले सकती है, लेकिन इससे वोट प्रतिशत पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जो सांसद, विधायक अपने बयानों से राष्ट्रप्रेम झलकाते हैं। अगर सही मायने में उनमें देशप्रेम है, तो अपनी पेंशन समाप्त कर अर्धसैनिक बलों को पेंशने देने का प्रस्ताव संसद में क्यों नहीं लाते।

चैनलों पर परोसी जा रही नफरत, खतरे में संविधान चैनलों पर परोसी जा रही नफरत, खतरे में संविधान Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, March 13, 2019 Rating: 5

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