विशेष : रंगोली आंदोलन का "इंसानियत की समोंण" दे रहा गर्माहट


देहरादून: रंगोली आंदोलन। ये नाम परिचय का मोहताज नहीं है। रंगोली आंदोलन एक रचनात्मक आंदोलन है। अपनी इसी रचनात्मकता के चलते रंगोली आंदोलन आम लोगों का आंदोलन बन गया। इसी आंदोलन के तहत इन दिनों एक शानदार अभियान शुरू किया गया है। जिसे ‘‘इंसानियत की समोंण’’ नाम दिया गया है। ‘‘इंसानियत की समोंण’’ गढ़वाली का शब्द है और इसका मतलब किसी को गिफ्ट देना या भेंट देना होता है। इस अभियान को भले ही कुछ ही दिन हुए हों, लेकिन कुछ ही दिनों में इस अभियान से कई लोग जुड़ चुके हैं। इस अभियान में www.pahadsamachar.com भी अपनी सहभागिता निभा रहा है

रंगोली आंदोलन के प्रणेता शशि भूषण मैठाणी ‘‘पारस’’ को रचनात्मक कार्यों लिए जाना जाता है। उनको इसके लिए कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं, लेकिन उनके लिए पुरस्कार से कहीं अधिक मायने लोगों की समस्याओं का समाधान और उनकी खुशी के होते हैं। राह चलते वो कुछ ऐसा कर देते हैं, जो किसी अभियान का रूप ले लेता है।
‘‘इंसानियत की समोंण’’ भी उनके कुछ नया और असरदार करने की सोच का नतीजा है। 

दरअसल, शशि भूषण मैठाणी रात को कुछ दिन पहले कहीं से आ रहे थे। इस दौरान उन्होंने रास्ते में खुले में रात बिता रहे कुछ परिवारों और उनके बच्चों को देखा। उत्सुकता से उनके पास चले गए और उनको कुछ पुराने कपड़े देने के लिए पूछा। हामी मिलते ही अपने घर में संभाले पुराने, लेकिन पहनने लायक कपड़े लेकर बांट दिए। इसकी एक पोस्ट फेसबुक पर की, फिर क्या था। एक के बाद एक लोग जुड़ते चले गए। उनका ये अभियान अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। 

‘‘इंसानियत की समोंण’’ अभियान केवल इस सर्दी तक सीमित नहीं रहेगा। यह अभियान जन सहभागिता से अब लगातार जारी रहेगा। समोण केवल सर्दी के कपड़े देनेभर का अभियान नहीं है। यह अभियान उन लोगों के लिए है, जिनको मदद की जरूरत होती है। इस तरह के अभियानों में लोगों को भी खुलकर मदद करनी चाहिए।

अभियान की शुरुआत 1 जनवरी से की गई तमाम प्रचार-प्रसार के तामझाम से दूर मैठाणी परिवार अकेले ही रात के अंधेरे में गरीबों को कपड़े बांटने निकल पड़ते हैं। अब लोग समौण में मैठाणी के मार्फत नए व पहनने योग्य पुराने गरम कपड़े गरीबों को भेज रहे हैं।  मैठाणी कहते हैं कि उनको इस तरह के काम करने से सुकून मिलता है। वो रात के अंधेरे में पेड़ों के नीचे और निर्माधीन जगहों पर लोगों को तलाश कर उनको कपड़े भेंट करते हैं। वो अपनी दोनों बेटियों को भो छोटे से ही साथ लेकर जाते हैं। उनकी मानें तो वो अपनी बेटियों में अभी से इंसानियत का बीज रोपित करना चाहते हैं, ताकि वो आगे चलकर समाज को नयी दिशा दे सकें

उनके इस अभियान में डाॅ. महेश कुड़ियाल, डाॅ. आरके जैन की पत्नी कुमकुम जैन और सहारनपुर के व्यवसायी दीपा और दीकप ने गर्म कपड़े, कंबल और रजाइयां गरीबों के लिए दान की हैं। इस तरह इस अभियान से संतोषी रावत, संतोष थपलियाल समेत कई लोगों ने शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। लगातार लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। अगर आप भी इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं तो 7060214681 और 9760560504 पर संपर्क कर सकते हैं।
विशेष : रंगोली आंदोलन का "इंसानियत की समोंण" दे रहा गर्माहट विशेष : रंगोली आंदोलन का "इंसानियत की समोंण" दे रहा गर्माहट Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, January 13, 2019 Rating: 5

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