नेता जी को बताना होगा...वो गुंडे हैं या नहीं

पहाड़ समाचार
देहरादून:
नेता कोई भी हो। कितना ही भ्रष्टाचारी, अनाचारी और अपराधी क्यों ना हो, वो कभी नहीं कहता कि उसने गलत किया है। नेताओं के जुर्म और उनके अपराधा अक्सर छुप जाते हैं या फिर छुपा दिए जाते हैं। हम उन पर ध्यान ही नहीं देते। हम ये जानने का प्रयास नहीं करते कि हमारा नेता आपराधिक रिकार्ड वाला है या नहीं। यह भी नहीं देखते कि हम किसी अच्छे नेता को चुन रहे हैं या फिर किसी अपराधी को। अगर आप अपने नेता के आपराधिक रिकार्ड को नहीं जानते हैं, तो चिंता मत कीजिए, इस बार नेता को चुनाव प्रचार के दौरान खुद भोंपू लगाकर कहना होगा कि मैं गुंडा हूं, चोर हूं, हत्या का आरोपी हूं या जो भी अपराध किया है...। 


दरअसल, चुनाव आयोग ने नया नियम जोड़ा है। नियम के तहत सभी उम्मीदवारों को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी प्रचार अभियान के दौरान कम से कम तीन बार ऑडियो-वीडियो माध्यम से सार्वजनिक करनी होगी। उनको खुद ही अपने आपराधिक रिकार्ड के बारे में जनता को बताना होगा कि उन पर कितने मुकदमें दर्ज हैं। कौन-कौन सी धाराओं में मुकदमें दर्ज हैं। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कार्रवाई भी कर सकता है। इसके अलावा कई अन्य नए नियम भी पहली बार जोड़े गए हैं।

17 वीं लोकसभा के गठन के लिए 90 करोड़ लोग वोट डालेंगे। 18 से 19 साल के डेढ़ करोड़ वोटर इस चुनाव में पहली बार हिस्सा लेंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक आठ करोड़ 43 लाख नए मतदाता इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस बार चुनाव आयोग ने कुछ नए नियमों का ऐलान किया है। यानी इस बार चुनाव में मतदाता और उम्मीदवार कई नई चीजों का अनुभव करेंगे।

10 लाख पोलिंग बूथ पर वोट डाले जाएंगे। हर पोलिंग बूथ पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। ईवीएम पर चुनाव चिन्ह के साथ ही उम्मीदवार की तस्वीर भी लगी होगी। वोटर एक एंड्रॉयड एप सी-विजल के जरिए चुनाव आयोग को आचार संहिता के उल्लंधन की जानकारी दे सकते हैं। अधिकारियों को इस शिकायत पर 100 मिनट के भीतर एक्शन लेना होगा। शिकायतकर्ता की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।

1950 टोल फ्री नंबर पर वोटिंग लिस्ट से जुड़ी जानकारी मैसेज के जरिए ले सकेंगे। ईवीएम मशीन को जीपीएस के जरिए ट्रैक किया जाएगा। सभी उम्मीदवारों को अपने सोशल मीडिया अकांउट की जानकारी आयोग को देनी होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर और गूगल से भी फर्जी सूचनाओं और डिजिटल विज्ञापनों को वैरिफाई किया जाएगा। मीडिया में पेड न्यूज और फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिये राज्य एवं जिला स्तर पर मीडिया निगरानी समितियों की भी मदद ली जाएगी। उम्मीदवारों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट की पूरी विस्तृत जानकारी नामांकन भरते वक्त चुनाव आयोग को देनी होगी। मतदाताओं की पहचान की पुष्टि के लिए फोटो के साथ मतदाता पर्ची मान्य नहीं होगी। इसके लिए मतदाताओं को पासपोर्ट और आधार सहित 11 पहचान दस्तावेजों को मान्यता दी गयी है।

नेता जी को बताना होगा...वो गुंडे हैं या नहीं नेता जी को बताना होगा...वो गुंडे हैं या नहीं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, March 12, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.