आओ रवांई को जानें : पंचम्या क दिना कु मव कु गिल्लु

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
    बसंत पंचमी...। एतरा बसंत पंचम्या क बार मां ऐत्या जाणू कि ऋतु बदले, त मनाऊं बसंत पंचमी। पैली बसंत पंचमी क दिना पूजा करत लोक...डोखरु फुंडू। काया रात आ त मव क गिलट लाई। पूजा करि गाल त राथ्यान उठी किनी। डोखरु बि हरेत कि कोईक डोखर फुंड जुंडेत बल्द अर कूंण लालू हऊ...। त्यार बणात लोक। एतरा त्यार ना बार...। 

पैली बसंत पंचम्या क दिना डोखरु फुंडी करत पूजा। बेसमाटा राथ्यान उठी किनी पैली मव कु गिल्लु आ ति डोखर फुंडी धोई। बामण किनी कर त पुछाई किनी कि कोईक डोखर फुंडी हली पूजा। बामण क बताईं विधि-विधान किनी सबा चिजा करत कठ। पैली एंणु करत कि सतनजु बंणा त। सतनाज मां सरसौं, जौ, झंगरु, तील अर कौंणी, मारसा अर ओठा धाणी मिला त।

सतनजु डोखर फुंडू गिदाए तु। तेइक बाद जेइली बामण कु र तु बताइयुं सु मनखी गोल घेर मां लगातु हऊ...तेइली हलस्यूं बोलत। जण-जण सु हऊ ला तु तण्या पाछ बाटी बीज धोत स्यां फुंड। ज पंचमी पूजी जा त, तेइक बाद बामण दे तु माटु पूजी। तेई पुजीं माट लोक होइक साल क पंचम्या तांई धरत समाई। पंचम्या क दिना बाटी लोक डोखर बोण कु काम कर त शुरू। 

अब एणु खाई जमान नि पलटा कि ना कोई डोखर लांदु, ना कोईक बल्द धरीं। मऊ खचरु किनी लाऊं। तेरी का मेरी भी तांण्या छुंई। मुंई बि ना लांदु डोखर। पर एक दीन एंणु आलु कि सबु पड़ल डोखर लाण। कालिकी ज खाण ली ना मिललु किछी त का करल। अन्न त डोखरु फुंडू ह।
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