आखिर पिंकी की मौत का जिम्मेदार कौन...? अस्पताल या सरकार...?

देहरादून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बड़े जोर शोर से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिवस पर अटल आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना का शुभारंभ करते समय केंद्र और राज्य सरकार ने ढोल पीट-पीटकर यह कहा था कि अब किसी भी गरीब की पैसे के अभाव में जान नहीं जाएगी। हमने सभी गरीबों के लिए प्रधानमंत्री जन कल्याण आरोग्य योजना यानि आयुष्मान भारत का शुभारंभ कर दिया है। अगर सच में आयुष्मान भारत योजना से गरीब का इलाज हो रहा है, तो फिर पिंकी बिना इलाज के क्यों बेमौत मर गई...? उसके पास सरकार का दिया गोल्डन कार्ड भी था...फिर उसकी मौत क्यों हुई..? क्यों महंत इंद्रेश और दूसरे अस्पतालों ने उसका इलाज नहीं किया...? उसे गोल्डन कार्ड होने के बावजूद अपने इलाज के लिए धरना क्यों देना पड़ा...? क्या डबल इंजन की सरकार के पास इसका जवाब होगा...? क्या सरकार पिंंकी की मौत की जांच कराएगी...? 
Pinki is file photo
प्रधानमंत्री  और प्रदेश के मुख्यमंत्री  ने इस योजना के तहत उत्तराखंड के सभी आम नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत योजना लागू की। ।परंतु योजना अब धीरे-धीरे करके 15 लाख रुपये के जुमले में तब्दील होने लगी। जिसका एक ताजा मामला कोटद्वार में देखने को मिला। कोटद्वार निवासी 30 वर्षीय पिंकी को दिल कि बिमारी थी। जिसके इलाज में लगभग तीन लाख रुपये का खर्चा आ रहा था। गोल्डन कार्ड से पिंकी में एक उम्मीद जगी कि अब उसका ईलाज आसानी से हो सकेगा और वह अपने दो मासूम बच्चो और परिवार के साथ आराम से रहेगी। लेकिन प्रधान मंत्री आयुष्मान योजना को भी 15 लाख रुपये कि तरह जुमला बना दिया

बिमार पिंकी आयुष्मान योजना के कार्ड को लेकर अस्पताल पंहुची। अस्पताल प्रशासन ने आयुष्मान कार्ड पर इलाज करने से मना कर दिया। जिसके बाद बिमार पिंकी और उसका परिवार इलाज कराने के लिए कोटद्वार तहसील परिसर में धरने पर बैठ गया था। लगातार पिंकी के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही थी। जिसमें स्थानीय प्रशासन ने पिंकी कोे उठाकर देहरादून के एक अस्पताल में भिजवा दिया। परंतु वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 

पिंकी मरने से पहले जीने की हर कोशिश करती रही। अपना गोल्डन कार्ड लेकर देहरादून के नामी-गिरामी संस्थागत अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची। उसे अस्पताल ने स्वास्थ्य कार्ड योजना का लाभ देने से इंकार कर दिया था। पिंकी के पति का कहना है कि उन्होंने कई जगह फोन किए गए और हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने के बाद उसे महंत इंद्ररेश अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन कुछ समय बाद मंहत इंदेश अस्पताल ने बीमार पिंकी के इलाज में दो लाख साठ हजार का इस्टीमेट पकड़ा दिया। उनसे कहा गयि कि जब वह पुरी रकम जमा करेंगे तभी उसका इलाज हो सकेगा। 

File photo
2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तराखंड का हर नेता आयुष्मान भारत योजना से प्रदेश के प्रत्येक परिवार को 500000 तक का मुफ्त इलाज देने के दावे कर रहा है ।लेकिन, जिस तरह से सरकार के आयुष्मान भारत योजना को लेकर अस्पतालों की मनमानी सामने आ रही है उससे एक बात तो साफ़ है कि सरकार की यह योजना भी जुमला साबित हो रही है। पिंकी की मौत का मामला ही नहीं है। ऐसे कई अन्य मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके डबल इंजन की सरकार अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। ऐसे में उत्तराखंड के पांचों लोकसभा सीटें जितने का दावा भी जुमला ही साबित हो सकता है।
आखिर पिंकी की मौत का जिम्मेदार कौन...? अस्पताल या सरकार...? आखिर पिंकी की मौत का जिम्मेदार कौन...? अस्पताल या सरकार...? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, March 22, 2019 Rating: 5

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