"सुबेदार" जी लोग सवाल पूछ रहे हैं...जवाब तो देना पड़ेगा

     "सुबेदार" जी नमस्कार...! भाई और भतीजा...सेंध लगा रहे हैं...! लोग कह रहे हैं कि "सुबेदार" ही...? है...बल...! तो चोरी कैसे रुकेगी...। साफ़-साफ़ लिखने और कहने ही जरूरत ही नहीं...। क्या है ना लोग ज्यादा समझदार हो गए हैं बल...मैं नहीं भी कहूंगा तब भी समझ जाते जायेंगे। सवाल उठे हैं...। जाहिर है सवाल सुबेदार से ही किए जाएंगे और जवाब भी सुबेदार को ही देना चाहिए। ब्वाडा ने तो ये तक कह दिया कि सुबेदार खुद को जीरो टाॅलरेंस वाला बता कर जनता की फिरकी ले रहा है...। ठीक ही तो बोला ब्वाडा जी ने...अब पता भी चल ही गया। और तो और मोर्चा वाले तो कह रहे हैं कि जनता दौड़ा-दौड़ा कर लेगी बल हिसाब...।


ये बात अलग है कि स्टिंग करने वाला भी सेटिंगबाज तगड़ा है। ये सब बातें अखबार वालों ने मोटी-मोटी डेढ़ इंची हेडिंगों में लिखी थी। पर सुबेदार पर सवाल खड़े हुए तो बंदों ने हेडिंग का साइज भी इंच से सीधे जीरो पर आ गया, यानि खबरियों ने खबर ही पचा डाली। जो भी हो सुबेदार को कुछ तो सफाई देनी ही पड़ेगी। नहीं देंगे बल...तो पहाड़ से सवालों से पार पाना कठिन हो जाएगा। बाकी...सुबेदार जानें...!

सुबेदार ने और कुछ किया ना हो...पर अखबारों की चैकीदारी खूब कर ली। लेकिन, सोशल मीडिया फिर सामाजिक हो ही गया...। सीएम के भाई और भतीजे का स्टिंग फुफकारे मारकर चल रहा है। हर मोबाइल की बड़ी-बड़ी डिसप्ले से बाहर झांकता स्टिंग तो यही बता रहा है कि सुबेदार के घर में ही चोर हैं बल...! बाकी पानी मिले दूध में से पानी, जांच के बाद ही अलग हो सकेगा। जो भी हो दूध और पानी को अलग-अलग तो करना ही पड़ेगा।

जीरो टाॅलरेंस वालों को सांप सूंघ गया है। बंदों की जुबान ऐसी साइलेंट हो गई कि बाइब्रेशन भी नहीं कर पा रही। कल ही तो अब तक साइलेंट मोड़ में चल रहे मुख्य सचिव ने भी बाइब्रेट करना शुरू किया है। उन्होंने भी जीरो टाॅलरेंस में से कुछ जीरो कम कर दिए। गजब ही हो रहा है इस प्रदेश में...। मंत्री और अधिकारियों की ऐसी सेटिंग कि स्टिंगबाज भी मौका उठा गए। कुछ अधिकारी तो उत्तराखंड पर पूर्ण सूर्य और चंद्र ग्रहण की तरह लगे हुए हैं। छूटने का नाम ही नहीं ले रहे। मंत्रियों को फाइलों की निकासी चम लगे दरवाजों के बीच की सुरोगों से निकालने का तरीका भी यही अधिकारी सिखाते हैं...बल।  

आखिर में एक बात...सुबेदार जी की धौंण (गर्दन) इस बार ऐसी फंसी है कि या तो फंदा ही तोड़ना पड़ेगा या फिर सुबेदार को फंदे पर झूलना ही पड़ेगा। एक बात और हमारा किसी सेटिंग-गेटिंग वाले को सपोर्ट नहीं है बल...। सरकार तो हमको दुश्मन समझती ही है। सुबेदार जी ने तो अपनी टीम में ही सलाहकार...नुमा कारतूसें पाली हुई हैं। टांग हिलाने से ब्लक प्रेशर कम होता है बल...ऐसा मैने सुना है...बाकी वही जानें, जो हिलाते हैं। 
                                                                                                                              
                                                                                                                                      ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
"सुबेदार" जी लोग सवाल पूछ रहे हैं...जवाब तो देना पड़ेगा "सुबेदार" जी लोग सवाल पूछ रहे हैं...जवाब तो देना पड़ेगा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, January 28, 2019 Rating: 5

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