...लापरवाही और अनदेखी की सड़कों पर जंप खाती जिंगदगी

बड़कोट...    
देहरादून-बड़कोट-तटाऊ-राजगढ़ी-गडोली-नौगांव। जी हां ये एक दिन के हिचकोलों का हिसाब-किताब है। स्कूटी और उसके सफर का रूट चार्ट। देहरादून जमुनापुल तक चमचमाती सड़क है। इतना आनंद आता है कि पूछो मत...। लेकिन, इसके बाद शुरू होता है। सरकार और एनएच की लापरवाहियांे का एनएच-123 दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग। इस सड़क का दुभाग्र्य ये है कि एनएच ने केवल उन्हीं जगहों पर काम किया है, जिन जगहों पर अक्सर होता रहता है। डामटा से पहले (नौगांव की ओर) सड़क चैड़ीकरण का काम लगभग आठ-नौ साल पहले से शुरू हो गया था, जो कुछ-कुछ जगहों पर किसी न किसी रूप में अधूरा पड़ा हुआ है। कुछ जगहों पर इन्हीं आठ-नौ साल पहले स्कबर बनने शुरू हुए थे। बड़ी मुश्किल से ओ बने, लेकिन उनके आसपास की टूटी सड़क के जख्म आज तक नहीं भरे...। 
नौगांव सौली से लेकर बड़कोट तक सड़क का बुरा हाल है। बड़कोट के बाद यमुनोत्री रोड़ पर राजतर से राजगढ़ी के लिए सड़क जाती है। ये सड़क कुछ समय पहले तक अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अब इसकी हालत खराब होती जा रही है। पेंटिंग कुछ जगहों पर पूरी तरह उखड़ चुकी है। गड्ढे और बड़े होते जा रहे हैं। राजगढ़ी से गडोली जाने वाली सड़क क्षेत्र की सबसे पुरानी सड़क है। इसका राजतर-राजगढ़ी मार्ग बनने से पहले तक बड़ा महत्व था। 

यूपी के जमाने में सहारनपुर से लेकर देहरादून और विकासनगर से जो भी सेवाएं राजगढ़ी तक चलती थी, इसी रोड़ से चलती थीं। इस मार्ग को लेकर भी लारवाही साफ नजर आती है। विभागीय अधिकारी और जिले के आला अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते। जिसका नतीजा यह है कि जिन जगहों पर काम होता है। उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है और जिन जगहों पर काम नहीं हो रहा, वो कई सालों से उसी बदहाली में है। 
गडोली से नौगांव के लिए बगासू से होकर जाने वाली सड़क पहले मुख्य सड़क होती थी, लेकिन अब ये सड़क भी कभी-कभार वाली रह गई। इसकी हालत भी कुछ जगहों पर बेहद खराब है। नौगांव और बड़कोट बाजार की सड़कें हमेशा से ही बदहाल रहती हैं। बड़कोट में लोक निर्माण विभाग कार्यालय के बाहर ही गड्ढे हैं, लेकिन विभाग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। डामटा में भी गड्ढे बने हुए हैं। 

अब जैसे-जैसे चारधाम यात्रा का समय नजदीक आता है। प्रदेश के दो धामों श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ पर ही पूरा फोकस किया जाता है। यमुनोत्री और गंगोत्री के पर ध्यान नहीं दिया जाता। इसकी पड़ताल भी कर सकते हैं। ये कोई हवाई दावा नहीं है। दस्तावेज और बजट दोनों इसकी गवाही दे देंगे। ये बात 100 फसदी सच है। यमुनोत्री में अब तक आपदा से जो भी नुकसान हुआ, उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा। इसके लिए लोगों को एकजुट होकर बड़ा आंदोलन खड़ा करना होगा। कुछ लोग इस दिशा में काम कर भी रहे हैं। बहरहाल सरकार को भी सोचना होगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। 
                                                                                                                                      
 ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)

...लापरवाही और अनदेखी की सड़कों पर जंप खाती जिंगदगी ...लापरवाही और अनदेखी की सड़कों पर जंप खाती जिंगदगी Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, January 21, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.