गजब : नशबंदी भी नहीं हुई और बजट भी ठिकाने लग गया

देहरादून: प्रदेश में नशबंदी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। देशभर में पुरुष नशबंदी को लेकर सालों से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उत्तराखंड में कुछ समय तक खूब जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। कैंप भी लगाए गए, लेकिन कभी स्वास्थ्य विभाग ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि, उनकी जागरूकता का कोई असर हो भी रहा है या केवल बजट ठिकाने लगाया जा रहा है। 

आरटीआई कार्यकर्ता हमेंत गौनिया की आरटीआई से जो खुलासा हुआ है, वो चैंकाने वाला है। महिलाओं को हर तरफ से तमाम जागरूकता कार्यक्रमों और प्रयासों के बावजूद पीछे धकेलने का काम किया जा रहा है। वर्तमान परिस्थितियों की बात की जाए तो महिलाएं पुरुषों से हर काम में मुकाबला कर रही हैं। घर से लेकर व्यापार तक में महिलाएं आगे हैं। बावजूद इसके महिलाओं से नशबंदी कराई जा रही है। इन आंकड़ों पर कभी स्वास्थ्य विभाग की नींद भी नहीं टूटी। 

पहले धारणा बनाई गई थी कि पुरुष ज्यादा काम करते हैं, नशबंदी से कमजोरी हो सकती है। इसके चलते महिलाओं से नशबंदी करवाई जाती थी। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रमों के बाद विभाग ने कई बार आंकड़े जारी किए कि पुरुष नशबंदी में आगे आ रहे हैं, लेकिन अब जो आंकड़े खुद विभाग ने आरटीआई में दिए हैं। उन आंकड़ों ने पूरी पोल खोलकर रख दी है। राज्य बनने के बाद से अब तक 4,79,513 महिलाओं की नशबंदी हो चुकी है। जबकि अब तक केवल 29,801 पुरुषों की ही नशबंदी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जागरूकता के नाम पर स्वास्थ्य विभाग ने खुद तो लाखों डुबोए ही, कई एनजीओ को भी इसका ठेका दिया गया था, लेकिन परिणाम अब भी चिंताजनक हैं।

गजब : नशबंदी भी नहीं हुई और बजट भी ठिकाने लग गया गजब : नशबंदी भी नहीं हुई और बजट भी ठिकाने लग गया Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, January 13, 2019 Rating: 5

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