जगदीश राम और उनका चार रुपये वाला रिक्शा

मेहमान कोना...    
जगदीश राम ने छह बच्चों का परिवार पालने के लिए साइकिल रिक्शा का हैंडल थामा तो फिर अपने अरमान पीछे छूटते चले गए। रिक्शा चलता रहा, जिंदगी पूरे चालीस साल एक ही शहर में रिक्शे के पहियों पर घूम गई। अपनी जिम्मेदारियों का बोझ ढोने के लिए जगदीश राम अनगिनत सवारियों का बोझ ढोता रहा, सवारियां अपनी मंजिल पर उतरती चली गई, मगर जिम्मेदारियों का बोझ जगदीश के कंधों से अब तक नहीं उतरा।

जगदीश मुझे और मैं जगदीश राम को नहीं जानता। राह चलते मैंने राम-राम दाज्यू कहा तो रुक गया। ...बाल बच्चे सब ठीक हैं। ...कहां रहते हो। ...यहीं पास में रहता हूं। ...किराये के मकान में। ...क्या काम करते हो। ...पहले रिक्शा चलाता था अब उम्र हो गई बच्चों ने कहा अब आप रिक्शा मत चलाया करो। अभी दो महीने पहले ही रिक्शा चलाना छोड़ दिया...।
दाज्यू बोले...चंपावत जिले के ग्राम सुन डूंगरा का रहने वाला हूं। 1978 में गांव छोड़कर बच्चों के साथ हल्द्वानी आया। पहले मकानों में मजदूरी की, लेकिन कुछ समय बाद ठान लिया कि अब मजदूरी नहीं करूंगा। चार रुपये रोजाना के किराए पर रिक्शा चलाना शुरू किया। मालिक को रोजाना चार रुपये देने ठैरे। तब कुसुमखेड़ा से कालाढूंगी चैराहे का किराया चार पांच रुपये हुआ ठैरा। बमुश्किल एक-दो सवारी मिलनी ठैरी। रिक्शा चलाकर एक महीने में ही इतने पैसे जुटा लिए कि खुद रिक्शा खरीद लिया। मैं अनपढ़ हूं लेकिन मैंने सभी बच्चों को पढ़ाया बड़ा लड़का सोलहवीं (एमए प्रथम वर्ष को जगदीश 16वीं बोल रहा था) में पढ़ रहा है। दो बेटे 15वीं में, दो बेटी 12वीं में सबसे छोटा नवीं में। 

अब बड़ा लड़का एक वकील के साथ काम कर रहा है वहीं घर का खर्चा चला रहा है इसलिए मैं अब काम नहीं करता। साठ साल का हो गया हूं, चालीस साल तक तो बस रिक्शा चलाने का काम किया। ...बातचीत के बीच में जगदीश राम हर बात के लिए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा था। ...मैने कहा वोट किसे देते हो। ...बोला वोट तो मैं हमेशा...... देता हूं।

थोड़ी बहुत और बातचीत करके मैं राम राम कह कर आगे बढ़ा। सोचा सड़क पर कभी-कभी फटेहाल घूमने वाले लोगों के बारे में हम क्या कुछ नहीं सोचते, लेकिन यह भी तो है कि उसने दूसरों को, अपने घर, परिवार और बच्चों की खातिर जिंदगी में क्या कुछ देखा, सुना और सहा होगा। हमें वहा सिर्फ गरीब नजर आता है, उसके भीतर का दिलदार नजर नहीं आता।
                                                                                                                                       ...सतेंद्र डंडरियाल
जगदीश राम और उनका चार रुपये वाला रिक्शा जगदीश राम और उनका चार रुपये वाला रिक्शा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, January 09, 2019 Rating: 5

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