कांग्रेस में चला हरदा का कार्ड, पाचों सीटों पर बीजेपी की मुश्किलें

देहरादून : उत्तराखंड की पांचों लोकसभा के लिए कांंग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही ये असमंजस भी खत्म हो गया कि कांग्रेस किस पर दांव लगाएगी। तकरीबन वही नाम फाइनल हुए जो पिछले कई दिनों से चर्चा में थे। हरिद्वार लोकसभा सीट पर जरूर कांंग्रेस ने अम्बरीष कुमार को टिकट देकर सबको चौंकाया है। इह सीट पर अलग-अलग नाम सामने आ रहे थे। अंबरीश कुमार को टिकट मिलने के बाद रमेश पोखरियाल निशंक की राह भी आसान नहीं रही। जातीय समीकरण और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए अंबरीश कुमार की  इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।

उत्तराखंड टिकट वितरण में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की खूब चली। उन्होंने स्वयं के लिए नैनीताल उधमसिंह नगर सीट से टिकट तो लाया ही साथ ही अपने खास राज्यसभा सांंसद प्रदीप टम्टा को भी अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से टिकट दिलवाया। इतना ही नहींं हरिद्वार सीट पर भी अपने करीबी अम्बरीश कुमार को टिकट दिलवा दिया। तो गढ़वाल सीट पर मनीष खंडूड़ी का नाम भी उन्होंने ही नाम आगे किया। टिहरी सीट पर  जरूर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की चली और वो खुद के लिए टिकट लेकर आए। इन सबके बीच यदि कोई नेता खाली हाथ रहा तो वो है  कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, किशोर इस बार भी हरीश रावत और प्रीतम सिंह के सामने किशोर ही साबित हुए,टिहरी सीट पर किशोर की दावेदारी थी लेकिन उनको नजरअंदाज कर प्रीतम सिंह को टिकट दिया गया। किशोर का नाम हरिद्वार के लिए भी उछला पर वहाँ भी किशोर न जा सके,किशोर उपाध्याय पिछले कुछ दिनों से अपनी उपेक्षा से बेहद आहत भी बताए जाते हैं, कभी हरीश रावत के बेहद करीबी रहे किशोर उपाध्याय को प्रदेश अध्यक्ष रहते राज्यसभा सांसद का टिकट भी न मिल सका था और उनकी जगह प्रदीप टम्टा को तब  राज्यसभा का टिकट मिला और टम्टा राज्यसभा सांसद बने,फिर 2017 के विधान सभा चुनाव में भी किशोर की परम्परागत टिहरी सीट के बजाय उन्हें सहसपुर से टिकट दिया गया, जहां वो हार गए। 

आज किशोर उपाध्याय पुनः टिकट से वंचित रह गए,वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी हरीश रावत के सामने बौनी ही साबित हुई,राजनीति के चतुर खिलाडी हरीश रावत ने इंदिरा के भारी विरोध के वावजूद भी नैनीताल से अपना टिकट पक्का कर,वहाँ की जातीय समीकरण और काँग्रेस के परम्परागत वोट बैंक को साधने की तरफ बढ़े है हालाँकि हरीश रावत 2017 में किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से विधानसभा में हार चुके हैं  लेकिन उनका कद कांग्रेस और राहुल गांधी की नजर में बढ़ता ही गया,आज वे काँग्रेस के वर्किंग कमेटी के सदस्य के साथ साथ राष्ट्रीय महासचिव भी है,हरीश रावत एक मिलनसार, सक्रिय और वाकपटु नेता के तौर पर जाने जाते है,साथ ही वो अपने करीबियों को सदैव याद रखते हैं। जिसकी झलक इस बार के टिकट वितरण में भी दिखी।
 कांग्रेस के पांच टिकटों में से टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट पर जनजाति ST से आने वाले प्रीतम सिंह को टिकट मिला तो गढ़वाल( पौड़ी) से पूर्व सीएम बीसी खण्डूरी के बेटे और हाल ही में देहरादून में राहुल गांधी के समक्ष कांग्रेस में आये मनीष खण्डूरी को टिकट दिया जो कि ब्राह्मण है, तो हरीश रावत नैनीताल से उम्मीदवार है, हरीश रावत ठाकुर चेहरे है तो अल्मोड़ा से काँग्रेस के अनुसूचित जाति के  बड़े चेहरे प्रदीप टम्टा पर दांव लगाया है,तो पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाले अमरीश कुमार को हरिद्वार से टिकट दिया है,ये वहीं अमरीश है जो पहले सपा से विधायक भी रहे हैं और पिछले कई विधान सभा चुनाव में लगातार हारते रहे हैं। अब जबकि कांग्रेस ने भी प्रत्याशी तय कर दिए हैं तो उत्तराखण्ड में बीजेपी ,कांग्रेस समेत सभी पार्टियों ने कमर कस दी है।


कांग्रेस टिकट वितरण में भले ही हरीश रावत की खूब चली हो लेकिन असली चुनौती अब हाईकमान के विश्वास को बनाये रखने की होगी,यदि हरीश रावत समेत कांग्रेस के उम्मीदवार इस चुनाव को जीतने में कामयाब हुए तो निसन्देह हरीश रावत का कद राष्ट्रीय राजनीति में काफी ऊँचा होगा,लेकिन ये देखने वाली बात है कि विभिन्न गुटों और जनता के बीच एक दम अलग थलग पड़ी काँग्रेस को हरीश रावत या काँग्रेस नेता कैसे उभारते है, अब जबकि समय बहुत कम है और काम काफी अधिक इन चुनौतियों से किस तरह निकलकर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते हैं कांग्रेस के प्रत्याशी ये देखना दिलचस्प होगा,मोदी जी की प्रचंड लहर को हरीश की रणनीति उत्तराखण्ड में रोक पायेगी या नही ये तो 23 मई ही बताएगा,पर फिलहाल कांग्रेस उत्तराखण्ड में जनता के समक्ष किस तरह से प्रचार अभियान को चलाती है,कैसे अपने रूठो को मनाती है,कैसे अपने कैडर को सुरक्षित रखकर जनता के बीच अपने खोये जनाधार को बढाती है  अब ये देखना होगा।

कांग्रेस में चला हरदा का कार्ड, पाचों सीटों पर बीजेपी की मुश्किलें कांग्रेस में चला हरदा का कार्ड, पाचों सीटों पर बीजेपी की मुश्किलें Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, March 24, 2019 Rating: 5

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