परीक्षा से ज्यादा तटाऊ की चिंता, क्या इनको कोई "दानी" मिल पायेगा

बड़कोट : तटाऊ...। स्व.राजेंद्र सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय बड़कोट। 25 साल। डिग्री काॅलेज अब 25 साल का युवा हो चुका है। इन 25 सालों में डिग्री काॅलेज बड़कोट आईटीआई के किराए के कमरों से तटाऊ में बने अपने भवन में तो पहुंचा, लेकिन अपनी बदहाली आज तक नहीं सुधार पाया। सरकार की उच्च शिक्षा कागजों में तो सुधर रही है, लेकिन धरातल से सच नदारद है। 25 साल बाद भी महाविद्यालय की दशा और दिशा अभी अभावों में जी रहे बच्चे जैसी है। 

जब तक काॅलेज का अपना भवन नहीं बना था...चुंकि मैं भी इसी महाविद्यालय से पढ़ा, तो हम भी चाहते थे कि अपना भवन बनना चाहिए। आंदोलन भी किए। डख्याटगांव वालों ने खुले दिल से काॅलेज बनाने के लिए अपने खेत भी दान किए। उनका दिल से शुक्रिया। नए भवन में पहली बार जाना हुआ। वहां, की समस्याओं पर अलग से बात की जाएगी, लेकिन पहले वहां पढ़ रहे हमारे-आपके बच्चों और छोटे भाई-बहनों की समस्याओं को जानने का प्रयास करते हैं।

सबसे बड़ी और गंभीर समस्या ये है कि काॅलेज में अध्ययनरत स्टूडेंट बड़कोट बाजार में रहते हैं। यहां से काॅलेज जाने के लिए वाहन की सुविधा नहीं है। ज्यादातर वाहन चालक दूर की सवारी ही बिठाते हैं। अगर किसी तरह राजतर तक पहुंच भी जाएं तो, वहां से भी करीब दो-ढाई किलोमीटर पैदल रास्ता नापना पड़ता है। इन दिनों काॅलेज के पेपर चल रहे हैं। पेपर सुबह आठ बजे से शुरू होता है। सुबह कोई वाहन की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को बड़कोट से सुबह छह-सात बजे ही पैदल करीब 7 किलोमीटर की दूरी नापनी पड़ती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनको कितनी दिक्कतें झेलनी पड़ रही होंगी। हाड़ कंपाती ठंड में सात किलोमीटर तक पैदल नापना पड़ रहा है। उनको पेपर से ज्यादा सुबह उठकर पेपर देने के लिए डिग्री काॅलेज तक पहुंचने की चिंता रहती है। इसका प्रभाव कहीं ना कहीं उनकी परीक्षा और पढ़ाई पर पड़ता ही होगा। 

क्या उच्च शिक्षा मंत्री को बात पता नहीं है। पता है। उनसे ये बात कही भी गई थी। उन्होंने ही उद्घाटन किया था, लेकिन संवेदहीन हो चुकी राजनीति और व्यवस्थाओं को इससे फर्क नहीं पड़ता। काॅलेज के प्राध्यापक भी इस बात से बेहद चिंतित हैं। अपनी तरफ से वो हंस फाउंडेशन से भी बात कर चुके हैं। उम्मीद करते हैं कि हम एक बार फिर से प्रयास करेंगे। हंस फाउंडेशन से बात करने के साथ ही दूसरे माध्यमों से भी काॅलेज के लिए एक बस उपलब्ध हो सके। कालेज के स्टूडेंट को माता मंगला और भोले जी महाराज से उम्मीद है कि वो उनकी इस समस्या को दूर करेंगे। 

परेशानियां छोटी-मोटी बहुत हैं। मसलन, काॅलेज के आसपास डख्याटगांव को छोड़कर कोई दूसरा गांव नहीं है। आसपास रहने की सुविधा तो दूर...काॅपी और पेन तक की दुकान नहीं है। अगर आपको कुछ भी चाहिए, तो बड़कोट से पहले नहीं मिल सकता। कई बार काॅपी-पेन की समस्या हो सकती है। भगवान ना करे कोई बीमार या दुर्घटना हो जाए, तो अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन भी नहीं मिल पाता। जिस जगह पर काॅलेज है। वहां, केवल सबुह-शाम ही वाहनों का ज्यादा आना-जाना रहता है। 

परीक्षा से ज्यादा तटाऊ की चिंता, क्या इनको कोई "दानी" मिल पायेगा परीक्षा से ज्यादा तटाऊ की चिंता, क्या इनको कोई "दानी" मिल पायेगा  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, January 20, 2019 Rating: 5

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