लोकसभा चुनाव: पढ़ें पौड़ी लोकसभा सीट की पूरी रिपोर्ट

  • चंद्रशेखर पैन्यूली
आजकल पूरे देश में 17 वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव की चर्चा है। बीजेपी का नारा है, एक बार फिर मोदी सरकार तो कांग्रेस पुनः सत्ता पाने को आतुर है। पहले चरण का मत्तदान 11 अप्रैल को है। इसके तहत उत्तराखंड में भी वोट डाले जायेंगे। उत्तराखंड की राजनितिक सरगर्मी कल से कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। एक तरफ जहां कांग्रेस अध्य्क्ष राहुल गांधी के देहरादून दौरे में कांग्रेस ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी को कांग्रेस में शामिल कर मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है, तो वहीं बीजेपी इससे अपना कोई नुकसान नहीं बता रही है। 


देर शाम तक जनरल बीसी खंडूड़ी जी ने भी कह दिया कि वो बीजेपी के साथ हैं। हालांकि चुनाव के दिनों क्या होता है, क्या उनके बेटे को कांग्रेस टिकट देती है? क्या खंडूड़ी परिवार बेटे को टिकट मिलने की स्थिति में सचमुच अलग रहेगा? ये सब कुछ ही दिनों में साफ हो जायेगा। काफी हदतक सम्भव है कि बीजेपी आज अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर देगी। माना जा रहा है कि टिकट लगभग तय हो चुके हैं। घोषणा होनी बाकि है। कई नेताओं के समर्थकों ने उन्हें कल से ही प्रत्याशी घोषित होने की बधाई देनी शुरू कर दी है। बहरहाल अभी तक न बीजेपी और न कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नामों को एलान किया है। 

उत्तराखंड की सबसे हॉट सीट और जो सबसे अधिक सैन्य बाहुल्य क्षेत्र है गढ़वाल संसदीय क्षेत्र। गढ़वाल संसदीय क्षेत्र को देशभर के उन संसदीय क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां से राजनीती के बड़े-बड़े धुरंधर खिलाड़ी निकले। चार धामों के प्रमुख भगवान बद्रीनाथ जी का भू बैकुंठ भी इसी सीट में पड़ता है। तो ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार का धाम भी इसी सीट में है। अध्यात्मिम दृष्टि से पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग सभी इसी संसदीय सीट में आते हैं। मां नन्दा की हिमालयी राजजात भी यहीं होती है, तो सिद्धबली से लेकर लाटू महाराज के मंदिर भी इसी सीट के अंतरगत अलग-अलग स्थानों पर पड़ते हैं। सिखों का हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी भी यहीं है। इसी संसदीय क्षेत्र के लैंसडौन में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट सेंटर भी है।

उत्तराखंड ही नहीं अविभाजित उत्तर प्रदेश में भी गढ़वाल सीट का बड़ा दबदबा रहा। यहां से स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी भक्त दर्शन चार बार लगातार 1952 से 71 तक सांसद रहे। बेहद ईमानदार भक्त दर्शन जवाहर लाल नेहरू मन्त्रिमण्डल में मंत्री भी हुए। 1971 में प्रताप सिंह नेगी तो 77 में जगन्नाथ शर्मा ने संसद का सफर तय किया। 1980 में दिग्गज्ज हेमवती नन्दन बहुगुणा ने यहां से संसद का सफर तय किया। 84 और 89 में चन्द्रमोहन सिंह नेगी सांसद बने। 1991 में एक ऐसे शख्स की एंट्री यहां से संसद में हुई, जिसे बेहद कड़क प्रशासक और ईमानदारी का पर्यायवाची माना जाता है। वो शख्स कोई और नहीं, मेजर जनरल रिटायर्ड भुवन चन्द्र खंडूड़ी हैं। वर्तमान में भी वे सांसद हैं। 1991 के बाद  बीच में 1996 और 2009 में सतपाल महाराज और 2007 के उपचुनाव में लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत सांसद बने। बाकि 1991 से आज तक खंडूड़ी ने इस सीट पर जीतकर, यहां से सर्वाधिक बार सांसद रहने का रिकॉर्ड बनाया है। आज हालात ऐसे हैं कि बढ़ती उम्र के कारण खंडूड़ी ने चुनाव न लड़ने की बात कही है और उनके बेटे ने कल ही कांग्रेस ज्वाइन की है। स्प्ष्ट है कभी खंडूड़ी है जरूरी का नारा देने वाली बीजेपी अब यहां से किसी नए चेहरे को ही टिकट देगी। माना जा रहा है कि बीजेपी इस सीट से किसी सैन्य पृष्ठभूमि वाले को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा। पैनल में भी इसी तरह के नामों को शामिल किया गया है। इस सीट से भक्त दर्शन, हेमवती नन्दन बहुगुणा, भुवन चन्द्र खंडूड़ी, सतपाल महाराज अलग-अलग सरकारों में केंद्रीय मंत्री तक बने। हेमवती नन्दन बहुगुणा दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। वहीं, अटल सरकार की स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को धरातल पर उतारने वाले काबिल मंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी भी 2 बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

