दो बच्चों को सीने से लगाकर मलबे में दबे रहे मां-बाप, 16 दिन के बेटे और तीन साल की बेटी को नहीं आने दी खरोंच

गरुड़ (बागेश्वर): मां-बाप अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं कर जाते। यहां तक कि अपनी जान पर खेलकर अपने बच्चों को बचा लाते हैं। मां-बाप की अपने बच्चों के लिए कुर्बानियों की कई कहानियां हैं। ऐसी ही एक कहानी बागेश्वर जिले के गरुड़ तहसील के बिमोली गांव में सामने आई। मां-बाप ने मिलकर अपने दुधमुंहें बच्चे के साथ दूसरे बच्चे को अपनी जान पर खेलकर बचा लिया। 


दअरसल, बिमोला गांव में मनोज कुमार और उनकी पत्नी अपने दो बच्चों के साथ पुराने मकान में रहता है। आज सुबह करीब साढ़े पांच बजे उनके मकान की छत की बीच वाली बल्ली टूट गई। जिससे पूरे मकान की छत उन पर आ गिरी। मनोज और उनकी पत्नी ने एक-एक बच्चे को अपने सीने से लगा लिया और छत की तरफ फीठ कर दी। करीब 15 मिनट तक मनोज और उनकी पत्नी अपने दोनों बच्चों के साथ मलबे में दबे रहे। 

मां-बाप ने बच्चों को सीने से चिपका लिया और सारा मलबा अपने ऊपर गिर जाने दिया। घायल मनोज ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि हौसला ना हारे। दोनों ने अपने मासूमों को खरोंच तक नहीं आने दी। दोनों घायल दंपति का बैजनाथ में इलाज किया जा रहा है।

एक बड़ी बात यह है कि उनका छोटा बेटा अभी मात्र 16 दिन का है। तबकि उनकी बेटी दीपांशी तीन साल की है। दोनों को अपने माता-पिता ने एक नया जीवनदान दिया। दो कमरों के इस मकान में एक कमरा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। डीएम रंजना राजगुरु को भी घटना की जानकारी दी गई। 

दो बच्चों को सीने से लगाकर मलबे में दबे रहे मां-बाप, 16 दिन के बेटे और तीन साल की बेटी को नहीं आने दी खरोंच दो बच्चों को सीने से लगाकर मलबे में दबे रहे मां-बाप, 16 दिन के बेटे और तीन साल की बेटी को नहीं आने दी खरोंच Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, February 05, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.