...लो आज से मैं अमीर हो गया

पहाड़ समाचार...    
...मैं अमीर नहीं था। हां आज से हो गया हूं...मेरे पास दुवाओं का खजाना है। आज महसूस किया कि जब किसी के शरीर पर कपड़े ना हों और उसे कपड़े मिल जाएं, तो वो कितना खुश होता है। उसके चेहरे पर जमा मैल मुस्कान से खिले चेहरे पर से गायब हो जाता है। उनके आंखों की चमक दो पुराने कपड़े पा लेने से किसी कीमती हीरे को पा लेने जितनी हो जाती है। शरीर को चीरने वाली ठंडी हवा से ठिठुर रहे बच्चों की सिकुड़न कपड़ों को देख गायब हो जाती है और कपड़ों के लिए बिजली की तेजी से दौड़े चले आते हैं। उनके लिए ये पुराने कपड़े खुशियों की चाबी थी। कुछ देर पहले तक मुर्झाये चेहरों पर अब रौनक थी। बच्चे क्या उनके मां और बाबा भी अपने बच्चों के लिए दो कपड़े लेने के लिए बच्चों से कहीं अधिक लालायित और उत्साहित नजर आ रहे थे। आज जितना आनंदित खुद को पहले कभी महसूस नहीं किया। 

आज मकर संक्रांति थी यानि कि हमारी धम्र्या संग्रांद। लोग गंगा नहाने जा रहे थे। मैं गंगा तो नहीं नहाया, लेकिन बाथरूम में गर्मा-गर्म पानी से छपोड़-छपोड़ कर नहाया। पूजा करने के बाद दफ्तर के लिए तैयार हुआ। पत्नी ने बच्चों के कपड़े संभाले हुए थे, जो अब छोटे हो चले थे। पोठली बांधी और आॅफिस की तरफ चल पड़ा। रास्ते में झोपड़ियां पड़ती हैं। आए-दिन आते-जाते बच्चों को ठंड में ठिठूरते देखता था। लेकिन, मैं खुद इतना संपन्न नहीं था कि उनके लिए कुछ कर पाता। इस बीच शशि भूषण मैठाणी ने इंसानियत की समोण अभियान चलाया। इस अभियान ने मुझे भी आइडिया दिया और मैं चल पड़ा बच्चों को कपड़े बांटने। पुराने जरूर थे, लेकिन थे पहनने लायक। 

झोपड़ियों के पास पहुंचते ही, वहां मौजूद बच्चे मेरी ओर आने लगे थे। वो समझ चुके थे कि आज कोई अजनबी हमारे दर पर आया है। जरूर कुछ माजरा होगा। जैसे ही बच्चों और उनके मां-बाबा को पता चला कि मैं उनके लिए कपड़े लेकर आया हूं। एकदम सब जमा हो गए। दो-तीन झनों को ही दे पाया था कि सबने झपटकर मेरे हाथ से थैला छीन लिया और भाग निकले। मैंने बुलाया, तो एक बूढ़े और बीमार बाबा ने कहा बाबू रहने दो वो खुद बांट लेंगे। वास्तव में उनके नियम वही जानते हैं। कुछ देर उनके साथ रहा। बच्चों से बातें की। वो पढ़ना चाहते हैं, लेकिन पढ़ नहीं पाते। पर उनके चेहरे की रौनक देख दिल खुश हो गया। उनकी दुवाओं से आज मैं अमीर हो गया...। 
                                                                                            ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
...लो आज से मैं अमीर हो गया ...लो आज से मैं अमीर हो गया  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, January 15, 2019 Rating: 5

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