इस संसदीय क्षेत्र के देश भर में कई बड़े नाम मौजूदा समय में या पूर्व में अपनी धाक जमाये हुए हैं। राजनीति की ही बात करें तो भक्त दर्शन, एचएन बहुगुणा, बीसी खंडूड़ी, सतपाल महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का पिनानी गॉव भी इसी सीट के थलीसैण में आता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पंचूर गंव भी इसी पौड़ी के यमकेश्वर क्षेत्र में आता है। वहीं, वर्तमान सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत का खैरासैंण गंव, बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी का गंव डांडा नागराजा भी यहीं है। डॉ. हरक सिंह रावत, धन सिंह रावत, बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव तीर्थ सिंह रावत, सुबोध उनियाल, विनोद कंडारी कांग्रेस के दिग्गज रहे स्व. डॉ. शिवानन्द नौटियाल, सुरेन्द्र सिंह नेगी, राजेन्द्र भंडारी, गणेश गोदियाल, अनुसुइया मैखुरी, राजपाल बिष्ट, कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी जैसे बड़े-बड़े नेताओं की जन्मस्थली या कर्मस्थली यही पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट है। राजा भरत की कर्मस्थली कण्वाश्रम भी इसी सीट में है, तो पहले हिंदी पीएचडी डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल और अनुसुइया प्रसाद बहुगुणा आदि की जन्मस्थली भी यही है। कालिदास की जन्मस्थली कविल्ठा रुद्रप्रयाग भी इसी सीट में आता है। हिमवंत कवि चंद्रकुंवर वर्तवाल का जन्म भी इसी सीट के तहत हुआ। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जी और थलसेना अध्य्क्ष जनरल विपिन रावत का मूल भी यही है। 

2009 से पूर्व इस सीट में पूरा पौड़ी जिला, चमोली जिला, रुद्रप्रयाग जिला और देहरादून शहर आते थे, लेकिन 2009 के बाद देहरादून को इस सीट से अलग किया गया। साथ ही टिहरी जिले की नरेन्द्रनगर और देवप्रयाग विधान सभा और नैनीताल जिले की रामनगर विधान सभा को इसमें जोड़ा गया। अब पांच जिलों के बड़े भौगौलिक क्षेत्र को समेटे इस संसदीय क्षेत्र से इतने बड़े नाम होने के बावजूद भी यहां से बड़ी संख्या में पलायन हुआ है, जो कि पूरे पहाड़ के लिए एक बड़ी समस्या और सरकार के लिए चुनौती है। अब 2019 के रण में जनता किसे यहां से अपना सांसद चुनती है, ये 23 मई को ही पता चल पाएगा। लेकिन, जिस तरह से राजनीतिक गोटियां फिट की जा रही हैं। जिस तरह से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। उससे स्प्ष्ट है कि इस सैन्य बाहुल्य क्षेत्र की लड़ाई रोमांचक होगी। मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद 2019 के आम चुनाव में गढ़वाल से एक नया चेहरा। एक नई पीढ़ी या एक नया नेतृत्व संसद का सफर तय करेगा।
लोकसभा चुनाव: पढ़ें पौड़ी लोकसभा सीट की पूरी रिपोर्ट लोकसभा चुनाव: पढ़ें पौड़ी लोकसभा सीट की पूरी रिपोर्ट Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, March 17, 2019 Rating: 5

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