साधु बस माथा नहीं रंगते, अपनी पहचान बताते हैं

पहाड़ समाचार...
देहरादून: आपने साधुओं को माथे पर कई तरह के तिलक लगाए देखा होगा। आपके लिए वो केवल बाबा के माथे पर लगा लेप हो सकता है, लेकिन बाबा के माथे पर लगा तिलक उनकी पहचान है। साधुओं के कई पंथ, मत और संप्रदाय हैं। हर पंथ की अपनी अलग पहचान होती है। उनके कपड़े भले ही उनकी पहचान ना कराते हों, लेकिन उनके ललाट पर चमकता तिलकी उनकी पहचान को आसानी से बयां कर देता है। प्रयागराज में कुंभ लग रहा है। देश और दुनिया में फैले हिंदू धर्म के अनुयायी और संत इसमें शामिल होने के लिए आ रहे हैं। इन सबके माथे पर चमकते तिलक इनकी पहचान है। 

तिलक हिंदू संस्कृति की पहचान माने जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, ये तिलक भी एक या दो प्रकार के नहीं होते हैं, बल्कि 80 से भी ज्यादा प्रकार के होते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 64 तरह के तिलक वैष्णव साधुओं में लगाए जाते हैं। हिंदू धर्म में जितने भी संतों के मत हैं, पंथ है, संप्रदाय हैं, उन सबके भी अलग-अलग तिलक होते हैं।

शैव: इस तिलक में ललाट पर चंदन की तिरछी रेखा लगाई जाती है। इसके अलावा त्रिपुंड भी लगाया जाता है। ज्यादातर शैव साधु इसी तरह का तिलक लगाते हैं।

शाक्त: शक्ति की आराधना करने वाले साधु चंदन या कुंकुम का तिलक ना लगाकर सिंदूर का तिलक लगाते हैं। माना जाता है कि सिंदूर साधक की शक्ति को बढ़ाता है और उसकी उग्रता का प्रतीक भी होता है। जानकारों की मानें तो ज्यादातर आराधक तिलक लगाने के लिए कामाख्या देवी के सिद्ध सिंदूर का इस्तमाल करते हैं।

वैष्णव: तिलक लगाने के सबसे ज्यादा प्रकार आपको वैष्णवों में मिलेंगे। इनमें करीबन 64 प्रकार के तिलक लगाए जाते हैं। 

इनमें से कुछ प्रमुख तिलक...

लालश्री तिलक: इस तरह के तिलक में आसपास चंदन का तिलक लगाकर बीच में कुंकुम या हल्दी से रेखा बनाई जाती है।

विष्णुस्वामी तिलक: इस तिलक को लगाने के लिए माथे पर भौहों के बीच दो चैड़ी रेखाएं बनाई जाती हैं।

रामानंद तिलक: इस तिलक को लगाने के लिए पहले विष्णुस्वामी तिलक लगाया जाता है, उसके बाद उसके बीच में कुंकुम से खड़ी रेखा बनाई जाती है।

श्यामश्री तिलक: कहा जाता है कि इस तिलक को भगवान कृष्ण के उपासक लगाया करते हैं। इस तिलक को लगाने के लिए पहले आसपास गोपीचंदन और बीच में काले रंग की मोटी रेखा लगाई जाती है।
साधु बस माथा नहीं रंगते, अपनी पहचान बताते हैं साधु बस माथा नहीं रंगते, अपनी पहचान बताते हैं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, January 13, 2019 Rating: 5

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