सरकार 11 को प्रोमिस-डे है: जो वादा किया निभाना पड़ेगा

     ये प्रेम सप्ताह है...। आज प्रपोज डे है। मुझे सरकार को प्रपोज करना है। ये प्रपोजल...प्रपोज डे पर इसलिए दे रहा हूं, ताकी 11 फरवरी को आने वाले प्रोमिस डे तक ये सरकार के पास पहुंच सकें। प्रोमिस डे-मतलब...जैसा सोबन सिंह भैजी ने बताया कि जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा। काश कि नेता और सरकारें भी जनता को अपनी महबूबा समझकर अपना वादा निभाते। वैसे चुनाव तक तो नेताओं की फैक्ट्रियां यानि कि नेताओं की पार्टियां जनता को अपना महबूब या महबूबा ही बताते हैं...पर जैसे ही उनको, उनका प्यार...उनकी सत्ता, उनके हाथ लग जाती है...वो बेवफा हो जाते हैं। 

सरकार को भी वैलेनटाइन-डे मनाना चाहिए...। रोज डे...के बारे में मैं आपको बता ही चुका हूं। सोचा आज प्रपोज-डे भी मना ही लेता हूं। मनाते-मनाते याद आया कि प्रपोज-डे का मतलब प्रस्ताव देना होता है। सोचा जो सत्ता में हैं, उन लोगों ने जनता के सामने प्रस्ताव रेखे थे...। वो प्रस्ताव और वादे, जिनके आधर पर वोटों की लूट मचाई थी। इससे बढ़िया टाइम नहीं आने वाला। सरकार के सामने उनके प्रस्ताव, प्रपोज करने का। 


हम नेताओं को वोट देते हैं...। नेता जी बदले में एक-दो नहीं। ढेर सारी वादों की पोटली थमा देते हैं। उन वादों की पोटली को ढोते-ढोते जनता बेचारी थक जाती है। सरकार ने कहा था...रोजगार देंगे। क्या दिया बाबा जी का ठुल्लू। विकास करेंगे...। वो आजतक नहीं हुआ। पता नहीं कब तक होगा...सुना तो ये भी था कि विकास...होकर पागल भी हो चुका है। आपको कहीं मिले तो उसको मेंटल अस्पताल में भर्ती करा आना। मुझे तो नेता जी भी कुछ-कुछ कभी-कभार सटियाए हुए नजर आते हैं। ऐसी-ऐसी हवाई बातें कर देते हैं, जिनके बारे में वो खुद पहली बार सुन रहे होते हैं। फिर भी फेंकने में कोई कमी नहीं दिखाते...।

एक पत्र जारी किया था...उसमें युवाओं पर दृष्टि रखने का वादा किया गया था। युवा नीति का सपना था...। उसमें युवाओं के लिए कोचिंग से लेकर रोजगार तक की व्यवस्था की गई थी। मिला क्या..? कुछ नहीं। युवा नीति तो नहीं बनी...पर इतना जरूर लगता है कि सरकार ने युवाओं को बेरोजगार रखने की नीति जरूर बना ली है। बगैर ब्याज के क्या किसी बंदे को अब तक शिक्षा के लिए लोन मिला पाया...? रिक्त पद भरने तो दूर...भरे हुए खाली जरूर हो रहे हैं। शीतकालीन खेल उत्तराखंड में हिमयुग लौटने के बाद भी नहीं हो पा रहे। 

आज प्रपोज डे है...इसलिए ये सारी बातें याद दिला रहा हूं...। आगे आपकी मर्जी जो बातें बताई उनको पूरा करो या फिर मेरे पीछे लग जाना...। महिला अपराध रोकने का वादा था...रुके क्या...? पिछले दो सालों में दिन-दुनी-रात-चैगुनी की तेजी रफ्तार से महिला अपराध बढ़े। राजधानी तो गैरसैंण बन चुकी...। हमें नहीं चाहिए आपकी वाली ग्रीष्मकालीन राजधानि...। हमें तो रिसपना पुल की अवैध बस्ती चाहिए। राजधानी वहीं बनाएंगे, वो भी अध्यादेश लाकर। लोकायुक्त ने तहलका मचाया हुआ है। लोक सेवक स्थानांतरण अधिनियम यानि अनिवार्य ट्रांसफर एक्ट...भयंतर काम कर रहा है। अब ट्रांसफर कराने की जरूरत ही नहीं, खुद ही हो रहे हैं। गजब है...दिव्यांग, पति-पत्नी और बीमार लोगों के ट्रांसफर की फाइल मुख्य सचिव के पास है। कई दिन से कुंडली मारे बैठे हैं। 

आज प्रपोज डे है...मैं आपको प्रपोज किए देता हूं सरकार...। बुरा मत मानिएगा। हम जनता हैं। जरा नाजुक हैं। आपने वादा तोड़ दिया, तो हम खुद ही टूट कर बिखर जाएंगे। हमारे पास तो बस एक अंगुली भर है। जनता जो प्रपोज करती है। उस प्रोमिस को अपने प्रोमिस डे यानि वोटिंग वाले दिन निभाने पर उतर गई, तो क्या होगा...बताने की जरूरत नहीं है।
बाकी...रोधेय-रोधे
                                                                    ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
सरकार 11 को प्रोमिस-डे है: जो वादा किया निभाना पड़ेगा सरकार 11 को प्रोमिस-डे है: जो वादा किया निभाना पड़ेगा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, February 08, 2019 Rating: 5

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